गर्भाशय की कहानी: माँ बनना महिला होने का सबसे अच्छा गिफ्ट है

motherhood

अन्य किसी कपल की तरह हम भी गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे थे। एक सुबह मैं सही फील नहीं कर रही थी, मुझे लगा की ऑफिस की थकान हो सकती है। लेकिन फिर मुझे लगा की मैं प्रेगनेंट भी हो सकती हूँ। घर आते हुए मैंने प्रेगनेंसी किट खरीदी। जब मैंने प्रेगनेंसी की दो लाइन देखी तो मेरे दिल में भावनाओं का सागर आ गया। मैंने ऐसा कभी भी महसूस नहीं किया था। मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन इसी के साथ मेरे दिमाग में सवाल आ रहा था की क्या मैं इस ज़िम्मेदारी के लिए तैयार हूँ? खैर फिर मैंने अपनी ये न्यूज़ अपने पति के साथ शेयर की, और उनके चेहरे पर ऐसी मुस्कान मैंने कभी नहीं देखी। उनके रिएक्शन से मुझे सब पता चल गया, और फिर उनका जवाब भी आया की वो तैयार हैं!! आखिरकार मैं प्रेगनेंसी के इस खुशियों भरे झूले पर थी। अपने अंदर एक जीवन को पालना एक अलग ही भावना होती है।

हमने ये बात अपने परिवार और दोस्तों को बताई। और जिस बात की उम्मीद थी वही हुआ, सबने कहा की ये मत करना, ये करना। यह जानकार भी काफी खुशी हुई की लोग मेरी प्रेगनेंसी से कितने खुश थे।

जब मैं अपने बच्चे की पहली तस्वीर देखने गई तो मेरे साथ मेरी माँ, मेरी सास, और मेरे पति प्रणव थे। यह एक अदबुध अनुभव था!! स्कैन के दौरान मेरी बच्ची पेट में मॉडल की तरह पोज़ दे रही थी- कभी दाएँ, कभी बाएँ और कभी सामने से। मैं उसके छोटे पाँव, हाथ, सर, आँखें और नाक तीसरे महीने में देख पा रही थी। यह फीलिंग अविस्मरणीय है!!

मैं काफी खुशकिस्मत थी की मेरी प्रेगनेंसी का समय काफी अच्छा रहा, मुझे ना सुबह जी मिचलने की दिक्कत हुई नाही कोई और समस्या। पांचवे महीने को छोड़कर जहां डॉक्टर ने बताया की मेरे बच्चे को एआरएसए(एबरेंट राइट सबक्लेवन आर्टरी) हो सकती है। यह एक दिल से जुड़ी समस्या है जहां बच्चों को क्रोमोसोम की विकारता होती है। यह काफी कठिन समय था, जहां मुझे दिन में चैन नहीं मिलता था और रातों में नींद नहीं आती थी। मैंने बस बच्चे के सही होने की प्रार्थना की। मैं और मेरे पति अपने बच्चे को सही करने के लिए कोई भी इलाज़ करवाने और किसी भी टैस्ट के लिए तैयार थे। मैंने एमनियोसेंटीसिस(उल्ववेधन) का भी उपचार लिया वो भी 22 हफ्तों की प्रेगनेंसी में, और फिर टैस्ट रिज़ल्ट अच्छे आए, और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं थी। जब मुझे पता लगा की समस्या का समाधान हो गया है तो मैं काफी खुश थी।

और आखिरकार वो दिन आया जब मेरी छोटी सी परी मेरी दुनिया पूरी करने वाली थी। सुबह 11.30 बजे मेरी पानी की थैली टूटी, और 3:30 बजे के करीब मुझे प्रसव पीड़ा होनी शुरू हो गई। 4.42 पर तीसरे पुश पर बच्ची का जन्म हुआ। खुशी में मेरे पति ने घोषणा की हमारी छोटी से प्रिंसेस प्रंजल हुई है!!

मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैंने पहली बार अपनी बेटी को देखा था। मैंने अपने जीवन मैं आज तक उससे बेहतर कोई चीज़ नहीं देखी है। मेरी आँखों में आंसु थे, जब मैंने उसे गोद में लिया। प्रंजल अब चार साल की हो गई है। वो काफी तेज़ी से बड़ी हो रही है, लेकिन ऐसा लगता है जैसे कल की बात हो। उसके साथ हर दिन पहला दिन लगता है और और हर दिन मुझे ऐसा लगता है जैसे मेरी ज़िंदगी पूरी हो गई है। मुझे नहीं लगता की माँ बनने जैसा इस दुनिया में और कोई अहसास है।