गर्भावस्था में होने वाले कमर दर्द से उभरने के 10 उपाय

Backpain during pregnancy

 

क्या आपके कमर में दर्द शुरू हो गया है? यहां जानिए कुछ सरल तरीक़े जिससे आप कमर दर्द से छुटकारा पा सकते हैं।

अमेरिकन प्रेगनेंसी एसोसिएशन के अनुसार करीब 50 से 70 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को कमर दर्द की समस्या होती है। हालांकि उस दौर में ये आम बात है, उसे नज़रअंदाज़ करते हुए नौ महीने उसे झेलना सही नहीं है। ये रहे 10 उपाय जिनकी मदद से आप गर्भावस्था में कमर दर्द से राहत पा सकते हैं।

  1. प्रीनेटल योगा

योगा प्राचीन भारत की देन हैं जिसमें ताकत के साथ साथ लचलता को बढ़ाने का काम किया जाता है। कई महिलाएं इसकी मदद से कमर दर्द से राहत पाती हैं। इसमें से प्रीनेटल(प्रसव पूर्व) योगा सबसे ज्यादा आजमाया गया तकनीक है। गर्भावस्था में जिन महिलाओं के कमर, मसल्स, नर्व और जोड़ों में दर्द होता है वो इसे अपनाती  हैं प्रीनेटल योगा की मदद से फिजिकल बॉडी को सही टोन दिया जा सकता है। प्रीनेटल योगा में साँस लेने के व्यायाम की मदद से तनाव भी कम किया जा सकता है। इसके साथ साथ योगा करने से आप अच्छे से सो सकते हैं और दिमाग शांत रहेगा।

  1. एक्यूपंक्चर

एक्यूपंक्चर पूर्व एशियाई तकनीक है जिसमे छोटी-छोटी सुई शरीर के कुछ प्रेशर पॉइंट्स पर चुभाई जाती है जिससे कई तरह के शारीरिक और मानसिक चीजें जुड़ी हैं। शरीर मे दौड़ रहे एनर्जी जिज़ “ची” कहा जाता है उसके फ्लो में आने वाली बाधाओं को इसके जरिये रोका जाता है। एक्यूपंक्चर पॉइंट्स को सुई या फिर एक्यूप्रेशर (हाथ की उंगलियों की मदद से) दबाया जाता है। इस वजह से पाचन, अपने ऊर्जा स्तर को बढ़ावा देने, सुबह के आलस्य से उभराने, सिरदर्द और कमर दर्द से राहत मिलती है। खोज से पता चला है कि इस तकनीक से गर्भवती महिलाओं को कमर दर्द से काफी राहत मिली है। लेकिन उसे देख रेख में करना चाहिए क्योंकि गलत जगह प्रेसर से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इसके लिए पहले डॉक्टर से निर्देश ले लें।

  1. प्रीनेटल मसाज

एक सर्टिफाइड प्रीनेटल मसाज थेरेपिस्ट थोड़े ही समय में कमर दर्द से राहत दे सकता है। खासकर के मांशपेशियों में आए खिंचाव से। रिसर्च से पता चला है कि सही प्रीनेटल मसाज से न केवल कमर दर्द से राहत मिलती है बल्कि तनाव और गर्भावस्था में हो रही चिंता से भी राहत मिलती है। स्वीडिश मसाज सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है। ये काफी सरल और नाजुक है और इसके इस्तेमाल से जोड़ें पर भी कोई असर नहीं पड़ता। इसके इस्तेमाल के पहले भी महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

  1. कायरोप्रेक्टिक केअर

कायरोप्रेक्टिक को आप जॉइंट करैकिंग समझ सकते हैं लेकिन दरअसल इसमें और भी कई महत्वपूर्ण चीजें शामिल है और इससे कई महिलाओं को फायदा हुआ है। इसमें हल्के फुल्के व्ययाम होते हैं जिससे कमर दर्द से राहत मिलती है। कायरोप्रेक्टिक की मदद से गर्भवती महिलाओं को कमर दर्द और शारीरिक दर्द से काफी राहत मिलती है।

5.शारीरिक थेरेपी

फिजिकल थेरेपिस्ट भी प्रेगनेंट महिलाओं के कमर के दर्द को कम करने में मदद करते हैं, वो नसों, जोड़ों और मासपेशियों को हिलाकर दर्द से निवारण दिलवाते हैं। वो आपको ऐसी एक्सर्साइज़ बताएँगे जो आप घर में कर सकती हैं। एक बड़े एक्सपर्ट ने इस बारे में कहा है की उनका काम है अपने सभी मरीजो को शिक्षित करना। वो लोगों को बताते हैं की कैसे चला, बैठा और खड़ा हुआ जाता है।

