समय से पूर्व बच्चों का जन्म

Premature babies

समय से पूर्व उन बच्चों का जन्म माना जाता है जो 37वें हफ्ते से पहले पैदा होते हैं। ऐसे किसी भी बच्चे को ज़्यादा दिक्कत हो सकती हैं और शायद थोड़े ज़्यादा समय के लिए हॉस्पिटल भी रुकना पड़ सकता है। ऐसे बच्चों को जन्म के बाद भी कई दिक्कत हो सकती हैं, वो दिक्कत जो उन्हे ज़िंदगी भर परेशान कर सकती हैं। अमेरिका में हर साल 10 में से 1 बच्चे का जन्म समय से पूर्व होता है।

जितना जल्दी बच्चा जन्म लेगा, उतना ही उसके स्वास्थ के बिगड़ने की संभावना है। कई समय से पहले जन्मे बच्चों को बच्चों के ICU में समय गुज़ारना पड़ता है, इस विभाग में बीमार बच्चों की देखभाल की जाती है। लेकिन आजकल की तकनीक की वजह से समय बदल गया है, और ऐसे किसी भी बच्चे के स्वस्थ रहने की संभावना काफी ज़्यादा है जिसका जन्म समय से पहले हुआ हो।

समय से पूर्व जन्म लेने वालों बच्चों को क्या दिक्कत हो सकती है?

समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों को निम्न दिक्कत हो सकती है:

एपनिया: इस समस्या में बच्चा 20 सेकंड या उससे थोड़े ज़्यादा समय के लिए सांस लेना रोक सकता है। इसके साथ बच्चे की दिल की धड़कन भी धीमी हो सकती है।

श्वसन संकट सिंड्रोम: 34 हफ्ते से पहले पैदा हुए बच्चों को ये दिक्कत हो सकती है। इस समस्या से ग्रसित बच्चों में सर्फ़ेकटेंट नामक प्रोटीन नहीं होता, वो प्रोटीन जो किडनी में छेदों को जुड़ने से रोकता है।

अन्तः स्त्रावीय रक्तस्त्राव: दिमाग में रक्त बहना इसमें आता है।

पेटेंट डक्टस आर्टिओसिस: यह दिल से जुड़ी दिक्कत है, जो हृदय के पास मौजूद दो रक्त कोशिकाओं के जुड़ाव पर होती है। अगर डक्टस सही तरीके से बंद नहीं होता तो बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है या दिल काम करना भी बंद कर सकता है।

नेक्रोटाइज़िंग एंट्रोकोलाइटिस(NEC): यह बच्चे के आंत में समस्या से जुड़ी दिक्कत है। इसमें बच्चे को खाने में दिक्कत हो सकती है, दस्त लग सकते हैं और पेट सूज सकता है। यह बच्चे के समय से पूर्व जन्म लेने के 2 से 3 हफ्ते के बाद होता है।

समय से पूर्व की रेटिनोपेथि: इसमें बच्चे की आँख में खून कोशिका का अनियमित बढ़ाव होता है। इससे बच्चे के देखने की शक्ति भी प्रभावित हो सकती है।

पीलिया: जब बच्चे की आँख और त्वचा पीली दिखती है। पीलिया तब होता है जब बच्चे का यकृत यानी लीवर ढंग से काम नहीं कर रहा हो या बिल्कुल काम नहीं कर रहा हो।

एनीमिया: यह वो स्थिति है जब बच्चे के पास स्वस्थ रक्त कोशिका की मात्रा नहीं होती, और वो अपने पूरे शरीर तक खून ले जाने में समर्थ नहीं हो पाता।

ब्रोनकोपुलमोनेरी डिस्प्लेसिया: यह फेफड़ों से जुड़ी दिक्कत है जो समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों और सांस लेने वाली मशीन का सहारा लेने वाले बच्चों को हो सकती है। इस समस्या से ग्रसित बच्चों के फेफड़े में कभी-कभी द्रव आ सकता है, और इससे फेफड़ों में इन्फ़ैकशन हो सकता है।

इन्फ़ैकशन: समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों को अक्सर दिक्कत आती है किटाणुओं से लड़ने में क्योंकि उनका प्रतिरोधक तंत्र पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ होता। इस इन्फ़ैकशन की वजह से बच्चे को निमोनिया हो सकता है। खून का इन्फ़ैकशन, फेफड़े का इन्फ़ैकशन सेप्सिस, या दिमाग के आस पास द्रव इकट्ठा होकर इन्फ़ैकशन हो सकता है।

समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों का कैसे सबसे अच्छे तरीके से खयाल रखा जाए?

अपने डॉक्टर से वो सभी बातें डिस्कस करें जो आपके बच्चे को हैं। बच्चा जन्म के बाद तुरंत घर जाने लायक स्वस्थ हो सकता है या फिर उसे थोड़ी मेडिकल मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। बच्चा निम्न स्थिति में घर जा सकता है:

बच्चे का वज़न कम से कम 4 पाउंड हो

बच्चा खुदसे ही खुदको गर्म रखने में सक्षम हो, वो भी बिना किसी मशीन की मदद से, या अन्य शब्दों में कहें तो इंक्यूबेटर की मदद से। इंक्यूबेटर से बच्चा मशीन की मदद से गर्म रहता है।

बच्चा माँ का दूध या बोतल से दूध पीने में सफल हो

बच्चा दिन में कम से कम आधा से एक आउंस वज़न बढ़ा रहा हो

बच्चा अपने आप में सांस लेने में सक्षम हो

हॉस्पिटल से छुट्टी होने के बाद आपके बच्चे को कुछ खास उपचार या मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। आपके डॉक्टर या हॉस्पिटल का स्टार आपकी इन चीजों में मदद करेगा, या आपको बताएगा की आपको कैसे बच्चे का खयाल रखना है। वो आपको ये भी बता सकते हैं की आपके एरिया में अभी कौन नए-नए माता-पिता बने हैं, जो आपकी मदद कर सकते हैं।