स्तन से जुड़ी दिक्कत

Engorged breasts

बच्चे के जन्म देने के दूसरे या पांचवें दिन के बीच यदि आपके स्तन काफी बड़े, भारी या दर्द वाले हो जाएँ तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके स्तन में अब काफी दूध बनना शुरू हो गया है। ये भराव वैसे दो या तीन हफ्ते बाद अपने आप कम हो जाता है व इसके बाद आपके स्तन अपने आप कोमल होने शुरू हो जाते हैं।

लेकिन इस समय के बाद आपके स्तन सख्त, सूजे हुए, लटके हुए या असहज रहते हैं तो आपको स्तन की समस्या हो सकती है। ये सूजन आपकी बगल तक जा सकती है, व आपको थोड़ा बुखार भी हो सकता है।

इस समस्या से आपके बच्चे को दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। आपके निपल सख्त होने से आपके बच्चे को इससे दूध लेने में भी समस्या होती है, और कम दूध परिणाम में निकलता है। इससे आपको स्वास्थ से जुड़ी अन्य समस्या हो सकती है, इसलिए आप अपने डॉक्टर से बारे में बात करें।

इसका कारण क्या है?

अगर आपने बच्चे को जन्म देने के कुछ दिनों तक उसे सही से दूध नहीं पिलाया है तो इससे आपके स्तन सूज सकते हैं। इसलिए आपको बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद उसे सही से दूध पिलाना चाहिए। लेकिन कुछ महिलाएं चाहे कितना भी दूध पिलाएँ फिर भी उन्हें स्तन की समस्या हो जाती है।

यदि आपको दूध पिलाने में दिक्कत हो रही है, तब भी आपको ये समस्या हो सकती है, यदि आपने कृत्रिम तरीके से अपने स्तन बड़े करवाए हैं तब आपके स्तन में खून और दूध के संचार के लिए प्रयाप्त जगह बचती ही नहीं। अगर आप नियमित रूप से कसी हुई ब्रा पहन रही हैं तब भी आपके निपल पर असर पड़ सकता है।

मैं इस समस्या से कैसे बचूँ?

बच्चे को जन्म देने के बाद हर दो घंटे में उसे दूध पिलाएँ।

बच्चे को लगातार दूध दें: 24 घंटे के बाद आप बच्चे को दिन में आठ से 12 बार दूध पिलाएँ। आप बच्चे को लगातार दूध पिलाने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन बच्चा अपने हिसाब से ही दूध पिएगा। अगर आपका बच्चा तीन घंटे से ज़्यादा बिना दूध पिए सोता है तो उसे उठा दें, और दूध दें।

बच्चे को पहले एक स्तन से पूरी तरीके से दूध पीने दें, और बाद में उसे दूसरा स्तन दें। ऐसा होने में कम से कम 10 से 20 मिनट लगते हैं। अगर आपका बच्चा कम से कम 10 मिनट के लिए दूध नहीं पीता है तो अपने डॉक्टर से पूछें की क्या उसे इतनी देर तक दूध अपने आप पीने तक पंप करके दूध दिया जा सकता है।

यदि आपको आपका डॉक्टर सलाह ना दे तो तब तक अपने बच्चे को चूसक या बोतल ना दें। बच्चा बोतल या चूसक को अलग तरह से चूसता है और स्तन को अलग तरीके से।

अगर आपके डॉक्टर ने आपको कहा हो की आप अपने बच्चे को कोई सप्लिमेंट बोतल में डालकर दें तो आप वो सप्लिमेंट अपने निकले हुए दूध में ही दें। अगर आप बाहरी चीज़ में मिलाकर भी बच्चे को दूध देती हैं तो इस बात का ध्यान रखें की बच्चे को हर समय सप्लिमेंट दिए जाएँ।

अगर आपका बच्चा सही प्रकार से दूध नहीं पी रहा है तो पंप से दूध निकालकर अपने बच्चे को दें।

मैं इस समस्या का उपचार कैसे करूँ?

