प्रेगनेंसी में आप ये एक्सर्साइज़ कर सकती हैं

Workout during pregnancy

प्रेगनेंसी में एक्सर्साइज़ करने से आपको और आपके बच्चे दोनों को फायदा होता है। ये हैं सबसे सेफ तरीके से एक्सर्साइज़ करने के, ये तरीके सबसे अच्छे भी हैं।

आपको हर जगह दर्द हो रहा है, आपकी पीठ भी जवाब दे चुकी है, पाँव सूजे हुए हैं, इसके साथ कई दिक्कत आपको इस समय होंगी, मतलब आप प्रेगनेंट हैं। यदि आप इन सब कष्ट को कम करने के लिए कुछ कर पाती तो आप निश्चित ही वो सब करती। एक तरीका है, वो तरीका है एक्सर्साइज़ करना, इससे आपका मूड अच्छा रहता है, और अन्य प्रेगनेंसी की समस्या सही रहती हैं। जैसे थकना, कब्ज़, और जी मिचलना, एक्सर्साइज़ करने से आप बच्चा पैदा करने के बाद सही से और तेज़ी से रिकवर होती हैं।

आपको प्रेगनेंसी में कितनी एक्सर्साइज़ करनी चाहिए? अमेरिका की बड़ी संस्था एसीओजी कहती है की माँ बनने वाली महिलाओं को दिन में कम से कम 30 मिनट एक्सर्साइज़ करनी चाहिए। 30 मिनट में क्या किया जा सकता है? आपके दिल और बाकी शरीर को देखें तो आपको दिन में 10-10 मिनट टहल लेना चाहिए। वैसे आप अगर घर की सफाई भी करलें तो वो भी एक्सर्साइज़ में ही आता है।

क्या आपको प्रसव से पूर्व एक्सर्साइज़ करने में डर लग रहा है?

इस बात में सच्चाई है की आपको इस समय कोई खतरनाक खेल जॉइन नहीं करना चाहिए पर आपके डॉक्टर आपको बाकी सब एक्सर्साइज़ करने की सलाह देंगे। कुछ एक्सर्साइज़ वैसे भी आप अपने पेट की वजह से नहीं कर पाएँगी। इसलिए आप अपने ट्रेनर की उपस्थिती में एक्सर्साइज़ कर सकती हैं।

एरोबिक्स एक्सर्साइज़

ऐसी एक्सर्साइज़ से आपका खून का संचार अच्छा होता है, और दर्द सहने की शक्ति बढ़ती है।

स्विमिंग

स्विमिंग या पानी में एरोबिक्स करना आपके लिए काफी अच्छा वर्कआउट हो सकता है। क्यों? पानी में आपका वज़न ज़मीन के मुक़ाबले दस गुना कम होता है, इसलिए पानी में आपको काफी हल्का लगेगा। पानी में आपको जी मिचलने की समस्या से बचाव होता है, साइटिक दर्द कम होता हा, और सूजन की समस्या भी कम होती है, इसमें बच्चा भी आपके साथ तैरता है इसलिए आपके जोड़ ढीले होते हैं, और आप नैचुरल तरीके से प्रेगनेंसी के लिए तैयार होती हैं।

टहलना

टहलने से अच्छी एक्सर्साइज़ और कोई नहीं है और इस एक्सर्साइज़ को आप प्रेगनेंसी के अंत तक कर सकती हैं, शायद अपने प्रसव के दिन तक भी। आपको इसके लिए किसी भी खास यंत्र या मशीन की ज़रूरत नहीं होती, ना ही आपको जिम में मोटा पैसा बहाना पड़ता है, बस आपको रनिंग जूते लेने हैं। अगर आप पहाड़ी पर जाना चाहती हैं तो आपको अच्छे रास्ते का चुनाव करना है, प्रेगनेंसी की अंतिम अवस्था में तो पहाड़ी पर चलना अवॉइड ही करें।

