बच्चे को शांत करने वाला चूसक: फायदे, नुकसान, और उनको इस्तेमाल करने के तरीके

Pacifier for babies

क्या मुझे अपने बच्चे को चूसक देना चाहिए?

माता-पिता होने के नाते आपकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है अपने बच्चे को सहज करना, इसलिए आप इस चूसक का इस्तेमाल कर सकती हैं।

कुछ बच्चे गले लगाने और हिलाने व खाते हुए चूसके शांत हो जाते हैं, लेकिन कुछ बच्चों के लिए यह काफी नहीं है। दूध पीने के बाद भी अगर आपके बच्चे को चूसने का मन करे तो उसे आप ये चूसक दे सकती हैं।

इस चूसक से आपके बच्चे को वैसे कोई पोषण नहीं मिलेंगे, लेकिन अगर खाना खिलाने के बाद भी आपका बच्चा शांत नहीं हो रहा है तो आपके काम यह चूसक आ सकता है।

चूसक का एक और फायदा: कुछ अध्यन में पता चला है की जो बच्चे चूसक का इस्तेमाल सोते हुए करते हैं, उनमें सडन इंफेंट डेथ सिंड्रोम होने का खतरा कम होता है, मतलब एक दम मौत होने का खतरा। दूसरी ओर चूसक की आदत वैसे नहीं पड़ती जैसे बच्चे को अंगूठा चूसने की आदत पड़ती है, इसे बाद में छुड़ाया भी जा सकता है।

चूसक के नुकसान क्या हैं?

चूसक से बच्चे के कान में इन्फ़ैकशन हो सकता है। बड़े बच्चों में कान के इन्फ़ैकशन का खतरा कम होता है, इसलिए आपको बच्चे को बस आधा साल तक ही इस चूसक का इस्तेमाल करने देना चाहिए।

ऐसा भी माना जाता था की जिन बच्चों को स्तन का दूध पीने से पहले चूसक पीने की आदत पड़ती थी, उन्हें निपल की आदत आसानी से नहीं पड़ती थी, मतलब दूध पिलाने में दिक्कत। लेकिन अब विशेषज्ञ कहते हैं की इन दोनों के बीच ऐसा कोई संबंध नहीं है। लेकिन फिर भी अगर आप अपने बच्चे को अपना दूध पिला रही हैं तो उसके दूध पीने में एक्सपर्ट बनने से पहले आप उसे चूसक ना ही दें तो अच्छा है। चूसक को चूसना और स्तन को चूसना दो अलग काम हैं, और अमेरिका में बच्चों की एक बड़ी संस्था ने बताया है की बच्चे को स्तन से दूध पीने की आदत पड़ने तक आपको बच्चे को चूसक देने से बचना चाहिए। वैसे सभी माताओं को यही सलाह दी जाती है की वो अपने बच्चे को दूध पिलाने में पहले सफल हों, अगर उन्हें इसकी आदत पड़ जाए तो वो उसके बाद अपने बच्चे को चूसक दे सकती हैं। हर चीज़ के अपने फायदे और नुकसान हैं, इसलिए जो भी करना है आप अपने डॉक्टर की सलाह से करें। किसी भी स्थिति में पूरा श्योर होना ही बेस्ट है।

बच्चे का एक महीने का हो जाना ही सही है। अगर आपका बच्चा सही से दूध पी रहा है, वज़न बढ़ा रहा है व सही समय पर खाना खाता है तो आप बच्चे को चूसक जल्द भी दे सकते हैं। बच्चा सब सही तरीके से अपना भोजन करले उसके बाद ही उसे चूसका दीजिए।

चूसका चूसना भी जल्द एक आदत बन सकती है, कुछ माँ-बाप इसलिए ही अपने बच्चे को चूसक कभी नहीं देते क्योंकि वो बाद में इस सर्द दर्दी में जीना नहीं चाहते की उनके बच्चे को इसकी आदत कैसे छूटेगी। कुछ बच्चे 3-4 साल की उम्र तक भी इसका इस्तेमाल नहीं छोड़ पाते, इसलिए माँ-बाप इससे बचते हैं।

अगर आप चाहते हैं की आपका बच्चा इसका इस्तेमाल करे, लेकिन उसे इसकी आदत भी न पड़े तो उसे इसका इस्तेमाल बस पहले जन्मदिन तक करने दें। आपका बच्चा इसका इस्तेमाल कुछ ज़्यादा ही नहीं कर रहा है, इसका खयाल रखने से आप उसे इसकी आदत से बचा सकते हैं।

बच्चे की इस आदत को कैसे मैनेज कर सकते हैं?

