प्रेगनेंसी में आपको इन पे पदार्थ और खाने की चीजों से बचना चाहिए

Foods to avoid during pregnancy

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के जीवन का काफी अहम और खास समय होता है। इसलिए इस समय स्वस्थ खाने का महत्व और बढ़ जाता है। इसका मतलब है की आपको अपना खाना काफी ध्यान से चुनना चाहिए और बेकार खाने-पीने से दूर ही रहना चाहिए। कुछ खाने पीने की चीज़ें कम से कम ही लेनी चाहिए, वहीं कुछ तो बिलकुल नहीं लेनी चाहिए।

ये रही वो 11 खाने पीने की चीज़ें जो आपको प्रेगनेंसी में कम से कम या बिलकुल नहीं लेनी चाहिए

1.वो मछली जिसमें मर्करी(पारा) ज़्यादा हो

मर्करी एक काफी जहरीला पदार्थ है। ये कभी भी सुरक्षित नहीं माना जाता है और ये आमतौर पर प्रदूषण वाले पानी में मिलता है।

अगर किसी ने ये ज़्यादा ले लिया तो ये तंत्रिका तंत्र के लिए नुकसान देह हो सकता है, प्रतिरोधक तंत्र और किडनी के लिए भी।

क्योंकि ये प्रदूषित पानी में मिलता है इसलिए इस पानी में रहने वाली सभी मछलियाँ मर्करी से भरी होती हैं।

इसलिए प्रेगगनेंट महिलाओं को सलाह दी जाती है की उन्हें मर्करी से भरी मछलियाँ कम से कम खानी चाहिए।

अधिक मर्करी वाली मछलियाँ निम्न हैं:

शार्क

स्वोर्डफिश

किंग मैकरेल

टूना

हालांकि ये भी आपको जानना चाहिए की सभी मछलियों में ज़्यादा मात्रा में मर्करी नहीं होता।

कम मर्करी से युक्त मछली इस समय खाने से प्रेगनेंसी अच्छी रहती है, और ये मछलियाँ हफ्ते में दो बार खाई जा सकती हैं। फ़ैटि मछली में ओमेगा-3 फ़ैटि एसिड काफी अच्छी मात्रा में होता है।

तो कुल मिलाकर हम कह सकते हैं की प्रेगनेंट महिलाओं को महीने में दो बार से ज़्यादा अधिक मर्करी युक्त मछली नहीं खानी चाहिए। इसमें शार्क, स्वोर्डफिश, टूना और मैकरेल शामिल हैं।

कम पकी हुई या कच्ची मछली

कच्ची मछली खासकर शेलफिश से आपको कई प्रकार के इन्फ़ैकशन हो सकते हैं। इसमें नोरोवाइरस, विब्रिओ, सेलमोनेला और लिसटेरिया शामिल हैं।

इनमें से कुछ इन्फ़ैकशन माँ बनने वाली महिलाओं पर काफी असर करते हैं, और इसे उनमें पानी की कमी हो सकती है या कमजोरी आ सकती है। इनमें कुछ इन्फ़ैकशन पेट में पल रहे बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं, इससे बच्चे की जान भी जा सकती है।

प्रेगनेंट महिलाओं को हमेशा लिसटेरिया इन्फ़ैकशन होने का खतरा रहता है। बल्कि ये इन्फ़ैकशन प्रेगनेंट महिलाओं को होने का 20 गुना ज़्यादा खतरा रहता है।

यह वाइरस मिट्टी और दूषित पानी में पाया जाता है। कच्ची मछली, उत्पादन के दौरान इन्फ़ैकशन वाली हो सकती है। चाहे आप उन्हें पकाएँ या सुखाएँ।

लिसटेरिया गर्भनाल से एक अजन्मे बच्चे को जा सकता है, अगर माँ बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखा रही है तब भी बच्चे पर असर पड़ सकता है। इससे बच्चा समय से पूर्व हो सकता है, गर्भपात हो सकता है, और बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है।

इसलिए गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है की वो कच्ची मछली या सीपदार मछली से दूर ही रहें। इसमें काफी सूशी पकवान भी आते हैं।

तो कुल मिलाकर कच्ची मछली और सीप वाली मछली में बैक्टीरिया और पेरसाइट्स हो सकते हैं। इनमें से कुछ माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

कम पका हुआ, कच्चा मीट

कच्चे या कम पके हुए मीट को खाने से इन्फ़ैकशन होने का खतरा काफी रहता है।

इसमें टोक्सोप्लाज़्मा, E कोली, लिसटेरिया और सेलमोनेला शामिल है।

बैक्टीरिया से पेट में पल रहे बच्चे पर असर पड़ता है, और इससे बच्चा मृत या कई दिमाग की बीमारी के साथ पैदा हो सकता है, इसमें पागलपन, अंधापन, शामिल है।

जहां ज़्यादातर बैक्टीरिया मीट की परत पर होते हैं वहीं मांस के अंदर भी हो सकते हैं। कुछ तो पूरे मीट में होते हैं जैसे बीफ, लैम्ब और वील।

हॉट डोग्स और लंच का मीट भी चिंता का विषय बन सकता है। उत्पादन के समय या स्टोरेज के समय ये खाना इनफ़ेक्टेड हो सकता है। इसलिए आपको इनसे भी बचकर रहना है।

गर्भवती महिलाओं को ऐसे प्रोसेस्ड खाने से बचकर रहना चाहिए, अगर उन्हें ऐसा कुछ खाना भी है तो उन्हें इस खाने को काफी गरम करके खाना चाहिए।

कुल मिलाकर कह सकते हैं की कच्चे और कम पके मीट में नुकसानदायक बैक्टीरिया हो सकते हैं। अंत में कह सकते हैं की मीट काफी अच्छी तरह से पका होना चाहिए।