भारत में पैसे वाली छुट्टी यानी पेड मेटेरनिटी लीव बढ़ा दी गयी है, क्या यह काफी है?

 

मेटेरनिटी बेनीफिट एक्ट, 1961

2016 अगस्त के अमेंडमेंड के बाद भारत में पैसे वाली छुट्टी यानी पेड मेटेरनिटी लीव 12 हफ्तों से बढ़कर 26 हफ्ते हो गई है। सरकार द्वारा एक अच्छा कदम, जो कपल अपनी फॅमिली बढ़ाने वाले हैं उन्हे इससे काफी फायदा होगा।

हालांकि, क्या यह काफी है? शायद नहीं। देखते हैं क्यों:

अनऑर्गनाइज्ड यानी असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को इस एक्ट से कोई फायदा नहीं होगा। ज़्यादा दूर नहीं जाते हैं, हम में से कितने लोगों ने अपनी काम वाली बाई को इस बारे में छुट्टी दी है? हमारे हिसाब से कम ही लोग ऐसे होंगे। फ़ैक्टरि में काम करने वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान काफी कठिन शारीरिक काम करना पड़ता है। ये एक ऐसी स्थिति है जो सालों से देश में नहीं बदली है।

ये भी ना सोचें की ऐसा बड़ी कंपनी में नहीं होता है। कंपनी में प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में भेदभाव होना चिंता का विषय है। कई महिलाओं ने इस वजह अपने प्रमोशन खो दिए हैं और गंदे फीडबैक प्राप्त किए हैं क्योंकि वो प्रेगनेंट थी। सब लोग एक जैसे नहीं होते हैं कुछ अपने काम करने वाले वर्कर की प्रेगनेंसी के दौरान और बाद में काफी मदद करते हैं।

घर से काम करना, बढ़ी हुई मातृत्व छुट्टी, और पिता के लिए पेड लीव भी इस विषय में काफी मददगार हो सकती है।

हमें काफी अच्छा लगेगा अगर आप अपनी प्रेगनेंसी कहानी को वुमन्स वीक के साथ शेयर करेंगी। हमें बताइए की आपके बॉस ने आपको एक निश्चित सीमा रेखा से बाहर जाकर आपकी मदद की। आखिरकार यही छोटी चीज़ें बड़े रिश्ते बनाती हैं।