कॉर्ड रक्त बैंकिंग: क्या है ये और इसके लिए क्यों जाया जा सकता है?

Cord blood banking

कॉर्ड रक्त क्या है?

आपके बच्चे कि गर्भनाल में मौजूद रक्त को कॉर्ड रक्त कहते हैं। इसमें मूल कोशिका होती हैं जो बाद में जाकर रक्त कणिका, अंग और ऊतक में बढ़ते हैं।

कॉर्ड रक्त मूल कोशिका केवल एफडीए द्वारा प्रमाणित हॉस्पिटल में कई भयंकर बीमारियों में मदद करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन विशेषज्ञ कोशिका का प्रयोग कई प्रकार कि बीमारी से लड़ने के लिए किया जाता है।

आपके बच्चे के गर्भनाल के रक्त को इकट्ठा करके भविष्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

कॉर्ड रक्त बैंकिंग क्या है? इसमें आपके बच्चे के जन्म के समय उसकी गर्भनाल में मौजूद रक्त को भविष्य के लिए इकट्ठा किया जाता है। कॉर्ड रक्त में जीवन को बचाने वाली कोशिका मूल कोशिका होती हैं, जिसे इंग्लिश में स्टेम सेल्स कहते हैं।

कॉर्ड रक्त को इकट्ठा करने के लिए आपके पास दो विकल्प हैं:

आप अपने बच्चे के कॉर्ड रक्त को किसी कि मदद करने के लिए दान दे सकते हैं।

आप अपने बच्चे के कॉर्ड रक्त यानी नाल के रक्त को अपने परिवार कि मदद के लिए इकट्ठा करने के लिए प्राइवेट रक्त बैंक को पैसा दे सकते हैं।

नाल रक्त को कैसे एकत्रित करते हैं?

कॉर्ड रक्त जन्म के तुरंत बाद इकट्ठा किया जाता है। एकत्रीक करने कि प्रक्रिया काफी दर्दरहित और आपके बच्चे व आपके लिए एक दम सुरक्षित है, इससे आपके प्रसव और डिलिवरी पर ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता। हालांकि ये इनता दर्दरहित है कि इसके होने का किसी को आभास भी नहीं होता।

कॉर्ड को काटना

आपने बच्चे को जन्म योनी या ऑपरेशन के द्वारा दिया हो, दोनों ही स्थिति में कॉर्ड जकड़ी रहती हा और फिर काटी जाती है। इसे आपके पार्टनर काट सकते हैं या आपके डॉक्टर।

अगर आप चाहते हैं की आपकी कॉर्ड को दबाने में देर करना चाहते हैं तो अपने डॉक्टर से समय से पूर्व बात करें।

एसीओजी सुझाव देता है की बच्चे की कॉर्ड काटने और जन्म के बीच 3-60 सेकंड की देरी होनी चाहिए, और इससे सब हेल्दी होता है। ऐसा माना जाता है की देर में कॉर्ड काटने से बच्चे के लिए अच्छा होता है। इससे खून की क्वालिटी अच्छी होती है।

कॉर्ड के खून को अलग करना

आपके डॉक्टर गर्भनाल की नस में एक सुई घुसाते हैं, ये सुई आपके बच्चे से बिलकुल दूर रहती है। फिर खून एक बैग में आता रहता है। इसमें वैसे 1-5 आउंस तक इकट्ठा किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 10 मिनट से कम का समय लगता है।

खून बैंक के लिए इसे भेजा जाता है

फिर इस खून को कॉर्ड ब्लड बैंक के लिए भेजा जाता है, जहां इसकी जांच होती है, और इसे सही तापमान में रखा जाता है। और इसे बाद के इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।

कुछ फॅमिली ब्लड बैंक गर्भनाल के कुछ हिस्से को रखने की सुविधा भी देते हैं। गर्भनाल के ऊतक में वो स्टेम कोशिका होती हैं जो कॉर्ड के खून से अलग होती हैं, और अभी इसके इस्तेमाल पर अध्यन चल रहा है।

कॉर्ड ब्लड बैंकिंग के फायदे क्या हैं?

