योगा कितने प्रकार के होते हैं?

Various types of Yoga
Yoga during pregnancy

 

इस आर्टिक्ल में हम योगा के कई प्रकारों के बारे में बाते करेंगे। योगा करने से आप फिट रहते हैं और प्रेगनेंसी में कई चीज़ें नियंत्रित रहती हैं। कुछ भी शुरू करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

योगा के विभिन्न प्रकार कैसे होते हैं?

हर प्रकार के योगा में चार तत्व होते हैं:

  • प्राणायाम
  • आसन
  • मेडिटेशन
  • रिलेक्सेशन

हर तरह का योगा दूसरे से अलग होता है क्योंकि इन तीन तत्वों पर अलग तरह से ज़ोर दिया जाता है। अष्टांग को योगा का विशुद्ध रूप माना जाता है। ज़्यादातर योगा अष्टांग पर आधारित हैं।

प्रेगनेंसी में आमतौर पर योगा दूसरी तिमाही से पहले शुरू नहीं करना चाहिए। अलग प्रेगनेंसी के लिए अलग योगा सेशन होते हैं। इसमें आपकी सेहत और बच्चे के विकास पर ध्यान दिया जाता है। योगा से ना सिर्फ आपको शांति मिलती है बल्कि इससे आपको सांस लेने का तरीका भी आता है जिससे आपको प्रसव में मदद मिलती है। इसलिए पहली तिमाही के बाद योगा करना सही होता है।

मैं प्रेगनेंसी में किस प्रकार का योगा कर सकती हूँ?

हठ योगा

हठ का मतलब होता है ताकत, इसमें शारीरिक तकनीक का इस्तेमाल होता है। ये काफी आराम से किया जाता है। शुरुआत करने वालों के लिए ये काफी अच्छा और आसान है।

आनंद योगा

योगा का यह तंत्र जागरूकता के लिए है। आनंद योगा में जागरूकता और ऊर्जा कंट्रोल पर ज़ोर दिया जाता है। ये हठ योगा जैसा ही है क्योंकि इसमें शारीरिक और सात्विक तत्वों दोनों पर ध्यान देते हैं। इससे शरीर ध्यान के लिए तैयार होता है। इसमें आप कई शरीर के भागों पर ध्यान देकर मेडिटेशन करते हैं। इसमें ध्यान सांस लेने पर भी होता है। यह माँ बनने वाली महिलाओं में काफी फेमस है, क्योंकि यह काफी सिम्पल और सेफ है।

सम्पूर्ण योगा

इस योगा में कई प्रकार के योगा का समायोजन होता है। जैसा की नाम से पता चलता है, ये आसन, प्राणायाम, मेडिटेशन, और जप से मिलके बना है। आपकी ज़रूरत के हिसाब से आपके योगा एक्सपर्ट आपको इसमें कोई बदलाव बता सकते हैं।

क्या किसी और प्रकार के योगा किए जा सकते हैं?

हाँ नीचे दिए गए योगा भी किए जा सकते हैं

सिवानन्द योगा

यह जीवनशैली के कुछ पास है। इसमें आसान, प्राणायाम, और मेडिटेशन होती है, और आपको शाकाहारी खाना लेना पड़ता है, और आपको पॉज़िटिव सोच के साथ पूजा भी करनी होती है। इसमें ध्यान अच्छी सेहत पर दिया जाता है। इसमें 12 प्रकार की मुद्रा होती हैं जिनसे योगा के सभी पहली कवर होते हैं।

विनी योगा

इसमें योगा के इस्तेमाल पर ध्यान दिया जाता है। आपके योगा के एक्सपर्ट आपके अनुसार आपकी तकनीक में थोड़े बदलाव कर सकते हैं।

भक्ति योगा

इसमें दिव्य शक्ति के साथ जोड़ पर ध्यान दिया जाता है। इसे प्यार और समर्पण को बढ़ाके किया जाता है। यह प्रकृति से दिव्य है। इसमें मेडिटेशन, जप और एक्सर्साइज़ शामिल होती है।

कुंडलिनी योगा

इसमें कुंडलिनी ऊर्जा को जगाने पर ध्यान दिया जाता है जो हमारी रीड़ की हड्डी के आधार में होती है। इसमें आसान, प्राणायाम, मेडिटेशन, और मंत्र पढे जाते हैं। इसमें आपके मूल्यों को बढ़ाने पर ध्यान देते हैं, और आपको सच बोलने के लिए प्रेरित किया जाता है। कुछ एक्सर्साइज़ से आपको थकान और गर्मी भी लग सकती है। अपने योगा एक्सपर्ट से पूछें की क्या आप ये कर सकती हैं या नहीं।

प्रेगनेंसी में किस प्रकार का योगा नहीं करना चाहिए?

कुछ ऐसे योगा जहां शरीर की काफी ताकत लगती है। इन्हे प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए।

आयंगर होगा

इसमें आसन और प्राणायाम की सटीकता पर ध्यान दिया जाता है। इसमें शक्ति, स्थिरता और गतिशीलता पर ध्यान दिया जाता है। आपको यह प्रेगनेंसी में नहीं करना चाहिए।

पावर योगा

इसमें आसन काफी तेज़ी से किए जाते हैं। इसमें काफी ज़ोर लगता है। काफी गर्मी भी होती है। प्रेगनेंसी में इसे ना करें।

बिक्रम योगा

ये एक गर्म योगा है, जो 40 डिग्री सेल्सियस तापमान के कमरे में किया जाता है। इससे आप गर्म हो सकती हैं, इसलिए प्रेगनेंसी में इसे ना करें।

आपको नीचे दी गई मुद्रा भी नहीं करनी चाहिए:

  • पीछे मुड़ना
  • 16 हफ्तों के बाद पीठ पर लेटना
  • पाँव ऊपर सर नीचे वाली कोई भी मुद्रा
  • पेट पर लेटना
  • तेज़ी से हिलना
  • मुश्किल मुद्रा
  • जिसमें सांस लेने के लिए कम समय मिले

प्रेगनेंसी एक काफी सुंदर सफर और बेहतरीन अनुभव है। इसका लक्ष्य आपकी शारीरिक, मानसिक स्थिति को बेहतर करना है। हर प्रेगनेंसी अलग प्रकार की होती है इसलिए आपको कुछ भी शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योगा एक्सपर्ट की सलाह माननी लेनी चाहिए।