वीडियो: समय से पूर्व पैदा होने वाले बच्चों के लिए आशा की किरण!! डॉक्टर्स ने नकली कोख बनाई

Artificial womb

फिलेडेल्फिया के कुछ वैज्ञानिको के ग्रुप ने एक नकली कोख का सफल परीक्षण किया, इससे समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों की मदद हो सकती है।

फिलेडेल्फिया के बच्चों के अस्पताल के वैज्ञानिकों ने ‘नकली कोख’ को ईज़ाद किया है, उन्हे उम्मीद है की इससे समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। अभी तक इस डिवाइस का इस्तेमाल केवल मेमने के भ्रूण पर हुआ है। इस स्टडी का नेतृत्व करने वाले भ्रूण सर्जन एलन फ्लेक के अनुसार वो कोख की सभी परिस्थितियों को नकली कोख में ढालने में सफल हुए। भ्रूण अच्छे से बढ़ रहा है। इसके नॉर्मल फेफड़े हैं और दिमाग भी साधारण गति से बढ़ रहा है। इसका पूरा विकास अभी तक नॉर्मल रहा है।

फ्लेक ने कहा की वो तीन से पाँच साल के अंदर इस डिवाइस का इस्तेमाल समय से पहले पैदा हुए बच्चे पर करने की उम्मीद रखते हैं।

नकली कोख के अंदर

यह डिवाइस प्लास्टिक बैग से बनी है जिसमें एमनियोटिक द्रव भरा होता है। बाहर एक मशीन इससे नाल की तरह जुड़ी होती है, जो गर्भनाल का काम करती है, इससे खून को ऑक्सिजन मिलता है, और कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है।

इस मशीन को गर्म और अंधरे कमरे में रखा जाता है। इसके बाद शोधकर्ता बच्चे के लिए माँ की धड़कन की आवाज़ चलाते हैं, और भ्रूण पर अल्ट्रासाउंड से निगरानी रखते हैं।

107 दिनों का भ्रूण जो मानव जाती के 23-25 हफ्ते के भ्रूण के बराबर बड़ा होता है, वो नकली कोख में लेटा रहता है। पहले की शोध भी दिखा चुकी हैं की मेमने का भ्रूण मानव भ्रूण के लिए अच्छा मॉडल साबित हुआ है।

नकली कोख कई लोगों का जीवन बदल सकती हैं। लेकिन इस डिवाइस से कुछ नैतिक सवाल भी खड़े होते हैं की क्या कभी इसका प्रयोग मानव जाती पर हो सकता है। इस डिवाइस से शायद बच्चे और भ्रूण के बीच की लाइन धूमिल हो जाएगी।

ऊपर की गई बात का जवाब देते हुए फ्लेक ने कहा नैतिकता को हम उन जल्दी पैदा हुए बच्चों की जान बचाकर और उन सब विकारताओं को दूर करके संतुलित कर लेंगे जिसका ऐसे बच्चे सामना करते हैं। नॉर्मल प्रेगनेंसी 40 हफ्तों तक रहती है। 23 से 24 हफ्ते के समय पर पैदा हुए बच्चों के लिए ऐसी डिवाइस बनाई जाएगी।

फ्लेक ने कहा समय से पहले पैदा हुए बच्चों में से केवल आधे ही बच पाते हैं, और जो बचते भी हैं वो काफी समस्या का सामना करते हैं, जिनमें मानसिक पागलपन, मस्तिष्क पक्षाघात, दौरे पड़ना, लकवा-ग्रसित होना और अंधापन मुख्य है।