डॉक्टर डेस्क: एक ऐसा मुद्दा जिसके बारे में हम कभी बात नहीं करते: गर्भपात

Miscarriage

 

प्रसूति डॉक्टर और एक महिला होने की के बाद जब मैं अपने मरीजों को दुखी और असहज देखती हूँ तो मुझे काफी दुख होता है।

गर्भवस्था के शुरुआत में खून बहना उनमें से एक है। यह मरीजों के दिमाग में गंभीर घाव छोड़ता है और हम जैसे डॉक्टर के लिए यह चिंता का विषय है। मैं देखती हूँ की मेरी सलाह परिवार या दंपत्ति को मदद करती है और मुश्किल दिनों में क्या किया जा सकता है, और अभी क्या चल रहा है, इसका उन्हे पता चलता है।

शुरुआती प्रेगनेंसी में खून बहने की कई वजह होती हैं। एक अच्छी महिलाओं की डॉक्टर आपको कुछ सवाल पूछकर बता पाएगी की आपकी क्या परिस्थिति है, इसके अलावा गहन जांच और साधारण पूछताछ से पता चलेगा की क्या हो रहा है।

परिवार और महिला के दिमाग में सबसे ज़्यादा डर होता है गर्भपात का। शुरुआती गर्भावस्था में खून निकलने की यह एक अहम वजह हो सकती है। इसके अलावा असाधारण प्रेगनेंसी, गर्भावधि में ट्रोफोब्लास्टिक बीमारी, गर्दन की नाकड़ा इसके अन्य कारण हो सकते हैं, ये काफी बड़े मुद्दे हैं जो एक अलग ही आर्टिकल में समझाए जा सकते हैं, इसलिए मैं इनके बारे में और बात नहीं करूंगी।

यह लेख केवल गर्भपात पर फोकस करता है। इसमें कई अवस्थाएँ होती हैं, लेकिन सबसे ज़रूरी यह है की डॉक्टर के कुछ बुरे शब्द बोलने से सब खत्म नहीं होता है।

गंभीर गर्भपात

इस समय गर्भ बना रहता है लेकिन इसे काफी खतरा होता है। इस समय महिला बिना दर्द के खून बहना महसूस करती हैं। खून का बहना शायद अल्ट्रासाउंड में दिख जाए और शायद इसका पता नहीं चले। शारीरिक तनाव वाले काम इस समय नहीं करने चाहिए, हालांकि इसमें बैड रेस्ट करने की भी ज़रूरत नहीं है। प्रेगनेंसी को सपोर्ट करने वाली हार्मोनल दवाइयाँ इन केस में बुक के अनुसार अच्छी भूमिका निभाती हैं। अगर डॉक्टर द्वारा फिट समझा गया तो आपको खून रोकने के लिए दवाई भी दी जा सकती है। इस समय प्रेगनेंसी सुरक्षित है और बिना किसी दिक्कत के आगे बढ़ सकती है।

टाला ना जाने वाला गर्भपात

जैसा की नाम से पता चल गया होगा, इस गर्भपात से बचाव नहीं किया जा सकता और ज़्यादातर केस में ये होता ही है। इस समय गर्भाशय का मुंह काफी खुला रहता है और खून भी अधिक मात्रा के साथ दर्द के साथ बहता है। इस स्थिति में गर्भपात दवाई या छोटी सर्जरी से किया जा सकता है, यह सब मरीज पर निर्भर करता है। उस समय जो मन करे वो करना भी काफी व्यवहारिक विकल्प है।

अधूरा गर्भपात

ज़्यादातर प्रेगनेंसी योनी से दर्द के साथ खून निकलने पर ही चली जाती है और इसे बचाया भी नहीं जा सकता है। फिर से बचा हुआ गर्भ दवाइयों या सर्जरी से निकाल सकते हैं, यह उस समय पर निर्भर करता है जब से खून के ऊतक अंदर रह गए हों, इसके अलावा शरीर की स्थिति या मरीजों की इक्च्छा पर भी सब निर्भर करता है। लंबे समय से ज़्यादा खून बहने से एनीमिया का रिस्क हो सकता है और गर्भाशय में इन्फ़ैकशन भी हो सकता है, या यह परिस्थिति इसको खतरनाक दूषित गर्भपात में बदल सकती है।

पूरा गर्भपात

पूरा गर्भपात खून में निकल जाता है। इसमें खून एक दम से काफी कम बहने लगता है और फिर रुक जाता है। इसमें हमारा सारा ध्यान होता है महिला को कैसे इस गर्भपात से मानसिक रूप से उभारा जाए। इस समय क्या हुआ और अन्य कई प्रकार के सवाल के जवाब देने से महिला को इमोश्नल सपोर्ट मिलता है- इन सब सवालों के जवाब भी आपको अलग आर्टिकल में दिए जाएंगे।

मिस्ड गर्भपात

अल्ट्रासाउंड में इस अवस्था का पता चल जाता है की प्रेगनेंसी सही से बढ़ रही है या नहीं। इस समय बच्चे की धड़कन सुनाई नहीं देती, और इस प्रेगनेंसी को बचाया नहीं जा सकता है। इससे शायद महिलाओं को कोई फर्क ना पड़े, या शायद उन्हे जी मिचलने और थकान जैसी आदतों में कमी दिखाई दे। खून का बहना कुछ दिनों में चालू हो सकता है और इससे प्रेगनेंसी के खत्म होने की प्रक्रिया चालू हो जाती है या शायद काफी समय तक आपको इसका आभास ही ना हो। जब महिला तैयार होती है तो ऐसे समय में दवाइयाँ या सर्जरी से इलाज़ किया जाता है। जांच के लिए गर्भ को भेजा सकता है, हालांकि 40% केस में गर्भपात के कारण का पता नहीं चलता।

दूषित गर्भपात

एक ऐसा गर्भपात जो अपने आप या मर्जी से किया जाता है, और जो इन्फ़ैकशन की वजह से काफी जटिल हो गया हो। यह काफी गंभीर स्थिति है और इससे जान भी जा सकती है, बिगड़े हुए संक्रमण और शरीर के अंग काम ना करने से यह स्थिति आती है। इसमें हॉस्पिटल में भर्ती करवाने की ज़रूरत होती है। सही होने में थोड़ा समय लग सकता है और इससे बांझपन भी हो सकता है। अगर किसी भी महिला को गर्भपात के समय बुखार, योनी से बुरी दुर्गंध, या पेट में दर्द की समस्या आ रही है, तो उसे तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए।

हालांकि कोई भी गर्भपात नहीं चाहता है पर यह होता है। यह प्रकृति का कम स्वस्थ गर्भ को खत्म करने का एक तरीका होता है। इमोश्नल सपोर्ट और साथी, या फॅमिली से मिलने वाले प्यार से महिला मानसिक और शारीरिक रूप से तेज़ी से स्वस्थ होती है और इससे आगे भी महिला का स्वास्थ अच्छा रहता है।