प्रेगनेंसी मेँ एक्सर्साइज़ करते हुए आपको ये काम नहीं करने चाहिए

Do's and Don't exercising during pregnancy

आपने प्रेगनेंसी मेँ एक्सर्साइज़ करने के कई फायदे सुने होंगे, जैसे अच्छी नींद आना, ज़्यादा ऊर्जा आना, और सहनशक्ति बढ़ना। आपके लिए टहलना, और स्विमिंग करना इस समय काफी अच्छा है। पर प्रेगनेंसी के समय आपको कुछ एक्सर्साइज़ नहीं करनी चाहिए। आपको पता होना चाहिए की कौन सी एक्सर्साइज़ आपके लिए अच्छी और कौन सी आपके लिए इस समय अच्छी नहीं है।

ये एक्सर्साइज़ नहीं करनी चाहिए

अगर आप प्रेगनेंट होने से पहले से एक्सर्साइज़ कर रही हैं तो अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें की आप उन एक्सर्साइज़ को प्रेगनेंसी के बाद भी कर सकती हैं या नहीं। आपको इन शारीरिक क्रिया से दूर ही रहना चाहिए:

वज़न कम करने वाली एक्सर्साइज़: वैसे तो आपके प्रेगनेंसी के पहले वज़न पर निर्भर करता है, लेकिन आप प्रेगनेंसी मेँ 25-32 पाउंड वज़न बढ़ा सकती हैं। आपके लिए यह समय काफी मुश्किल हो सकता है, लेकिन वज़न घटाने का काम आप बच्चे को जन्म देने के बाद भी कर सकती हैं। जब तक आप प्रेगनेंसी मेँ अच्छा आहार ले रही हैं तब तक आपके बच्चे का विकास भी अच्छा होगा।

कुछ खेल: मुश्किल खेल जैसे फुटबॉल, बास्केटबॉल, और आइस हॉकि से आपके पेट को नुकसान हो सकता है। पहली तिमाही मेँ आपको ऐसे किसी भी खेल से दूर ही रहना चाहिए।

वो एक्टिविटी जिनमें गिरने का डर हो: जिन एक्टिविटी मेँ आपको संतुलन बनाने की ज़रूरत होती है, उन्हें करने से आपके गिरने के रिस्क बढ़ जाते हैं, जैसे स्कीइंग और घुड़सवारी। यहाँ तक की प्रेगनेंसी मेँ स्कूटर चलाने से भी आपको नुकसान हो सकता है। 12 से 14 हफ्ते के बाद आब जिम मेँ साइकिल चलाने का काम कर सकते हैं। अगर आप बाइक से चलते हैं तो अपने डॉक्टर से अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा के बारे मेँ बात करें।

शारीरिक क्रिया कुछ ज़्यादा करना: अपने शरीर को आम दिनों मेँ ज़्यादा पुश करना अच्छा माना जाता है, लेकिन जब आप प्रेगनेंट हैं तब इससे आपके गर्भाशय मेँ खून का संचार कम हो सकता है। आपको एक्सर्साइज़ करते हुए अपनी सांस नहीं फुलानी है। अगर आपने अपनी सांस फुला दी है तो आराम करें।

उछल-कूद: प्रेगनेंसी मेँ आपके जोड़ ढीले पड़ते हैं, जिससे आपको चोट लगने का खतरा बढ़ता है। आपको इस समय ज़्यादा तेज़ी से उछल-कूद करने वाली शारीरिक क्रिया नहीं करनी चाहिए 

अधिक ताप: गर्मियों के दिनों में पहले ही प्लैनिंग कर लें, और सुबह की ठंडक में ही आपको एक्सर्साइज़ कर लेनी चाहिए, या ऐसे जिम में एक्सर्साइज़ करें जहां आपको एसी की सुविधा मिले। आपको इस समय बिक्रम और अन्य गर्मी पैदा करने वाले योगा से दूर रहना चाहिए, और काफी पानी भी लेती रहें।

पीठ के बल लेटना: कुछ मिनट के लिए अपनी पीठ के बल लेटना कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। लेकिन गर्भाशय के बड़े होते ही आपके अंदर खून के संचार पर असर पड़ सकता है। ऐसी कोई भी गतिविधि ना करें जिसमें आपको पीठ के बल लेटना पड़ता हो, वो भी दो मिनट से ज़्यादा।

ऊंचाई से बचें: अगर आप पहाड़ों पर जा रही हों तो 6,000 फुट से नीचे वाली जगह पर ही एक्सर्साइज़ करें। अगर आपको फिर भी एक्सर्साइज़ करनी है तो अपने डॉक्टर या नर्स से बात करें और तब कोई भी एक्सर्साइज़ करें। ऊंचाई के ज्वार के निम्न लक्षण हैं:

सर में दर्द

जी मिचलना

उल्टी आना

थकान लगना

चक्कर आना

सांस लेने में दिक्कत होना

अगर आपको ऊपर दिए गए कोई भी समस्या हो तो अपने डॉक्टर को तुरंत इस बारे में कॉल करें।

समंदर के अंदर ना जाएँ: अगर आपने समंदर में गोता लगाने या कहें की स्कूबा डाइविंग का कोई भी प्लैन बनाया है तो इसे अभी के लिए भूल जाएँ। समंदर के अंदर दबाव अलग होता है और इससे आपके बच्चे पर असर पड़ सकता है।

एक्सर्साइज़ या एक्टिविटी में बदलाव करें

अगर आपकी कोई फेवरेट गतिवधि ऊपर नहीं करने वाली लिस्ट में हो तो अपनी एक्सर्साइज़ को बदलें, और कुछ भी बदलाव करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लेनी चाहिए। नीचे कुछ सलाह हैं:

गहनता कम करें: काफी तेज़ी से भागने से अच्छा है की आप लंबी वॉक पर जाएँ। योगा करने से अच्छा है आप प्रसव पूर्व का योगा करें।

एक्सर्साइज़ कम देरी के लिए करें: जैसे ही आपकी प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है वैसे ही आपको जल्दी से थकान लगती है। आप कम एक्सर्साइज़ करके अपनी ऊर्जा बचा सकती हैं। अगर आप 30 मिनट की वॉक नहीं कर सकती तो दिन में 10 मिनट की कई वॉक लें।

कम वज़न का इस्तेमाल करें: इस समय आपको अधिक वज़न उठाने से अच्छा है की कम वज़न को कई बार उठाएँ। भारी वज़न से आपके जोड़ों पर असर पड़ सकता है।

इन सब बदलाव के बाद आप प्रेगनेंसी में कई प्रकार से एक्सर्साइज़ कर सकती हैं, ऐसे एक्सर्साइज़ करने से आपको और आपके बच्चे दोनों को फायदा होगा। जिम जाने या कोई भी एक्सर्साइज़ करने से पहले आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

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