प्रेगनेंसी आहार में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं

Do's and don'ts of pregnancy diet
Healthy Pregnancy Diet

प्रेगनेंसी आपके जीवन का काफी खास समय होता है। समय निकलने के साथ आप अपने बच्चे के और पास आती हैं। बच्चे के बढने के साथ उसके पोषक तत्व लेने की ज़रूरत भी बढ़ती है। इसलिए आपको अपने खाने का ध्यान रखना और भी ज़रूरी हो जाता है। प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, की लिस्ट हम पेश कर रहे हैं। अपने खाने में कोई भी बदलाव करने से पहले आपको अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।

क्या खाना चाहिए

अपने आहार में कई प्रकार के फल लें

फलों की थाली से आपको और बच्चे को सभी प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं। इसकी वजह से बच्चे को कई प्रकार का स्वाद भी पहली बार मिलेगा। जिन फलों से आपको दिक्कत हो उन्हे लेना सही नहीं है। ब्लूबैरी और गाजर में एंटीऑक्सीडेंट काफी अच्छी मात्रा में होता है और इसको आपके आहार में होना चाहिए।

जहां तक हो सके जैविक और आपके शहर में उगाए फल और सब्जी लें

आपके बच्चे के प्रतिरक्षा तंत्र के विकास के समय अच्छा होता है की आप अपने शरीर में कोई भी हानिकारक रसायन ना दें। ऐसा करने पर आपके बच्चे और आपके प्रतिरक्षा तंत्र पर असर पड़ता है। कुछ स्टडी से पता चला की पानी में कीटनाशक लेने से बच्चे का जन्म समय से पहले हो सकता है यहाँ तक की उसमें कुछ विकार भी हो सकते हैं। कीटनाशक सबसे ज़्यादा पतली खाल वाले फल और सब्जी में आसानी से मिल जाते है। जैविक रूप से तैयार किए गए फल और सब्जी खाने से आपके शरीर में नुकसानदायक कीटनाशक जाने की संभावना ज़्यादा रहती है और बच्चे तक भी ये जा सकता है।

वो आहार लें जिनमें ओमेगा-3 फेटी एसिड हो

ओमेगा-3 आपके बच्चे के जन्म लेने से पहले उसके दिमागी विकास के लिए काफी अहम है। ओमेगा-3 लेने से बच्चे की देखने की शक्ति, यादाश्त और समझ बचपन में अच्छी होती है। इसके साथ ये प्रसव के बाद होने वाले डिप्रेशन को भी कम कर सकता है। वसा वाली मछली यानी फेटी फिश ही केवल ओमेगा-3 फेटी एसिड में पाए जाने वाले EPA और DHA को रखती है। दिन में कम से कम आपको 300mg DHA लेना चाहिए। अलसी के तेल, अखरोट, और ओमेगा-3 से भरपूर अंडे में अच्छी मात्रा में ALA होता है, जो आपके शरीर में DHA और EPA में बदल जाता है।

मछली चुनना काफी मुश्किल है, क्योंकि इसमें अच्छी मात्रा में ओमेगा-3 होना चाहिए पर ज़्यादा मरक्युरि नहीं होना चाहिए। मरक्युरि आपके बच्चे के तंत्रिका तंत्र के लिए काफी नुकसानदेह है। स्वोर्डफ़िश, शार्क, किंग मैकेरल और टाइल मछली नहीं लेनी चाहिए। अलास्कन सैमन, अटलांटिक मेकरेल, हेरिंग, सार्डिन और एंचवीज़ प्रेगनेंट महिलाओं के लिए अच्छी मछली मानी जाती है।

‘डबल ड्यूटी’ खाना लें

योगर्ट, पीनट बटर, चिकन, अंडा, और डेरी के अन्य प्रॉडक्ट प्रोटीन, कैल्सियम और आइरन से भरपूर होते हैं। संतरे के जूस में फोलेट और विटामिन सी होते हैं। इससे आपको फाइबर से भरपूर खाने से जैसे काली बीन और पालक से पोषक तत्व लेने में मदद करते हैं। साबुत अनाज में फाइबर, विटामिन बी, मैग्नीशियम और ज़िंक होता है।

ये आहार नहीं लेने चाहिए

हद से कुछ ज़्यादा भी ना खाएं

आधी प्रेगनेंट महिलाएं कुछ ज़्यादा ही वज़न बढ़ा लेती हैं। इसकी वजह से बच्चे में बाद में मोटापे की समस्या हो सकती है। बस अपने पेट के अनुसार खाएं। अगर आपको एक्सर्साइज़ खाने को फॉलो करने में दिक्कत आ रही है तो एक डाइटीशियन से बात करें।

पॉलिश कार्बोहाइड्रेट कभी ना खाएं

सफ़ेद चीज़ें कम लें और बिना पॉलिश हुए अनाज जैसे ओटमील, भूरे चावल, अनाज वाली ब्रेड लें। सफ़ेद ब्रेड, सफ़ेद चावल, मिठाई, और सोडा से आपके खून में ग्लूकोज़ का लेवल प्रभावित होता है। इसकी वजह से बच्चे मोटे हो सकते हैं, और उम्र के साथ उन्हे मोटापे के बीमारी हो सकती है।

कच्चा खाना ना खाएं

आपको सलाह दी जाती है की आप कच्चा या कम पका मीट, अंडे या किसी भी प्रकार का मांसाहारी खाना ना खाएं, इससे आपका बैक्टीरिया E, कोली, सैल्मनेला और लिस्टरिया से बचाव होता है। कुछ भी फ्रिज में रखने से पहले सुनिश्चित करें की तापमान 4 डिग्री से कम हो, इससे उसमें बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं।

खाने के बीच में ज़्यादा समय ना लें

3 घंटे से ज़्यादा बिना खाना खाए ना रहें। कम अंतराल पर कम खाना खाने से आपका ब्लड शुगर लेवल अच्छा रहता है, और पोषक पदार्थ हृदय से सही मात्रा में पंप होते हैं। ऐसा करने से दिल में जलन की समस्या भी कम होती है।

खुदमें पानी की कमी ना होने दें

प्रेगनेंसी में पानी की कमी ना होने देना काफी मुश्किल है, क्योंकि ज़्यादातर तरल पदार्थ आपकी खून की कोशिका से होकर आपके ऊतक यानी टिशू में जाता है। जब आपके शरीर में तरल पदार्थ कम होता है तो मरोड़े वाला हार्मोन बनता है। समय से पूर्व जन्म से बचने के लिए आपको अपने शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए, ऐसा करने से सर दर्द से भी बचाव होता है। साथ ही पथरी और चक्कर से भी शरीर बचता है। अगर आपके पेशाब का रंग साफ या हल्का पीला हो तो समझें की आपमें पानी की कमी नहीं है।