प्रसव प्रेरित करना

Induced labour

जब आपके प्रसव को कृत्रिम रूप से शुरू किया जाता है, तो उसे प्रसव प्रेरित करना कहते हैं। जब आपके डॉक्टर को लगता है की आपके बच्चे को अभी जन्म दिया जा सकता है तो वो आपका प्रसव कृत्रिम रूप से प्रेरित करते हैं।

हालांकि ज़्यादातर प्रसव प्रकृतिक रूप से ही शुरू होते हैं, और ऐसा होना ही सही है, पर कभी-कभी बाहरी मदद की ज़रूरत पड़ती है।

मेरे प्रसव को मदद की ज़रूरत क्यों?

आपके प्रसव को शुरू करने के लिए बाहरी मदद की ज़रूरत निम्न चीजों से पड़ सकती है:

जब आपकी प्रेगनेंसी 41 हफ्तों से ऊपर की हो गई हो।

आपकी पानी की थैली टूट गई हो पर प्रसव शुरू नहीं हुआ हो। अगर ऐसा होने पर आपका प्रसव शुरू नहीं हुआ तो आपके बच्चे में इन्फ़ैकशन आ सकता है।

यदि आपको डायब्टीस है तो आपके बच्चे के थोड़ा बड़े होने की संभावना है। अगर आपका बच्चा सामान्य गति से बढ़ रहा है तो आपके डॉक्टर आपको 38वें हफ्ते में प्रसव की सलाह दे सकते हैं, अगर बच्चा बड़ा हुआ तो आपको ऑपरेशन ही करवाना पड़ सकता है।

अगर आपको कोई पुरानी दिक्कत, जैसे किडनी की बीमारी हो तो बच्चे की सेहत के लिए आपको प्रेरित प्रसव का सुझाव दिया जा सकता है।

अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र की हैं तो बच्चे का मृत जन्म हो सकता है, 39वें से 40 हफ्ते में प्रसव होने से यह खतरा कम हो सकता है।

कुछ निजी कारणों की वजह से भी आप अपना प्रसव करवा सकती हैं जैसे अगर आपके अनुसार बच्चे का जन्म नहीं हुआ तो आपके पति बच्चे का जन्म नहीं देख पाएंगे। या फिर प्रेगनेंसी की परेशानी आपको सहन नहीं हो रही हों।

आपको अपने पति से इसके बारे में बात करनी चाहिए, जिससे आप वो निर्णय ले सकें जो आपके लिए सही हो। आप चाहें तो इस प्रेरित प्रसव के लिए मना भी कर सकती हैं, और इसके लिए आपको आपके डॉक्टर या नर्स फोर्स नहीं कर सकते।

मेरे प्रसव को कैसे प्रेरित किया जाएगा?

कुछ तरीकों से आपकी दाई या नर्स आपके प्रसव को शुरू कर सकती है। नीचे दिए क्रम से आपका प्रसव प्रेरित किया जाता है।

मेम्ब्रेन स्वीप

इस तरीके में आपकी नर्स आपके सर्विक्स के खुलाव पर अपनी उंगली फेरती हैं, इससे प्रसव शुरू हो सकता है। अगर आपकी प्रेगनेंसी पूरी हो गई है तो आपकी दाई आपको इसका सुझाव दे सकती है। वो आप पर इस तरीके को 40 और फिर से 41वें हफ्ते में आजमा सकती हैं, वो भी तब जब ये आपका पहला बच्चा है, दूसरे बच्चे के समय 41वें हफ्ते में आपको ये स्वीप दिया जाता है।

अगर आपकी पानी की थैली टूट गई है पर प्रसव शूर नहीं हुआ है तब आपको ये तरीका आजमाने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इससे इन्फ़ैकशन बढ़ सकता है।

प्रोस्टेग्लेंडीन

प्रोस्टेग्लिन एक हार्मोन्स जैसा पदार्थ होता है जिससे गर्भाशय ग्रीवा मतलब सर्विक्स परिपक्व होती है और इससे दबाव शुरू हो सकता है। इसके इस्तेमाल से पहले आपके बच्चे की धड़कन को लगातार देखा जाएगा, वो 30 मिनट के लिए, और आपका बिशप स्कोर भी देखा जाएगा।

आपकी दाई/नर्स आपकी योनी में एक टेबलेट डालेगी, जिसमें प्रोस्टेगलेंडिंन होता है। अगर आपको प्रोपेस दिया जा रहा है तो आपको एक तरफ होकर 30 मिनट के लिए लेटना पड़ सकता है।

