प्रेगनेंसी में विटामिन डी

Vitamin D during Pregnancy

प्रेगनेंसी में 12 हफ्ते के अंत से कैल्सियम का शोषण दोगुना हो जाता है। शरीर को प्रेगनेंसी में कैल्सियम और फास्फोरस के ज़रूरी लेवल को बनाए रखने के लिए विटामिन डी की ज़रूरत पड़ती है, इससे बच्चे की हड्डी और दाँत मजबूत होते हैं।

क्या होता है जब आप प्रेगनेंसी में प्रयाप्त विटामिन डी नहीं लेते?

प्रेगनेंसी में विटामिन डी की कमी होना एक आम बात है। विटामिन डी की कमी से बच्चे की हड्डी असाधारण बढ़ सकती है, और ये टूट भी सकती हैं, साथ ही उसे सूखा रोग भी हो सकता है।

कुछ स्टडी से ये भी पता चला है की विटामिन डी की कमी से प्रेगनेंसी की समस्या जैसे प्री-क्लेमसिया, समय से पहले जन्म, डायबटीस और बच्चे का कम वज़न हो सकता है। हालांकि अभी तक इन दावों की पूरी पुष्टि नहीं हुई है।

विटामिन डी की कमी से मसल में दर्द, कमजोरी, हड्डी में दर्द, और हड्डी कमजोर हो सकती हैं। कभी-कभी शरीर विटामिन डी की कमी के लक्षण नहीं दिखाता है। हालांकि अगर आपको इसकी कमी है तो बच्चे को भी ये दिक्कत हो सकती है। कई डॉक्टर पहली तिमाही में विटामिन डी का टेस्ट लेने की सलाह देते हैं।

विटामिन डी के स्त्रोत

मछली लीवर ऑइल, ज़्यादा फैट वाली मछली और अंडे से नैचुरल तरीके से विटामिन डी मिलता है। कई खाने के समान जैसे सेरियल, पनीर, योगर्ट आदि, विटामिन डी से भरे होते हैं। कुछ भी खरीदने से पहले जांच करें की आप सही चीज़ खरीद रहे हों।

नीचे दिए हुई चीज़ विटामिन डी के सबसे अच्छे स्त्रोत हैं:

  • 85ग्राम डब्बे वाली पिन सैमन मछली
  • 250ml ऑरेंज जूस, जिसमें विटामिन डी होता है
  • 250ml कम फैट वाला दूध, जिसमें विटामिन डी हो
  • 1 कप सेरियल, जिसमें विटामिन डी हो
  • 1 बड़े अंडे की ज़र्दी

इन कारकों से प्रेगनेंसी में विटामिन डी के लेवल पर फर्क पड़ता है:

मोटापा: शरीर का मोटापे में विटामिन डी समाहित होता है, इसलिए यह शरीर को कम मिलता है।

गाढ़ी त्वचा: गाढ़ी त्वचा वाले लोगों की त्वचा में ज़्यादा मिलेनिन होता है। मिलेनिन संसक्रीन की तरह काम करता है और इससे त्वचा में विटामिन डी का उत्पादन कम होता है।

कुछ खास दवाएं: स्टेरोइड्स, एंटी-सीज़र, कॉलेस्ट्रोल कम करने दवाएं शरीर की विटामिन लेने की शक्ति कम करती हैं।

फैट अवशोषण विकार: विकार जैसे सीलिएक रोग और क्रोहन रोग से खाने से फैट लेने की क्षमता कम होती है, और इसी वजह से विटामिन डी कम लिया जाता है।

हालांकि त्वचा सूरज की किरणों से विटामिन डी बनाती है, फिर भी कुछ एक्सपर्ट प्रेगनेंसी में धूप में कम निकलने की सलाह देते हैं। धूप में जाने से अल्ट्रावोइलेट किरणों के संपर्क में आते ही दाग पड़ सकते हैं, जिससे शरीर अलग-अलग जगह गाढ़ा हो जाता है। इसलिए ऐसी सलाह दी जाती है की प्रेगनेंसी में विटामिन डी खाने और सप्लिमेंट से ही लिया जाना चाहिए।