प्रेगनेंसी में ज़्यादा वज़न होने से दिक्कत कैसे बढ़ सकती है और इससे बच्चे पर क्या असर पड़ता है

Overweight during pregnancy

भारत में कम से कम 17% महिलाएं मोटापे और डायबटीस की शिकार हैं। गुड़गाँव की एक बड़ी डॉक्टर ने कहा है की इस बीमारी का माँ से बच्चे में जाने की संभावना काफी ज़्यादा है। लेकिन इसके भी काफी चान्स हैं की माँ बनने वाली महिलाओं की स्वस्थ डिलिवरी हो सकती है।

हालांकि प्रेगनेंसी में ज़्यादा वज़न और उच्च शारीरिक मास इंडेक्स होने से प्रेगनेंसी में समस्या बढ़ती हैं।

डॉक्टर इस बारे में पूरे श्योर नहीं हैं की ज़्यादा वज़न से प्रेगनेंसी पर क्या फर्क पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पिक्चर ज़्यादा साफ नहीं है क्योंकि प्रेगनेंसी पर उम्र, परिवार की हिस्ट्री और रहन-सहन का भी फर्क पड़ता है। हालांकि ज़्यादा वज़न से आमतौर पर प्रेगनेंसी की दिक्कतें बढ़ती ही हैं।

प्रेगनेंसी में मोटापे या ज़्यादा वज़न होने से नीचे दी गई कुछ समस्या आम हैं:

  • गर्भावधि में हाइपरटेंशन
  • गर्भावस्था की डायबटीस
  • प्रीक्लेम्सिया
  • जल्दी प्रसव

बॉडी मास इंडेक्स यानि BMI 30 या ज़्यादा होने से आपको निम्न चीज़ें होने की ज़्यादा संभावना है:

  • सहायता से जन्म
  • जन्म के बाद ज़्यादा या बढ़ी हुई ब्लीडिंग
  • सिजेरियन सेक्शन
  • अगर सिजेरियन से आप जन्म देती हैं तो आपको घाव का इन्फ़ैकशन हो सकता है
  • आपकी नसों या फेफड़े में खून का थक्का बन जाता है
  • जटिलता की वजह से आपको हॉस्पिटल में ज़्यादा समय बिताना पड़ता है
  • अगर आप प्रेगनेंसी में ज़्यादा वज़न वाली या मोटी हैं तो आपके बच्चे के बड़े होने की ज़्यादा संभावना है

स्वस्थ प्रेगनेंसी कैसे हो सकती है?

कुछ कदम उठाने से बच्चे का बचाव किया जा सकता है। अच्छा खाना, डेली एक्सर्साइज़ करना और वज़न बढ़ाने के दिशानिर्देश फॉलो करने से आपकी प्रेगनेंसी के जटिल या दिक्कत वाले कम होने की संभावना ज़्यादा रहती है।

अच्छा खाना

प्रेगनेंसी में डाइट पर रहना अच्छा नहीं माना जाता है, वो वज़न घटाने के लिए, कम पोषक पदार्थ की वजह से आपके बच्चे को नुकसान हो सकता है। जी मिचलने और उल्टी से आपको शुरुआती हफ्तों में अच्छा संतुलित खाना एंजॉय करने में दिक्कत हो सकती है। इस बात का ख्याल रखें की आप काफी पानी लें, और कम मात्रा में पोषक खाना ज़्यादा बार लें।

GI खाना लें, इसके लिए शरीर को पाचन करने में कड़ी मेहनत करनी होती है। नियमित तौर पर फल और सब्जी लें। अनाज और स्टार्च वाला खान लें, जैसे अनाज की ब्रेड और अनाज का पास्ता। फाइबर और स्टार्च से आपको अच्छी मात्रा में पोषक पदार्थ लेने में मदद मिलती है।

संतुलित आहार के साथ आपको कुछ ज़रूरी सप्लिमेंट लेने की ज़रूरत है। अगर आपका बॉडी मास इंडेक्स यानी BMI 30 से ज़्यादा है तो आपको हर दिन 5mg के फॉलिक एसिड के सप्लिमेंट लेने की ज़रूरत पड़ेगी। क्योंकि ये आमतौर पर लिए जाने वाली मात्रा 400 माइक्रोग्राम से ज़्यादा है इसलिए डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें। इस फॉलिक एसिड को शुरू के 12 हफ्ते लेती रहें। पहली तिमाही में फॉलिक एसिड लेने से आपके बच्चे के तंत्रिका तंत्र का विकास अच्छे से होता है।

आपके डॉक्टर आपको प्रेगनेंसी के दौरान हर दिन 10 माइक्रोग्राम विटामिन डी लेने की सलाह देंगे, अगर आप जन्म के बाद बच्चे को दूध पीला रही हैं तो बाद में भी आपको विटामिन डी लेना पड़ेगा। विटामिन डी से आपके बच्चे की हड्डी और दांत मजबूत होते हैं। अगर आप BMI 30 से ऊपर हैं तो विटामिन डी लेना आपके लिए फायदेमंद है। BMI 30 से ऊपर होने का मतलब है की आपमें विटामिन डी की कमी है।

एक्सर्साइज़ और वेट मैनेजमेंट

नियमित तरीके से एक्सर्साइज़ करने से आपका शरीर काफी स्वस्थ रहता है और इससे आपका शरीर प्रेगनेंसी और जन्म दोनों के लिए तैयार होता है। अच्छे आहार के साथ एक्सर्साइज़ करना तो और भी अच्छा है।

हालांकि अगर आपने प्रेगनेंसी से पहले एक्सर्साइज़ नहीं की तो आपको ज़्यादा कठिन एक्सर्साइज़ प्लेन नहीं बनाना चाहिए। अपने डॉक्टर से कुछ भी शुरू करने से पहले सलाह लें।

शुरुआत में कम असर वाली एक्टिविटी करें, जैसे टहलना या तैरना। शुरू में एक्सर्साइज़ कम करें और बाद में इसे धीरे-धीरे बढ़ाएँ। पानी की कमी कभी ना होने दें।