आपके नवजात बच्चे के बारे में 9 अजीब लेकिन बिल्कुल नॉर्मल बातें

लोगों की सलाह, किताबें और कई क्लास ने आपको प्रसव के दर्द, प्रसव, रातों की नींद का उड़ना, और हर समय बच्चे को दूध पिलाने जैसी चीजों के लिए तैयार कर दिया होगा। लेकिन क्या आप बच्चे की पॉटी और कभी ना शांत होने वाली आँखों के लिए तैयार हैं? बच्चों के डॉक्टर के पास जाने से पहले थोड़ा संयम रखिए और हमारी बच्चों के बारे में ये अजीब पर नॉर्मल लिस्ट पढिए जो आपको चौंका सकती हैं:

कभी ना रुकने वाली छींकें

आखिर मामला क्या है?

याद रखिए की जिन चीजों की आपको आदत पड़ गई है वो सब चीज़ें अभी आपके बच्चे के लिए बिल्कुल नई हैं। बिना बीमार हुए भी बच्चा लगातार काफी देर तक छींक सकता है। क्या पता आपका बच्चा ऐसा अपनी नाक को साफ करने के लिए कर रहा हो। उजाले की तरफ देखना भी बच्चे के लिए काफी नया अनुभव है, इसलिए जब आप धूप में अपने बच्चे को ले जाते हैं तो वो छींकना शुरू कर सकता है, ऐसा धूप की वजह से होता है, ज़रूरी नहीं की उसे कोई अलर्जी हो। बच्चा शायद बलगम या भ्रूण अवरण को बाहर निकालने के लिए भी छींकना शुरू कर सकता है।

कब चिंता करनी चाहिए?

अगर छींक के समय बच्चा सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहा हो, तो उसे पास के बच्चों के डॉक्टर को दिखाएँ। आप इस बात को सुनिश्चित करें की बच्चा सही तरीके से सांस ले रहा हो, यह भी देखें की बच्चे के फेफड़े साफ होने के साथ-साथ सूजन नॉर्मल हो।

सर पर पीले निशान

आखिर मुद्दा क्या है?

सर पर भूरे या पीले निशान को इंग्लिश में क्रेडल कैप कहते हैं। यह काफी बुरे होते हैं, लेकिन ये काफी कॉमन चीज़ हैं। इनके होने के पीछे की वजह भी किसी को नहीं पता है। लेकिन अच्छी खबर यह है की कोई भी सूखापन या कोई अजीब हरकत बच्चा कुछ महीने बाद त्याग देता है। जहां बच्चे को निशान पड़ें हों वहाँ हफ्ते में दो या तीन पर बेबी ऑइल लगाएँ। बच्चों के डॉक्टर सलाह देते हैं की नहाने से पहले आप हमेशा ऐसा ही करें और इसकी इन पीली और भूरी पपड़ी को आप सॉफ्ट कंधी से निकालें।

कब चिंता करें?                    

अच्छी बात यह है की आपको इस बारे में ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन अगर यह सर के अलावा कहीं और फैले तो डॉक्टर की सलाह लेकर अच्छी दवा लें।

पॉटी का तेज़ी से निकलना(विस्फोट होना)

 यह शायद आपको पढ़ने में थोड़ा अजीब लगे, लेकिन जो भी लोग पेरेंट बन चुके हैं वो इस दौर से भी ज़रूर गुजरे होंगे जहां उनके बच्चे का डाइपर एक या दो बार फटा हो। बच्चे की पॉटी ज़्यादातर लिकुइड ही होती है, और इसी वजह से यह कमरे में फैलने में भी देर नहीं लगाती।

कब चिंता करें?