अच्छी बात ये है की आप इस समस्या से कुछ आसान तरीकों से सही हो सकती हैं। इन तरीकों से आप इस समस्या को कम कर सकती हैं:

दूध पिलाने से पहले आप हाथों को रगड़कर अपने स्तन पर लगाएँ, और उनकी सिकाई करें, इससे आपमें खून और दूध का संचार सही होता है। आप इस समय गरम पानी से स्नान भी ले सकती हैं। इस समय तीन मिनट से ज़्यादा ना नहाएँ, इससे आपकी सूजन बढ़ सकती है, और दूध पिलाने में दिक्कत हो सकती है।

लगातार दूध पिलाएँ: बच्चे को दूध पिलाने में आपको दो से तीन घंटे का अंतराल लेना चाहिए। यदि इसके पहले आपको दिक्कत होती है और बच्चा सो रहा है तो आप खुद ही अपने दूध को बाहर निकाल सकती हैं।

आपका बच्चा जिस स्तन से दूध ले रहा हो उसको आराम से सहलाएँ। इससे बच्चे को दूध पीने में आसानी होगी।

अगर आपके दूध पिलाने की प्रक्रिया सही चल रही हो तो अपने बच्चे को पंप से दूध न दें। अगर आपको पंप करना ही है तो थोड़ी देर के लिए करें।

दर्द कम करने या सूजन कम करने के लिए आप बच्चे को दूध पिलाने से पहले और बाद में दस मिनट के लिए ठंडे पानी की सिकाई करें।

कई महिलाओं को नर्सिंग ब्रा यानी प्रेगनेंसी के लिए बनी ब्रा से आसानी होती है। इस बात की पुष्टि कर लें की ये आपको सही से फिट होती हो और इसमें कोई तार ना हों।

अगर आपको फ्लू जैसे कोई लक्षण हैं या बुखार होता है तो अपने डॉक्टर को तुरंत फोन करें।

ये समस्या रहती कब तक है?

अच्छी बात ये है की स्तन की ये समस्या कई महिलाएं काफी जल्दी जाती हुई देखती हैं। आप अगर सही प्रकार से दूध निकाल रही हैं तो आपकी ये समस्या अपने आप 24 से 48 घंटों में चली जाएगी, या कह सकते हैं की अगर आप दो से चार घंटों में दूध पिला रही हैं तब भी ये समस्या चली जाती है।

स्तन की ये समस्या जाने के बाद आपके स्तन कोमल होना शुरू हो जाएंगे, हालांकि इनमें अब भी काफी दूध होगा। अगर आप दूध नहीं निकाल रही हैं तो ये समस्या और बुरी हो सकती है, और बाद में ये अपने आप सही होगी। यदि आप बच्चे को चाहे दूध ना भी पिला रही हों फिर भी आपको बीच बीच में दूध निकालना चाहिए, इससे आपका स्तन का भारीपन कम हो जाएगा, और इससे आपके अंदर रिस्क का खतरा भी कम रहता है। आप कई तकनीक को अपने डॉक्टर के साथ डिस्कस करके राहत पा सकती हैं।

क्या मैं बच्चे को दूध पिला सकती हूँ?

हाँ आप पिला सकती हैं, बल्कि हम कहेंगे की आपको पिलाना ही चाहिए। अगर आप दूध नहीं निकाल रही हैं या कम निकाल रही हैं तो इससे दूध के उत्पाद पर असर पड़ सकता है, निपल बंद हो सकते हैं, या इन्फ़ैकशन हो सकता है, इसलिए आपको शुरुआत से ही थोड़ा-थोड़ा दूध निकालना चाहिए।

अगर हो सके तो आपको बच्चे के पैदा होने के शुरुआती पहले या दूसरे घंटे में ही उसे दूध पिलाना चाहिए, और आपको ऐसा लगातार करना है। अपने बच्चे के अंदर भूख के लक्षण देखें, जैसे बच्चा अपने हाथों को चूसेगा या उसे अंदर बेचैनी सी दिखेगी। अपने हिसाब से कोई टाइम न बनाएँ, न ही उसके रोने का इंतज़ार करें, जब बच्चा चूसने और बेचैन दिखे तब उसे दूध पिला दें।

क्या स्तन की समस्या से बच्चे पर असर पड़ता है?

वैसे उसकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन अगर स्तन में समस्या है तो बच्चे को दूध पीने में दिक्कत आ सकती है। अगर आपको लगता है की बच्चा सही प्रकार से दूध नहीं ले पा रहा है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

और जानें

आपको पता होना चाहिए की आपको कब पंप का इस्तेमाल करना है।

ये भी सीखें की कैसे हाथ की मदद से दूध निकलता है।

उन लोगों से सलाह लें जो बच्चे को दूध पिला चुके हों

यदि आपको फिर भी बच्चे को दूध पिलाने में दिक्कत हो रही है तो अपने डॉक्टर से बारे में बात करें।

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