दौड़ना

थोड़ा तेज़ भागना चाहती हैं? अनुभवी धावक इस समय भी काफी अच्छे से भाग सकते हैं। आपको सही रास्ते का चुनाव करना है, या आपको ट्रेडमील पर ही रहना है, और इस समय अपने शरीर को ज़्यादा थकाएँ नहीं, इस समय आपके जोड़ वैसे ही ढीले होते हैं, और इस वजह से आपको चोट लग सकती है।

सामूहिक डांस या एरोबिक्स क्लास

कम असर वाले एरोबिक्स और डांस करने से आपके दिल की धड़कन अच्छी रहती है और इससे आपके अंदर एंडोर्फिंस का संचार भी अच्छे से होता है। आपके पेट के बढ्ने के साथ-साथ आपको वो काम नहीं करना जहां आपका संतुलन बिगड़ सकता है। अगर आप एक अनुभवी एथ्लीट हैं तो ये न सोचें की इस समय भी आप पहले जैसे भाग सकती हैं। हमेशा अपने दिल की आवाज़ सुनें।

बंद दीवार में साइकलिंग

अपने पैरों और घुटनों पर अगर आपको बिना दबाव बनाए एक्सर्साइज़ करनी है तो आपको कमरे के अंदर साइकलिंग करनी चाहिए, इससे आपको गिरने का खतरा नहीं होता। अपने ट्रेनर को इस बात की जानकारी दें की आप माँ बनने वाली हैं। अगर आप ज़्यादा थक जाएँ तो आप बाहर आराम से बैठें और अपनी सांस सही करें।

अगर आपको बाहर साइकिल चलाने की आदत है तो अपने डॉक्टर से बात करें की क्या आप अब ये कर सकती हैं या नहीं, अगर वो कहें की आप कर सकती हैं तो पूछें की आपको कब ये काम करना छोड़ना है। आपके पेट की वजह से आपका संतुलन बिगड़ सकता है, और आपको इसका पता भी नहीं चलेगा, व बच्चे के साथ इतना रिस्क लेना सही नहीं है।

वज़न उठाना

प्रेगनेंसी में वज़न उठाना सेफ है, आपको एक दम से भारी वज़न उठाने से बचना चाहिए, बल्कि आपको इसकी जगह कम वज़न बार-बार उठाना चाहिए। आपको बीच में अपनी मशीन भी बदलनी चाहिए, इससे आपको चोट का डर भी नहीं रहता है। इस समय भी अपने दिल की आवाज़ सुनें, और अपने आप को ज़्यादा थकाएँ नहीं।

पिलेट्स

प्रेगनेंसी में पिलेट्स करने का केवल एक उद्देश्य होता है और वो है आपकी मसल को मजबूत करना, और जोड़ मजबूत होने से आपका पीठ का दर्द कंट्रोल में रह सकता है, और इससे आपकी मुद्रा भी अच्छी होती है, पिलेट्स का प्रेगनेंसी में काफी फायदा है।

प्रसव पूर्व वाला योगा

प्रेगनेंसी में योगा करने से आपका एक्सर्साइज़ जैसा काम ही हो जाता है। इससे आप रिलेक्स होती हैं, आपमें लचक आती है, और आपकी सांस भी अच्छी होती है, इन सब चीजों से आप बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार होती हैं। आप ऐसी योगा क्लास को देखें जो खासकर प्रेगनेंट महिलाओं के लिए बनाई गई हैं, या अपने योगा ट्रेनर को ही पूछें की आपके लिए अब कौन सा योगा सबसे अच्छा है। इस समय विक्रम योगा ना करें, ये योगा गरम कमरे में किया जाता है, आपको इस समय ताज़ा हवा की काफी ज़रूरत होती है।

आपमें हमेशा प्रेरणा बनी रहना

प्रेगनेंसी में कोई भी एक्सर्साइज़ करते हुए सबसे अहम बात है वो एक्सर्साइज़ करना जो आपके लिए बेस्ट हो, और इसे लगातार बदलते रहें, इससे आपका मन लगा रहेगा। इस बात का ध्यान रखें की प्रेगनेंसी में फिट रहने के और तरीके भी हैं, और कुछ ऐसी एक्सर्साइज़ भी हैं जो आपको इस समय नहीं करनी चाहिए। किसी भी एक्सर्साइज़ को शुरू करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से हमेशा बात करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में एक्सर्साइज़ करने के कोई रिस्क हैं?