जब तक आपके बच्चे की पॉटी में पीले, हरे और भूरे रंग के पार्टिकल दिखाई दे रहे हैं, तब तक समझिए की सब ठीक है। लेकिन अगर आपको खून दिखाई दे अपने डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

बच्चे के स्तन का बड़ा होना

आप उन हार्मोन्स को कैसे भूल सकते हैं जिन्होने आपको प्रेगनेंसी के दौरान परेशान किया? इन्ही हार्मोन्स ने आपके बच्चे पर भी असर डाला है। नौ महीने तक आपकी कोख में रहने की वजह से एक साइड इफेक्ट बच्चे को हो सकता है और वो है स्तन का बड़ा होना। जैसे ही बच्चा आपके हार्मोन्स के संपर्क में आता है वैसे ही उसके ब्रेस्ट यानी स्तन के ऊतक/टिशू बढ़ने लगते हैं, उन हार्मोन्स को बच्चे से साफ होने में थोड़ा समय लगता है। पर चिंता मत कीजिए, ये कुछ समय बाद अपने आप चले जाते हैं।

कब चिंता करें?

बच्चे के स्तन के चारों ओर लालपन देखें। और अगर लालपन के साथ बच्चे को बुखार है तो यह किसी गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। आपको जल्द से जल्द बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।

घुरघुराने की अजीब आवाज़ें

मामला क्या है?

अगर आप यह सोच रहे हैं की बच्चा कभी-कभी रोएगा, तो दुबारा सोचिए, सच्चाई इससे बिल्कुल दूर है। बच्चा घूरघुराता है, खराटे लेता है और कई प्रकार की अजीब आवाज़ें निकालता है। ऐसा इसलिए होता है की क्योंकि नवजात बच्चे के नाक के छेद काफी पतले होते हैं, और जब बलगम वहाँ फंस जाता है तो वो आवाज़ें और भी फनी सुनाई देती हैं। इसलिए अगर आप काफी समय से ऐसी आवाज़ें सुन रहे हों तो आपको बच्चे की नाक हवा खींचने की मशीन से साफ करनी चाहिए।

कब चिंता करें?

आपको ध्यान से सुनना है की बच्चा घुर्रा रहा है या नहीं। अगर हाँ, तो बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही होगी। इस स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंत मिलें।

कभी भी अजीब सी हलचल करना

क्या मुद्दा है?

आपका नवजात बच्चा कई बदलाव के साथ विकसित होता है, इनमें से एक है बच्चे की चौकने की सजगता। शायद बच्चा कभी भी या किसी तेज़ आवाज़ पर ऐसा करे, लेकिन दोनों ही केस में 3 से 4 महीने में बच्चा अपना यह गुण पूरी तरह से विकसित कर लेता है। इसलिए आपको बच्चे को ढंग से ढकना आना चाहिए, बच्चा जब जागता है तब ज़्यादा हरकत करता है, लेकिन ढंग से ढकने पर बच्चा आराम से सोता है।

कब चिंता करें?

आपको तब चिंता करनी चाहिए जब बच्चा कम हरकत कर रहा हो। अगर बच्चा कम हिल रहा है तो इसका मतलब है की सब कुछ ठीक नहीं है। अगर बच्चा कुछ ज़्यादा ही शांत है तो अपने डॉक्टर से ज़रूर मिलें।

 सर का आकार साधारण से थोड़ा अलग

क्या मामला है?

बच्चा पैदा करना निश्चित ही एक मुश्किल काम है। लेकिन याद रखिए बच्चा पैदा करते समय बस आप ही सारा काम नहीं कर रही हैं। आपका बच्चा भी बाहर आने के लिए उतनी ही मेहनत कर रहा होता है। इतनी मशकत्त के बाद बच्चा जैसा जामुनी और सूजा हुआ दिखाई देता है उसमें कोई हैरानी नहीं है। क्योंकि बच्चे का सर काफी नाज़ुक होता है इसलिए आपकी हड्डी के बीच से निकलना बच्चे के सर को थोड़ा सपाट कर सकता है। अगर ऐसा डिलिवरी के समय नहीं होता है तो बाद में बच्चे के थोड़ा ज़्यादा ही पीठ के बल लेटे रहने से ऐसा हो सकता है, अगर ऐसा हुआ तो बच्चे को ज़्यादा गोद में लीजिए या उसे थोड़ा पेट के बल भी लेटाइ।

कब चिंता करें?