कॉर्ड खून में स्टेम सेल्स की अच्छी मात्रा होती है। स्टेम सेल से खून और प्रतिरोधक तंत्र अच्छी तरह काम करता है। ये अन्य कोशिका या सेल्स में बदल सकते हैं, इससे ऊतक फिर से बन सकते हैं, अंग फिर से बन सकते हैं, और रक्त वाहिकाएँ फिर से बन सकती हैं। जिससे कई बीमारियों का इलाज हो सकता है।

स्टेम सेल्स यानी मूल कोशिका अस्थि मज्जा में भी पाया जाता है, ये भ्रूण, भ्रूण के ऊतक, बाल, दाँत, चर्बी, और मासपेशियों में पाया जाता है। मनुष्य के सभी हिस्सों में मूल कोशिका होती हैं, और इनमें से किसी भी हिस्से से फिर से मूल कोशिका नहीं ली जा सकती है।

जिन मरीजों को ल्यूकेमिया यानी कैंसर की समस्या है, उन्हें बार-बार कीमोथेरेपी दी जाती है, जिससे उनके बीमारी वाले ऊतक खत्म हो सकें, जिससे नॉर्मल रक्त कोशिका का उत्पादन फिर से हो सके। ऐसा होने से बीमारी अपने आप कम हो जाती है।

अगर उपचार नाकाम होता है या बीमारी वापस आती है तो डॉक्टर स्टेम सेल उपचार ही करते हैं। स्वस्थ कॉर्ड ब्लड से नया खून और प्रतिरोधक तंत्र बनने में मदद मिलती है, इससे मरीज के सही होने के काफी चान्स रहते हैं। इसी कॉर्ड खून से डॉक्टर कई और बीमारी का भी उपचार करने में सफल रहे हैं।

अस्थि मज्जा और परिधीय स्टेम सेल्स से अलग कॉर्ड ब्लड का स्टेम सेल पूरा परिपक्व नहीं होता और उन्हें नहीं पता होता की फ़ोरन सब्सटेन्स से कैसा लड़ा जाए। खून बदलने वाले मरीज़ को कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल्स से मैच करना काफी आसान है।

इसी वजह से कॉर्ड खून और अहम हो जाता है। 2016 में 28 मरीज जो स्टेम सेल ट्रेन्स्प्लेंट लेने वाले थे, उन्होने इसमें कॉर्ड रक्त लिया। ज़्यादा से ज़्यादा वयस्क कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट ले रहे हैं, अगर एक कॉर्ड रक्त से फायदा नहीं हुआ तो वो दूसरा कॉर्ड रक्त लेते हैं। हर साल 2000 कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट पूरी दुनिया में होते हैं।

कॉर्ड खून से किन बीमारियों का इलाज़ हो सकता है?

कॉर्ड रक्त स्टेम सेल्स से कम से कम 80 बीमारियो का इलाज़ हो चुका है, जिसमें कैंसर, खून की विकारता, और प्रतिरोधक क्षमता में कमी शामिल है। इसमें ल्यूकेमिया, एप्लेस्टिक एनीमिया, होजकिंस बीमारी, और लिंफोमा शामिल है।

कॉर्ड ब्लड ट्रांसप्लांट से माना जाता है थालसेमिया और सिकल सेल एनीमिया, और कुछ ब्लड ग्रुप में होने वाली खून की समस्या हो सही किया जाता है। इससे बच्चों के लिए जानलेवा बीमारियों का भी इलाज़ किया जाता है। इसमें क्रेब और सैनफिलिपो जैसी बीमारी शामिल हैं।

अपने स्टेम सेल्स से उपचार करवाना सबसे अच्छा है?

ऐसा ज़रूरी नहीं है। ये निर्भर करता है की बीमारी कौन सी है और उसका उपचार कैसे हो रहा है। जब डॉक्टर स्टेम सेल्स से शरीर को खुदको ठीक करने में मदद करते हैं तब मरीज के अपनी कोशिका ही सबसे अच्छी मानी जाती है। इस बात की संभावना कम ही है की मरीज का अपना शरीर उसके अपनी ही कोशिका को रिजेक्ट करेगा।

लेकिन जब शरीर गलत कोशिका बनाता है, जैसे बीमारी कैंसर, या कोई आनुवांशिक खून विकारता है तो ट्रेन्स्प्लेंट किसी और द्वारा आना चाहिए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मरीज की अपनी कोशिका में दिक्कत हो सकती है, जिस वजह से उसे कैंसर हुआ है, और बीमार कोशिका को फिर से अंदर डालकर आप बीमारी को और फैलाने का काम ही करेंगे।

कॉर्ड रक्त का इस्तेमाल और किसलिए होता है?