हाँ, इस बात में सच्चाई है की आपको इस समय कोई बड़े एडवेंचर स्पोर्ट्स नहीं सीखने चाहिए, जैसे घुड़-सवारी, लेकिन इसके अलावा आप बाकी सभी एक्सर्साइज़ कर सकती हैं। इसके अलावा आप बढ़े हुए पेट के साथ वैसे भी साइकलिंग, और पहाड़ों पर चढ़ने जैसी एक्टिविटी नहीं कर पाएँगी।

इसके साथ हम आपको कहना चाहेंगे की आपको कोई भी एक्सर्साइज़ करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। कुछ कंडिशन जैसे एनीमिया, प्लेसेन्टा प्रिविया, और अन्य की वजह से आपको एक्सर्साइज़ करने से बचना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में सुरक्षित तरीके से एक्सर्साइज़ करने से जुड़ी सलाह

आप जिम जाने के लिए तैयार हैं? जहां प्रेगनेंसी में एक्सर्साइज़ करना बिलकुल सेफ माना जाता है वहीं आपको प्रेगनेंसी में कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए। जैसे:

एक्सर्साइज़ अभी करनी शुरू की है? सब आराम से करें: अगर आपने शुरुआत में ही सब कुछ करने के बारे में सोचा तो आपको मासपेशियों में भयंकर दर्द हो सकता है, या कोई चोट भी लग सकती है। आपको दिन में 20 मिनट से शुरुआत करनी चाहिए, इसमें पहले थोड़ा वार्म-अप करें और फिर धीरे-धीरे 30 मिनट के लिए एक्सर्साइज़ करें।

जिम अगर पहले भी कर रहे थे तो भी ज़्यादा लिमिट पार ना करें: अगर आप पहले से ही काफी जिम कर रही थी तब भी आपको दिमाग में एक बात का ध्यान रखना है की आपको इस समय एक्सर्साइज़ का समय या उसकी गहनता ज़्यादा बढ़ानी नहीं है।

खुदको ठंडा रखें: इस समय गरम पानी से दूर ही रहें, क्योंकि माँ का तापमान 1.5 डिग्री फ़ेरेनहाइट से ज़्यादा बढ़ना नहीं चाहिए। अगर बाहर ज़्यादा गर्मी है तो आपको एसी वाले कमरे में एक्सर्साइज़ करनी चाहिए।

वार्म-अप और कूल-डाउन: एक्सर्साइज़ करने से पहले थोड़ा वार्म-अप करने से आपका दिल और खून संचार सही तरीके से होता है, और इससे आपकी चोट के चान्स कम होते हैं। यदि आप एक दम से एक्सर्साइज़ करते हैं तो इससे आपके खून के संचार पर असर पड़ता है, और मासपेशियाँ भी दिक्कत में आ सकती हैं। सोने से पहले आपको थोड़ी देर के लिए टहलना या रिलेक्स करना चाहिए।

अपने शरीर की आवाज़ सुनें: जब आप प्रेगनेंट होती हैं तो उस समय तक एक्सर्साइज़ ना करें जब आपका शरीर बिलकुल ही थक जाए। यदि आप सोच रही हैं की धड़कन चैक करके आप पता लगा लेंगी की सबकुछ सही है तो आप गलत हैं। इसकी जगह आपको अपने शरीर की आवाज़ सुननी चाहिए। आपको अच्छा लगना चाहिए, दर्द हो रहा है तो मतलब कुछ गड़बड़ है। आपको थोड़ा पसीना आए तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन एक दम से पानी-पानी हो जाना भी सही नहीं है। आपको जहां थोड़ी गहन एक्सर्साइज़ से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए, लेकिन प्रेगनेंसी में आपको हर चीज़ का काफी खयाल रखना होता है। आपको उतनी गहनता से एक्सर्साइज़ करनी चाहिए जिसमें आप लोगों से सही प्रकार से बात कर सकें। आपको इस समय ऊर्जा से भरपूर फील करना चाहिए, नाकी एक दम से थका-थका।

