जानिए एपीसीओटोमी (कटान) के बारे में

episiotomy

एपीसीटोमी एक सर्जिकल कट होता है जिसे योनि और गुदे के बीच की जाती है। इसे बच्चा पैदा होने के कुछ समय पहले किया जाता है ताकि योनि थोड़ी बड़ी हो जाए।

डिलीवरी की स्पीड को बढ़ाने के लिए ऑब्स्टीटरीशन्स किया जाता है ताकि योनि इसके दबाब में फटे ना। अक्सर इसे महिलाओं के पहले डिलीवरी के समय किया जाता है। सही तरीके से की गई एपीसीटोमी के बाद योनि भी जल्द ही ठीक हो जाती है। जानकार की राय है कि इसकी मदद से आगे असंयमिता से भी बचा जा सकता है।

लेकिन पिछले 20 सालों से की गई कई तरह के खोज कुछ अलग जानकारी देते हैं। कहा जाता है कि एपीसीटोमी से योनि के टिश्यू और पेल्विक फ्लोर मसल्स को कोई सुरक्षा नहीं मिलती और इसे करने से गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए कई जानकर इसे हमेशा न करने की सलाह देते हैं।

इसके आंकड़े में भी गिरावट आई है। जहां 1979 में हर 3 में से 2 एपीसीटोमी हुआ करते थे तो 2004 में आंकड़ा गिरकर 5 में से 1 रह गया। इसके और अधिक गिरने की संभावना है।

नेचुरल प्रक्रिया की जगह एपीसीटोमी की क्या ज़रूरत ?

रिसर्च से पता चला है कि जिन महिलाओं के नाजुक अंग ज्यादा फटते हैं उन्हें आमतौर पर ठीक होने में उतना ही समय लगता है जितना एपीसीटोमी से लगेगा।

एपीसीटोमी के कारण डिलीवरी के समय महिलाओं का ज्यादा खून बहता है, रिकवरी के समय ज्यादा दर्द होता है और सेक्स के लिए लम्बा इंतज़ार करना पड़ता है। इससे इन्फेक्शन का रिस्क भी बढ़ जाता है और साथ ही साथ दूसरे बच्चे के जन्म के समय खतरा बढ़ जाता है।

इससे और भी कई तरह के खतरे पैदा हो सकती है। इसकी वजह से बच्चा पैदा होने के बाद काफी दर्द होता है और ठीक होने में भी लम्बा समय लगता है।

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मुझे एपीसीओटोमी की ज़रूरत क्यों पड़ सकती है?

कुछ स्थिति में एपीसीओटोमी काफी मददगार साबित हो सकती है। अगर आपका बच्चा काफी बड़ा है और आपके डॉक्टर को अगर थोड़े ज़्यादा जगह की ज़रूरत है तो वो एपीसीओटोमी का सहारा ले सकते हैं। और अगर आपके बच्चे को तुरंत पैदा होने की ज़रूरत है तो भी इसकी मदद ली जाती है, ऐसा तब किया जाता है जब बच्चा प्रसव के अंतिम समय पर ढंग से प्रतिक्रिया नहीं देता है। इन सभी परिस्थितियों में एपीसीओटोमी की मदद से बच्चे के जन्म को सुरक्षित सुनिश्चित किया जाता है।

मुझे कैसे पता चलेगा की मुझ पर फालतू में एपीसीओटोमी नहीं किया जा रहा है?

इस प्रक्रिया के बारे में अपने डॉक्टर से जल्द से जल्द बात करें। उनसे पूछें की वो कितनी बार और किन परिस्थिति में एपीसीओटोमी का इस्तेमाल करते हैं? अगर कोई और रास्ता हो तो आप उसके बारे में भी उनसे ज़रूर पूछें। अध्यन से पता चला है की प्रॉफेश्नल दाई कम से कम इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।