एपीड्यूरल की मदद से दर्द से राहत

Epidurals

लेबर(प्रसव) के समय दर्द से राहत पाने के कई तरीके हैं। लेकिन कौन सा सबसे अच्छा होगा ये चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसमें एक अच्छा तरीका है एपीड्यूरल। ज्यादातर महिलाएं इसे तीसरे फेज के समय चुनती है जब दर्द सहन के बाहर होता है।

क्या होता है एपीड्यूरल?

एपीड्यूरल एक तकनीक है जिसमें पेनकिलर्स छोटे ट्यूब्स के ज़रिए पीठ के रास्ते दिए जाते हैं। इन ड्रग्स को रीजनल एनेस्थेटिक के नीचे दिए जाते हैं। इससे पेट सुन्न पड़ जाता है जिससे दर्द से राहत मिलती है। लेबर के समय दर्द देने वाले नर्व को पेनकिलर की मदद से ठीक किया जाता है।

इसमें कौनसा तरीका इस्तेमाल किया जाता है?

लेबर के समय आपको एपीड्यूरल का विकल्प दिया जाता है। अगर आपको इसका इस्तेमाल करना है तो इसके पहले बताना पड़ता है नहीं तो देर होने पर इसका असर नहीं दिखेगा। इंजेक्शन की मदद से लोअर बैक पर इसे दिया जाता है। स्पाइन के बीच के रास्ते इसे एपीड्यूरल में जाती है। इसके बाद एक पतली सी ट्यूब आपके पीठ में रखी जाती है जिसे बाद में निकाला जाता है।

भले ही ये सुनने में थोड़ा उलझन भरा हो लेकिन इसे करने का तरीका एकदम सीधा है। लेकिन प्रक्रिया के समय आपको शांत बैठे रहना पड़ता है।

एपीड्यूरल को कई तरीकों से दिया जा सकता है।

मोबाइल एपीड्यूरल– इसमें आप अपने पैरों और कुछ हिस्सों में जान महसूस कर पाएंगे। इसे एनेस्थेटिक और पेनरिलीफ ड्रग के साथ दिया जाता है। पेन रिलीफ का ये सबसे अच्छा तरीका है और इसमें महिलाओं को थोड़ा सोने का समय मिल जाता है।

कंटीन्यूअस इंटीयूसन – इसमें एनेस्थेटिक कैथिटर अटैच पंप का इस्तेमाल करता है। इसकी मदद से एपीड्यूरल को पीठ में दिया जाता है जहां पेन रिलीफ मिलता है। इसमें आप डोज बढ़ा भी सकते हैं।

इंजेक्शन – आप एपीड्यूरल को पेन किलर्स की मदद से अपने पेट के निचले हिस्से को सुनकर के ले सकते हैं। इसके बाद आपको कोई दर्द महसूस नहीं होगा और आप चाहे तो इसका डोज बढ़ा सकते हैं।

कंबाइंड स्पाइनल एपीड्यूरल – इस तरीके में आपको पेन किलर्स के कम डोज दिए जाएंगे जो काफी असरदार होंगे। एनेस्थेटिक एक कैथिटर की मदद से ड्रग्स ट्यूब के सहारे अंदर भेजेगा। इससे लगातार पेन रिलीफ मिलेगा।

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मुझे एपिड्युरल कब लेना चाहिए?

आपको उस समय एपिड्युरल दिए जा सकते हैं जब आपके मरोड़े ज़्यादा गहन होते जाते हैं और आप उन्हें सहन नहीं पाते हैं। कई महिलाएं तब एपिड्युरल लेती हैं जब उनका सर्विक्स 5-6 सेंटीमीटर फैल जाता है।

कई महिलाओं को एपिड्युरल एमर्जन्सि के समय दिया जाता है, जैसे उस समय जब बच्चा ज़्यादा ही थक जाता है। जो महिलाएं प्रसव के समय मूर्छित हो जाती हैं, या जिनमें बच्चे को बाहर निकालने की ताकत नहीं रहती, उन्हें भी चीज़ें तेज़ी करने के लिए एपिड्युरल दिया जाता है।

जब आपको लगे की आपका अपने मरोड़ों पर कोई कंट्रोल नहीं है तब आपको एपिड्युरल लेना चाहिए। आपका ये पहला प्रसव है या दूसरा इस पर निर्भर करता है की आपको कब एपिड्युरल क्यों एपिड्युरल लेना चाहिए।

कई केस में महिलाओं का सर्विक्स एपिड्युरल लेने के लिए काफी ज़्यादा बड़ा माना जाता है।

एपिड्युरल लेने के फायदे क्या हैं?