अभी भी इस बात पर अध्यन चल रहा है की इसका इस्तेमाल कैसे हो सकता है।

औटिस्म

अध्यन में अभी बच्चों को उन्हीं के कॉर्ड रक्त से सेरेब्रल पाल्सी के उपचार के लिए देखा जा रहा है। 2017 में छपी एक अध्यन के अनुसार जिन बच्चों को औटिस्म था, उन्हें जब उनके ही कॉर्ड ब्लड से उपचार दिया गया तो परिणाम काफी अच्छे थे, शुरू के छह महीने में ये परिणाम काफी तेज़ी से अच्छे दिखे।

दिमाग में पर्दों में पानी आजाना, टाइप 1 डाइब्टीस

जिन बच्चों के दिमाग में पानी होता है उनको भी अभी अध्यन में उनके ही कॉर्ड ब्लड से उपचार दिया जा रहा है, ये अध्यन अमेरिका में चल रहा है, जन्म के समय ऑक्सिजन में कमी, खतरनाक दिमाग की बीमारी टाइप 1 डाइब्टीस और दिल की बीमारी का इससे उपचार हो रहा है। अगर ये सभी अध्यन/टेस्ट सफल हुए तो इनका उपचार पूरी दुनिया में कुछ ही सालों में उपलब्ध होगा।

बड़ों के लिए उपचार

शोध करने वालों के अनुसार बड़े लोगों में कैंसर का एक दिन उनके अपने ही कॉर्ड खून से इलाज़ हो सकेगा, वो कॉर्ड खून जो जन्म के समय लिया गया था। ऐसा माना जा रहा है की कॉर्ड खून से उस कैंसर का इलाज़ हो सकेगा जो आनुवांशिक नहीं है।

कुछ अध्यन इस दिशा में भी चल रहे हैं की अस्थि मज्जा के स्टेम सेल्स की जगह एक दिन कॉर्ड ब्लड की स्टेम कोशिका से उपचार होगा। अभी स्टडी के अनुसार अभी डायब्टीस, रीढ़ हड्डी की चोट, दिल का निष्क्रिय होना, और तंत्रिका की विकारता का पर उपचार इसी कॉर्ड ब्लड द्वारा हो रहा है।

जानवरों पर अध्यन

यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लॉरिडा के वैज्ञानिकों ने पाया की कॉर्ड ब्लड की स्टेम कोशिका या मूल कोशिका से उस चूहे का इलाज़ हो गया जिसको स्ट्रोक और रीढ़ की हड्डी में चोट की समस्या थी, और चूहा लंबे समय तक जीने में सफल रहा। ये सेंटर अन्य बीमारियों के इलाज़ के बारे में भी विचार कर रहा है।

इस वैज्ञानिक दस्ते के नेता पॉल सैनबर्ग ने कहा,”इनमें से ज़्यादातर अध्यन जानवरों पर किए गए हैं लेकिन परिणाम काफी अच्छे रहे हैं।“ लेकिन कई विशेज्ञ कहते हैं की माता-पिता को सलाह देते हैं की वो ऐसे किसी भी उपचार को ध्यान से देखकर चुनें। ये कहना भी मुश्किल है की ऐसे उपचार कब लोगों के लिए उपलब्ध होंगे।

सतर्कता

इसमें आजकल काफी इलाज़ हो रहे हैं, और कई लोग इस इलाज़ को लेकर काफी आशावादी हैं, क्योंकि इसके परिणाम अच्छे रहे हैं। इस बात की उम्मीद भी है की किसी दिन वयस्क भी इससे लाभवान्वित हो पाएंगे।

अमेरिका में कहाँ और कितना कॉर्ड रक्त जमा किया जाता है?

अमेरिका में फॅमिली ब्लड बैंक में 1 मिल्यन यूनिट से ज़्यादा कॉर्ड रक्त जमा किया जाता है। और इसकी मात्रा में दिन-प्रतिदिन बढ़ौत्तरी होती जा रही है। क्योंकि लोग इसका इस्तेमाल अब विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए कर रहे हैं।

एक अध्यन के अनुसार 5 प्रतिशत माँ-बाप अपने बच्चे के कॉर्ड रक्त को जमा करवाते हैं। इसमें 90 प्रतिशत फॅमिली बैंक को जाता है और 10 प्रतिशत पब्लिक बैंक को जाता है।