6.ध्यान

योगा और मसाज से अलग इस तकनीक को कभी भी आजमाया जा सकता है, इसको किसी भी स्थान में किसी भी समय किया जा सकता है। ध्यान लगाने के कई तरीके होते हैं। पहला तरीका है आप शांत जगह पर बैठ या लेट जाएँ और अपनी सांस पर ध्यान दें। आप शांत जगह पर ध्यान लगा सकते हैं या शांत म्यूज़िक को सुन सकते हैं। प्रेगनेंट महिलाएं अपने बच्चे की गतिविधि पर ध्यान देकर मेडिटेशन कर सकती हैं। देखा गया है की ध्यान लगाने से आपका दिमाग तनाव को अच्छे तरीके से नियंत्रित कर सकता है। जब तनाव आपको कंट्रोल में होता है तब अन्य समस्या कम होने का खतरा रहता है। नियमित रूप से ध्यान लगाने से आप दर्द को काफी सही तरीके से झेल सकते हैं, इससे आप प्रसव के दर्द को भी सही तरीके से झेल सकने में समर्थित होंगी।

7.तैरना

बड़ी डॉक्टर मैरी रोसर के अनुसार प्रेगनेंसी में तैरने की सबसे ज़्यादा सलाह दी जाती है क्योंकि इससे आपकी रीढ़ की हड्डी से दबाव हटता है। जब आप पानी में होती हैं तो गुरुत्व बल का आप पर ज़्यादा असर नहीं होता है और आपका वज़न पानी में लगभग न के बराबर होता है। पाँव-हाथ चलाने से आपकी मासपेशियों पर पूरी तरह से काम होता है। इस समय आपको सही तरीके से पूरी साँसे में लेनी चाहिए, लंबी सांस लेने से आप मानसिक और शारीरिक रूप से रिलेक्स होती हैं। प्रेगनेंसी में आगे बढने के साथ आप ब्रेस्टस्ट्रोक तकनीक से तैर सकती हैं, इससे आपकी पीछे और छाती की मसल मजबूत होती है। स्विमिंग करते हुए खुदमें पानी की कमी ना होने दें, अगर आपको चक्कर आने जैसा लगे तो आप तुरंत स्विमिंग रोक दें। अगर आपकी प्रेगनेंसी में कोई रिस्क है तो आप अपने डॉक्टर से पूछकर ही स्विमिंग करें।

8.अच्छी नींद के लिए सपोर्ट

प्रेगनेंसी में अच्छी नींद लेना काफी मुश्किल हो सकता है, वो भी तब जब आपकी पीठ में लगातार दर्द हो रहा हो। अपनी को सपोर्ट दें और पीठ के दर्द से बचने के लिए आपको एक लंबा सा तौलिया गोल घुमाकर अपनी रीढ़ के समांतर रख देना चाहिए। तौलिए की लंबाई सही होनी चाहिए। या इसके अलावा आप अपनी एक तरफ सो सकती हैं, इसमें आपको एक तकिया अपने पाँव के बीच और एक तकिया पेट के नीचे रखनी है। पहली तिमाही के बाद एक साइड होकर सोना काफी अहम है, इससे बच्चे को रक्त की सप्लाई काफी अच्छे से होती है। इस समय पीठ के बल सोना न तो आपके लिए अच्छा है नाही आपके बच्चे के लिए ये अच्छा है, इसके साथ ही ये काफी असहज भी है। बॉडी पिलो से आपकी छाती, गुदो और पीठ को अच्छा सपोर्ट मिलता है। डॉक्टर सलाह देते हैं की आपके गद्दे को ज़्यादा गद्देदार नहीं होना चाहिए। आपको प्रेगनेंसी में थोड़ी-थोड़ी नींद लेते रहना चाहिए। आपको सेक्स और सोने के लिए ही अपने बेड को इस्तेमाल करना चाहिए। आपको खाने के 2-3 घंटे बाद ही सोना चाहिए।

9.मातृत्व बेल्ट पहनें

मातृत्व बेल्ट या मेटर्नीटी बेल्ट को आप ऑनलाइन खरीद सकती हैं। ये एक अंडर्गार्मेंट है जिससे आपके पेट को सपोर्ट मिलता है। डॉक्टर इस बात की सलाह देते हैं की अगर आप प्रेगनेंसी में भी काम कर रही हैं तो आपको इस बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, डॉक्टर ये भी कहते हैं की इस बेल्ट का उपयोग अन्य उपचार के साथ होना चाहिए।

10.सही जूते पहनें

आपको शायद सही तरीके से तैयार होना अच्छा लगता हो, और इस चक्कर में आप हील वाले जूते भी पहन लेती होंगी। लेकिन हम आपको बताना चाहेंगे की अगर आप प्रेगनेंसी में हील वाले जूते पहन रही हैं तो इससे आपकी पीठ पर बुरा असर पड़ सकता है। ऊंची एड़ी की सैंडल से आपकी पीठ का कोण बदलता है, जिससे बैक पर दबाव पड़ता है, इससे आप अपना संतुलन भी खो सकती हैं। प्रेगनेंसी बढने के साथ आपका गुरुत्व केंद्र भी बदलता है, और हील से आपकी स्थिरता कम होती है। लेकिन सपाट जूते पहनना भी सही नहीं है, क्योंकि इनसे आपके पाँव आपके शरीर को सपोर्ट नहीं दे पाते हैं। सबसे अच्छा सपोर्ट पाने के लिए आपको छोटी हील वाले जूते पहनने चाहिए। थोड़ी सी हील वाली सैंडल से आपके पूरे शरीर को अच्छा सपोर्ट मिलेगा, और आपके शरीर पर दबाव भी नहीं पड़ेगा।