बुरी स्थिति को समझें: अगर आपको एड़ी से ऊपर दर्द हो, सूजन हो या मसल में कमजोरी लगे तो आपको एक्सर्साइज़ करना एक दम बंद कर देना चाहिए। अगर आपको कमजोरी से संतुलन बनाने में भी दिक्कत हो रही है तो भी आपको एक्सर्साइज़ करना बंद कर देना चाहिए। अगर आपको हिप से लेकर सर तक कहीं भी एक दम से दर्द हो जाए तो आपको आपको तुरंत डॉक्टर को फोन करना चाहिए। अगर आपको थोड़ा सा खिंचाव आए और वो अपने आप ना जाए, दिल की धड़कन बढ़ जाए, चलने में दिक्कत हो या एक दम से सर में दर्द हो तो आपको अपने डॉक्टर को फोन करना चाहिए।

अपनी कमर का खयाल रखें: ऐसी एक्सर्साइज़ करने से बचें जिसमें आपको एक दम पीठ के बल लेटकर एक्सर्साइज़ करनी हो, खासकर चौथे महीने के बाद। आपके बढ़ते हुए गर्भाशय से आपकी खून कोशिका पर असर पड़ सकता है, जिससे आपके संचार पर असर पड़ता है।

कुछ गतिविधि से बचें: पूरे सिट-अप्स या डबल लिफ्ट से आपको बचना ही चाहिए। वो गतिविधि भी ना करें जिसमें आपको काफी झुकना पड़ता हो। वो काम भी ना करें जिसमें आपको एक दम से हिलना पड़े।

सही मात्रा में पानी लें: आधा घंटा एक्सर्साइज़ करने पर आपको कम से कम एक गिलास पानी पीना चाहिए। अगर ज़्यादा ही गर्म मौसम हो तो आपको और पानी पीना चाहिए। एक्सर्साइज़ करने से 30-45 मिनट पहले आपको पानी पीना चाहिए, आपको एक्सर्साइज़ के दौरान और बाद में भी पानी लेना है।

स्नैक: अगर आप 45 मिनट से ज़्यादा देर के लिए एक्सर्साइज़ कर रही हैं तो आपका शुगर लेवल कम हो सकता है, इसलिए आपको एक्सर्साइज़ करने के बाद लाइट प्रोटीन वाला स्नैक लेना चाहिए।

कपड़े: आपको इस समय खुले हुए कपड़े पहनने चाहिए, जिसमें आपको सांस लेने में दिक्कत ना हो, ऐसी ब्रा पहनें जो आपके बढ़े हुए स्तन को सहारा दे सके। आपको अपने जूते भी बदलने चाहिए, इस समय वो जूते पहनें जिनमें आपके गिरने का डर ना हो।

हमेशा खुदको प्रोत्साहित करें: प्रेगनेंसी में अपने लिए एक्सर्साइज़ रूटीन चुनना काफी सिम्पल है: आपको वही एक्सर्साइज़ करनी चाहिए जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, आपको अपनी एक्सर्साइज़ बदलती भी रहनी चाहिए, इससे आपका एक्सर्साइज़ करने में मन लगा रहेगा। ऐसा करने से आपको जब कुछ बेकार खाने का मन करेगा तब भी आप अपने आपको एक्सर्साइज़ करने के लिए मना ही लेंगी।

इस बात को भी दिमाग में रखें की प्रेगनेंसी में फिट रहने के और भी तारिके हैं, साथ ही कुछ एक्सर्साइज़ आपको बिलकुल बीह नहीं करनी चाहिए। अगर आपको समझ नहीं आए की क्या सेफ है तो अपने डॉक्टर से हमेशा सलाह लें। आप चाहे जो भी करें लेकिन अपने आपको कभी भी कष्ट ना दें।

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