अगर सब कुछ ट्राय करने के बाद भी नवजात बच्चे का सर सपाट दिख रहा है तो बच्चों के डॉक्टर से बात करें। शायद बच्चे को थोड़े समय के लिए सर को सही आकार में करने के लिए हेलमेट पहनने की ज़रूरत हो। बच्चे को अगर 4-6 महीने के बीच में हेलमेट पहनाए जाएँ तो उनका असर भी अच्छा दिखता है, इसी वजह से अपने डॉक्टर से बात करने के लिए ज़्यादा इंतज़ार ना करें।

गुप्तांगों में सूजन

क्या मुद्दा है?

अगर आपने लड़के को जन्म दिया है तो आप देख सकते हैं की बच्चे के गुप्तांग कभी-कभी आपकी उम्मीद से ज़्यादा बड़े होते हैं। खासकर अंडकोष थोड़े ज़्यादा बड़े दिखते हैं। इसका क्या मतलब है? जन्म से पहले आपके शरीर में मौजूद हार्मोन्स के संपर्क में आने से बच्चे पर शायद इसका फर्क पड़ा हो। या शायद उसके अंडकोष के चारों तरफ ज़्यादा द्रव इकट्ठा हो गया हो। पर चिंता मत कीजिए वो कुछ दिनों में यह सब पेशाब के साथ बाहर निकाल देगा। ऐसा ही लड़की के साथ भी होता है, उसके भी गुप्तांग थोड़े सूजे हो सकते हैं। कुछ दिनों में उसकी सूजन भी कम हो जाएगी।

आपके लिए रोचक बात: शुरुआत के दिनों में आपका बच्चा इतना द्रव बहाता है की वो कुछ ही दिनों में अपने शरीर का 10 प्रतिशत तक वज़न घटाएगा।

कब चिंता करें?

अगर कुछ दिनों में सूजन कम नहीं हो, तो आपको इसकी जांच करवानी चाहिए, खासतौर पर तब जब आपका लड़का हुआ हो। लड़कों को हायड्रोसेल यानी अंडकोष-वृद्धि की समस्या हो सकती है, जिसे अपने आप सही होने में साल लग जाते हैं। हायड्रोसेल में पानी बिना दर्द के बच्चे के अंडकोष में जमा होता है, जिससे अंडकोष में थैली बन जाती है, या वहाँ सूजन आजाती है।

बहंगापन

क्या बात है?

बच्चा शुरुआत में अपने सभी गुणों को सीखता है, जिसमें देखना भी अहम है। बच्चे को फोकस करने और मासपेशियों को कंट्रोल करने में थोड़ा समय लगता है। आपको शायद यकीन नहीं होगा की कभी-कभी जब बच्चे की आँखें थोड़ी भहंगी लगती हैं तब वो नॉर्मल होती हैं। ऐसा शायद बड़ी नाक और आस-पास की स्किन की वजह से होता है, यह स्किन बच्चे के आँख के सफ़ेद हिस्से को ढक सकती है। इससे बच्चे को सूडोएसोट्रोफिया एक प्रकार की आँख का भ्रम हो सकता है। इसी वजह से पास से देखें की बच्चे की पुतली एक साथ हिल रही हैं? शायद यह सब आपके दिमाग का भ्रम भी हो सकता है।

कब चिंता करें?

अगर छह महीने बाद भी बच्चे में बहंगापन दिख रहा हो, तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर बच्चे की आँख लगातार दो अलग दिशा में जा रही हों, तो उसे स्ट्रेबिस्मस(बहंगेपन का एक प्रकार) और अगर दिक्कत केवल एक आँख में हो तो यह पूर्ण बहंगापन हो सकता है।