वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम- संकेत, कारण और प्रभाव

Vanishing Twin Syndrome

वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम को 1945 में ढूंढा गया था। नाम से ही पता चलता है की जब जुड़वा या दो से ज़्यादा बच्चों के गर्भपात की वजह से गायब होते हैं तो उसे वैनिशिंग, मलतब जुड़वा बच्चों में एक का साफ होना कहते हैं।

इसका पता कैसे चलता है?

जब अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल नहीं होता था तो दो या ज़्यादा बच्चों के गर्भपात का पता जन्म के बाद पता चलता था जब गर्भनाल की जांच होती थी। अल्ट्रासाउंड की मदद से अब जुड़वा बच्चों का पता पहली ही तिमाही में पता चल जाता है। ट्विन के गायब होने की स्थिति उसका अगला अल्ट्रासाउंड बता देता है।

उदाहरण के लिए जब एक महिला 6-7 हफ्ते के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए जाती है तो डॉक्टर उन्हें बताएँगे की उनके पेट में जुड़वा बच्चे हैं या नहीं। उसकी अगले टेस्ट में अगर डॉक्टर को केवल एक ही धड़कन सुनाई देती है तो वो डॉक्टर उन्हें दूसरा अल्ट्रासाउंड लेने की सलाह देंगे। कभी कभी महिलाएं गर्भपात के संकेतों को अपने आप भी महसूस करती हैं।

अल्ट्रासाउंड की मदद से इस स्थिति का पता लगाना थोड़ा आसान हो गया है। दो या उससे ज़्यादा बच्चे पेट में रखने वाली महिलाओं के 21-30% केस में वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम देखा गया है।

ऐसा क्यों होता है?

इससे जुड़े लक्षण प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही होते हैं, और ये एक दम से सबके सामने नहीं आते हैं। हालांकि कई केस में इसका कारण पता ही नहीं चलता।

गर्भनाल या भ्रूण की सही प्रकार से जांच से थोड़ा पता चलता है की क्या होने वाला है। नाभि संबंधी नाल के साथ अगर दिक्कत है तो भी ये इसका कारण बन सकती है।

क्या इससे माँ या बचे हुए बच्चे पर असर पड़ता है?

अगर गर्भपात पहले ही महीने में हो गया तो इससे न तो माँ कोई खतरा है न ही बचे हुए बच्चे को। हालांकि जिन कारणों से गर्भपात हुआ उस पर बचे हुए बच्चे की सेहत भी निर्भर करती है। अगर नुकसान प्रेगनेंसी की अंतिम स्टेज में होता है तो दूसरे बच्चे को भी खतरा हो सकता है।

किसको इसका खतरा है?

जिन महिलाओं की उम्र 30 से ऊपर हो जाती है उन्हें इसका ज़्यादा खतरा है। इसमें खून निकलता है, श्रोणि में दर्द होता है, और गर्भाशय में दर्द भी इसका लक्षण है।

क्या किया जाए?

अगर एक जुड़वा बच्चा पहली तिमाही में मर जाता है तो न तो इससे बचे हुए बच्चे या माँ को कोई दिक्कत आती है। हाँ, अगर ऐसा दूसरी या तीसरी तिमाही में होता है तो चीज़ें काफी बदल सकती हैं।

अगर आपको खून आए, या गर्भाशय में दर्द हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। कई बार महिलाएं प्रकृतिक तरीके से गर्भपात का इंतज़ार करती हैं। आपको इस समय अपने दूसरे बच्चे के विकास पर भी सही प्रकार से नज़र रखनी है।

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