अगर आपने सोच ही लिया है की आपका बच्चा इस चूसका का इस्तेमाल कर सकता है तो कृपया ये बातें दिमाग में रखें:

बच्चे को आपका निर्णय लेने दें: अगर बच्चा अपने आप इसे लेता है तो ठीक है। अगर आप उसे इसका इस्तेमाल करने से मना कर रहे हैं, फिर भी उसे इसको चूसना है तो उसे ज़्यादा फोर्स भी ना करें। आप फिर से ये कोशिश कभी और कर सकते हैं।

बच्चे को तब चूसक दें जब वो भूखा ना हो।

बच्चे को इस लिए चूसक ना दें: बच्चे को खाना देरी में देना है इसलिए इसका इस्तेमाल ना करें। कभी-कभी बच्चे को खुद ही खाना देर से खाने का मन करता है, इस दौरान आप उसे ये चूसक दे सकते हैं।

बच्चे को सोने से पहले ये चूसक दें: बच्चे को सोने से पहले ये चूसक दें, और अगर ये सोते हुए बच्चे के मुंह से गिर जाए तो फिर से उसके मुंहे में ये चूसक ना डालें। बच्चा अगर रो रहा हो तो उसे पहले गले लगाके, गाना गाके या हिलाके मनाने की कोशिश करें, और जब कुछ काम ना करे तब उसे ये चूसक दें।

बच्चे की गर्दन या उसके पालने में चूसक ना बांधें: ऐसा करने से बच्चा अपना गला घोंट सकता है। बच्चे के कपड़ों के साथ इस चूसक को क्लिप के साथ बांधा जा सकता है।

चूसक का ध्यान रखें: ऐसा चूसक चुनें जो आपके बच्चे के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हो, और इसे नियमित तौर पर गरम पानी से धोते रहिए। जैसे ही इसमें कोई दरार आ जाए या कोई निशान दिखे, वैसे ही इसे बदल दें।

इसको अपने मुंह में ना रखें: डॉक्टर के अनुसार आपकी लार में ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो आपके बच्चे के मुंह में सड़न कर सकते हैं। बच्चे के चूसक को आपको जूस या मीठे पानी की गिलास में भी नहीं डालना चाहिए, इससे भी उसे केविटी हो सकती है।

बच्चे को कब चूसक ना दिया जाए

जिस बच्चे का वज़न सही तरीके से नहीं बढ़ रहा हो, उसे कभी चूसक नहीं देना चाहिए। अगर बच्चे को दूध पीने में दिक्कत हो रही है तो उसे इस चूसक से दूर ही रखना चाहिए। अगर बच्चे को बार-बार कान का इन्फ़ैकशन हो रहा हो तो उसे चूसक देने से बचिए।

अगर आपका बच्चा समय से पूर्व पैदा हुआ है और उसका वज़न नहीं बढ़ रहा है तो आपको उसे ये नहीं देना चाहिए। अगर आप नहीं चाहती की आपके बच्चे को हॉस्पिटल में चूसक दिया जाए तो हॉस्पिटल स्टाफ को आप पहले ही इस बात की जानकारी दें, खासकर तब जब आप बच्चे को अपना दूध पिलाने का विचार बना रही हों। इसके अलावा हम आपको बताना चाहेंगे की एक दो दिन अगर आपके बच्चे को चूसक दिया भी जाए तो उससे उसको इसकी आदत नहीं पड़ेगी।

क्या चूसक से बच्चे के दाँत के विकास पर असर पड़ता है?

जो बच्चे 2-3 साल की उम्र से पहले चूसक का इस्तेमाल बंद कर देते हैं उनके दाँत में कम ही दिक्कत होती है, वैसे भी शुरुआत में बच्चे के वो दाँत होते हैं जो बाद में टूट जाते हैं।

अगर 3 साल की उम्र के बाद भी आपका बच्चा चूसक का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे दाँत की समस्या हो सकती है। अगर फिर भी बच्चा इसको नहीं छोड़ रहा है तो अपने डॉक्टर से लगातार मिलते रहिए, और सुनिश्चित करते रहिए की आपके बच्चे के दाँत ठीक है या नहीं, या उसे कोई और दिक्कत नहीं हो।