इससे दर्द में छुटकारा काफी आसानी से मिलता है, जिससे आपका पेट संकुचन के लिए स्थायी रहता है।

इसको सेट करने में केवल 20 मिनट्स लगते हैं, और दर्द का निवारण भी काफी तेज़ी से होता है।

इसे लेने के बाद आप अपने प्रसव और बच्चे के जन्म का अच्छे से अनुभव कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी में एपिड्युरल आपके ब्लड प्रैशर को कम रखते हैं जिससे आपके हाई ब्लड प्रैशर की समस्या में मदद मिलती है।

अगर आपको दर्द से पूरा निवारण नहीं मिला है तो आपको और एपिड्युरल दिया जा सकता है।

एपिड्युरल के नुकसान क्या हैं?

आपको किसी भी दबाव का पता ही नहीं चलेगा और इससे हो सकता है की आप बच्चे को बाहर निकालने के लिए जान ही ना लगा पाएँ। इससे प्रेगनेंसी की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

कुछ महिलाओं को चक्कर आ सकते हैं।

आपको बुखार आ सकता है या खुजली हो सकती है।

आपको अपना मूत्र थैली खाली करने के लिए शायद बाहरी मदद की ज़रूरत पड़े।

अगर आप एपिड्युरल ले रही हैं तो कुछ महिलाओं को ज़्यादा ही निगरानी की ज़रूरत पड़ती है।

आपको भयंकर सर में दर्द हो सकता है।

कभी-कभी देखा गया है है की एपिड्युरल से आपके पाँव और हाथ थोड़े सुन्न पड़ सकते हैं।

एपिड्युरल का बच्चे पर क्या असर पड़ता है?

जो महिलाएं एपिड्युरल लेती हैं, उनका ब्लड प्रैशर गिर जाता है, जिससे बच्चे तक ऑक्सिजन जाने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। प्रसव के दौरान अगर आपने एपिड्युरल लिया है तो आपको ऑक्सिजन के संचार को देखने के लिए केथेटर नामक यंत्र की ज़रूरत पड़ सकती है। एपिड्युरल से आपका बच्चा प्रसव में काफी थकावट महसूस कर सकता है।

मुझे एपिड्युरल कहाँ मिल सकता है?

घर पर जिन बच्चों का जन्म होता है उन्हें एपिड्युरल नहीं दिए जाते हैं। एपिड्युरल को केवल एक्सपर्ट की देखरेख में हॉस्पिटल में ही दिया जा सकता है। एनेस्थीसिया एक्सपर्ट को इस समय कमरे में होना ज़रूरी है, जिस समय एपिड्युरल दिया जा रहा हो।

एपिड्युरल कब दिया जाता है?

जब बच्चे को जन्म देते समय ऑपरेशन की ज़रूरत होती है।

जुड़वा या ज़्यादा बच्चों को जन्म देते समय

सिजेरियन डिलिवरी के समय

क्या गर्भवती महिला एपिड्युरल ले सकती है?

कुछ मेडिकल दिक्कतों या खून के थक्के की वजह से एपिड्युरल कई प्रेगनेंट महिलाओं के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। आपके डॉक्टर आपको बता पाएंगे की आपके लिए कौन दर्द निवारक तरीका सबसे अच्छा है। अगर आपकी प्रेगनेंसी नॉर्मल है और आपको कोई दिक्कत नहीं है तो एपिड्युरल मिल सकता है, ताकि आपका दर्द कम हो सके। आपको अपनी स्थिति देखते हुए अपने डॉक्टर से एपिड्युरल लेने या नहीं लेने के बारे में बात करनी चाहिए।

एपिड्युरल लेने के बाद सुधार

एपिड्युरल लेने के बाद आपके जिस शरीर के भाग में सुन्नता थी, डॉक्टर देखेंगे की उसमें थोड़ी देर बाद सब कुछ सही हो जाए। सब कुछ ठीक करने या कह सकते हैं की आपको सब कुछ फिर से महसूस करने में थोड़े घंटे लग सकते हैं। जैसे ही आपको कुछ महसूस होना शुरू होता है वैसे ही आपको उस भाग में थोड़ा तनाव महसूस हो सकता है जहां एपिड्युरल दिया गया है।

अगर आपको एपिड्युरल लेने के बाद थोड़ा भी दर्द हो रहा है तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए, वो आपको दर्द निवारण के लिए और तरीके बता सकते हैं। एपिड्युरल का असर खत्म होते-होते थोड़ा समय लगता है, इसलिए आपको चलने-फिरने में किसी की मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। एपिड्युरल लेने के एक घंटे बाद आप हल्का भोजन और पेय पदार्थ ले सकते हैं। बच्चे को जन्म देते हुए लिए गए एपिड्युरल के असर को कम करने के लिए क्या किया जाए इसपर आपके डॉक्टर आपको और सलाह देंगे।