जब तक आप प्रोस्टेगलेंडिंन के काम करने का इंतज़ार करते हैं, तब तक आप टहलने के लिए जा सकते हैं। निर्भर करता है की आपका प्रसव क्यों प्रेरित किया जा रहा है, और आप घर जाकर अपने दबाव के शुरू होने का इंतज़ार भी कर सकती हैं। आपकी जांच छह घंटे बाद एक टेबलेट या जेल से की जाती है।

प्रोस्टेगलेंडिंन से आपको उल्टी आने या तबीयत खराब जैसे लग सकता है, इससे आपको दस्त भी हो सकते हैं। अगर प्रोस्टेगलेंडिंन काम नहीं करता तो आपको बाद में कभी इसी तकनीक का इस्तेमाल करने को कहा जा सकता है। अगर आपके डॉक्टर को लगता है की ऑपरेशन से बच्चा काफी सुरक्षित होगा, तो आपके डॉक्टर आपको इसकी सलाह दे सकते हैं।

इस तरीके के काफी कम खतरे हैं, इससे आपकी कोख ज़्यादा ही संकुचित हो सकती है। इसका मतलब आपको काफी गहन, और बार-बार संकुचन यानी दबाव आ सकते हैं, जो आपके बच्चे के लिए तनाव वाले पल हो सकते हैं।

बैलून कैथेटर या अन्य मकेनिकल तकनीक

बैलून कैथेटर में धीरे-धीरे शारीरिक दबाव की मदद से आपकी गर्भाशय ग्रीवा को खोलने में मदद की जाती है। इसमें एक मूत्र निकालने वाली नली को आपके कोख में डाला जाता है, और फिर इसमें धीरे-धीरे सेलीन सोल्यूशंस डाला जाता है। जैसे ही गुब्बारा भरता है वैसे ही आपकी गर्भाशय ग्रीवा पर दबाव पड़ता है, जिससे ग्रीवा फैलती है, और आपका प्रसव शुरू होता है।

गुब्बारे वाली नली वहीं छोड़ दी जाती है, आमतौर पर 12 घंटों के लिए, और इस समय आप पर नज़र रखी जाती है। अगर आपका प्रसव शुरू होता है, आपकी पानी की थैली टूट जाती है, या बच्चा तनाव में आता है तो इस उपकरण को हटा दिया जाता है।

ऐसे किसी भी यंत्र को खुदमे डलवाना काफी मुश्किल है। हालांकि जैसे ही आपकी गर्भाशय ग्रीवा खुलती है, तो दर्द अपने आप ही कम हो जाता है। ज़्यादातर महिलाएं इस उपकार के 24 घंटे के अंदर ही जन्म दे देती हैं।

झिल्ली का बाहरी मदद से टूटना

इसे पानी की थैली का टूटना भी कहा जाता है, इसका इस्तेमाल आपके डॉक्टर या नर्स द्वारा आपके प्रसव को शुरू करने के लिए भी किया जाता है। अगर आपको योनी प्रोस्तेग्लेंडिंस से दिक्कत हो रही है तो आपको यह दिया जाता है, जैसे काफी लंबे मरोड़े।

आपके डॉक्टर बच्चे के चारों ओर झिल्ली में छोटा सा छेद बनाएँगे। ये प्रक्रिया काफी असहज हो सकती है, इसलिए आपको रिलेक्स करने के लिए आपको गॅस और हवा दी जा सकती है।

इस तरीके से हमेशा प्रसव चालू नहीं होता, और पानी की थैली टूटने के साथ आपके बच्चे को इन्फ़ैकशन का खतरा हो सकता है। इसलिए इसको पहले इस्तेमाल करने के लिए नहीं कहा जाता है, इसमें पहले प्रसव शुरू हो गया हो तो अच्छा है। अगर आपके डॉक्टर को थोड़े भी इन्फ़ैकशन की आशंका होती है तो वो आपको एंटीबायोटिक्स दे सकती हैं।

मैं इसके लिए कैसे तैयार हो सकती हूँ?

आपके पास हमेशा विकल्प होता है की आप इस प्रेरित प्रसव को चुनना चाहती हैं या नहीं, और आपको कैसे अपना प्रसव शुरू करना है इसका अधिकार भी आपका होता है। आपके डॉक्टर आपके गर्भाशय ग्रीवा की हालत देखकर आपको किसी भी तरीके की सलाह देंगे।

प्रसव में जाने से पहले आपको इस बात की जानकारी भी होनी चाहिए की आपको किस प्रकार का दर्द निवारक चाहिए। ये भी जानिए की आपके लिए इन दर्द निवारण तकनीक में कौन सी बेस्ट है।