क्या आप प्रेगनेंसी में प्रयाप्त आयोडिन ले रही हैं?

Iodine During Pregnancy

दुनिया में हर साल एक करोड़ अस्सी लाख बच्चे आयोडिन की कमी के कारण दिमागी समस्या के साथ पैदा होते हैं। जहां अमेरिका में आयोडिन की कमी वाले केस कम ही देखे गए हैं, लेकिन आपको इस विषय से जुड़ी कुछ बातें जाननी चाहिए।

आयोडिन एक खनिज है जो खाने में पाया जाता है, और भ्रूण के दिमाग के विकास के लिए ये काफी अहम खनिज है, इसके साथ बच्चे के शारीरिक विकास के लिए भी ये जरूरी है। हालांकि हमारे शरीर को इसकी कम ही ज़रूरत होती है जीवन भर में केवल 5 ग्राम, लेकिन ये छोटी मात्रा भी काफी अहम है। आयोडिन की कमी से प्रेगनेंसी में बच्चे के दिमाग का विकास सही नहीं हो पाता और उसे विकारता रहती हैं।

पहले के समय में आपके नमक में भी सही प्रकार से आयोडिन मिल जाया करता था। लेकिन आजकल के खाने और पेय पदार्थ में इसकी काफी कम मात्रा इस्तेमाल की जाती है। अब अमेरिका में नमक में आयोडिन डालना ज़रूरी नहीं है, और जो नमक आपको चिप्स या अन्य चीजों में मिलता है वो आयोडिन वाला नहीं होता। इसी लिए मार्केट में हमें अब कम से कम आयोडिन वाला खाना मिलता है, कुछ लोग समंदर के नमक का इस्तेमाल करते हैं, आपको बता दें की समंदर से निकले नमक में आयोडिन नहीं होता है।

इसी कारण से अमेरिका की बड़ी संस्था एएपी ने 2014 में एक सलाह पत्र जारी करके बताया की प्रेगनेंट महिलाओं और दूध पिलाने वाली महिलाओं को कितना आयोडिन लेना चाहिए। ये संस्था सलाह देती है की गर्भवती महिलाओं को 150 माइक्रोग्राम आयोडिन सप्लिमेंट से, और कुल मिलाकर 290 माइक्रोग्राम आयोडिन हर दिन लेना चाहिए।

आयोडिन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

प्रेगनेंसी के दौरान आयोडिन थायरोइड की प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाता है, एक ऐसा बेस जहां आपके हार्मोन्स नियमित होते हैं जो चयपचय को नियंत्रित करते हैं, ये दिल की धड़कन, शरीर का तापमान और शरीर की अन्य क्रिया को भी नियंत्रित करता है। सही मात्रा में आयोडिन लेने से आपका बच्चे का थायरोइड अच्छा रहता है। जिन केस में बच्चों का थायरोइड कम होता है उसका आईक्यू भी कम रह सकता है, जिससे जन्म के समय विकारता आती हैं, या मौत भी हो सकती है।

आयोडिन बच्चे को दूध पिलाते हुए भी आप बच्चे को देती हैं। इसका मतलब जो भी आयोडिन आप लेती हैं वो आपके बच्चे के थायरोइड को सपोर्ट करता है और इससे दिमाग का विकास भी होता है, वो भी तब तक जब तक आपका बच्चा अपने आप खाने योग्य नहीं हो जाता है।