डॉप्लर स्कैन

Doppler scan

डॉप्लर अल्ट्रासाउंड में उच्च आवृत्ति की ध्वनि के इस्तेमाल से धामनियों और नसों में खून के संचार को देखा जाता है। अगर आपकी खून की वाहिकाओं में खून का संचार सही नहीं है तो इसमें उसका पता चल जाता है दूसरी तरफ अगर आपके अंदर खून के थक्के जम रहे हैं या खून संचार सही नहीं है तो इसमें उसका भी पता चलता है।

प्रेगनेंसी में ये डॉप्लर टेस्ट आपकी तीसरी तिमाही में 30-34वें हफ्ते के बीच किया जाता है। ये टेस्ट 24वें हफ्ते से पहले तो कभी नहीं होना चाहिए। इसमें आपकी गर्भनाल में खून के संचार से लेकर बच्चे के दिल और बाकी भागों में भी खून के संचार का पता चलता है।

ये टेस्ट कैसे होता है?

ये किसी भी साधारण टेस्ट की तरह होता है। इसमें सोनोग्राफर आपके पेट पर थोड़ा जैल लगता है और उसके ऊपर एक डिवाइस को घुमाता है। इसमें बच्चे के शरीर में हो रहे खून के संचार से ध्वनि टकराकर वापस आती है और पता चलता है की बच्चे का खून संचार तंत्र कैसा है। इससे मोनिटर पर एक तस्वीर बनती है, इससे सोनोग्राफर को पता चलता है की बच्चे की तबीयत कैसी है, और उसके अंदर खून का संचार कैसा हो रहा है।

मुझे इस स्कैन की ज़रूरत क्यों है?

इस स्कैन से पता चलता है की आपका बच्चा ठीक या नहीं व पता चलता है की बच्चे के पूरे शरीर में खून का संचार सही हो रहा है या नहीं।

ये नीचे दिए गए केस में भी किया जाता है:

अगर आपका बीएमआई काफी कम है, बीएमआई मतलब बॉडी मास इंडेक्स

अगर आपके पेट में दो या ज़्यादा बच्चे हैं

अगर आपको डायब्टीस या उच्च रक्तचाप/हाई ब्लड प्रैशर की दिक्कत है

अगर आपका बच्चा सही रफ्तार से नहीं बढ़ रहा हो

अगर आपकी गर्भपात का इतिहास रहा हो या आपका पुराना बच्चा वज़न में कम रहा हो

इस टेस्ट में क्या होता है?

आपके सोनोग्राफर इसमें काफी अलग एरिया देखेंगे, वो इस बात पर निर्भर करता है की आपके डॉक्टर को किस स्थान की जानकारी चाहिए। इसमें कई प्रकार के स्कैन होते हैं:

गर्भाशय धमनी डॉप्लर स्कैन

गर्भाशय धमनी आपकी कोख तक खून पहुंचाती है। प्रेगनेंसी के दौरान ये आकार में काफी बढ़ जाती है ताकि आपकी गर्भनाल को काफी खून मिल सके। आपके सोनोग्राफर देखेंगे की आपकी वाहिकाएँ फैली हुई हैं ताकि ये आकार में बढ़ सकें।

गर्भनाल धमनी डॉप्लर स्कैन

इसमें गर्भनाल से बच्चे को कैसा रक्त संचार हो रहा है उसका पता चलता है। इसमें इस बात की पुष्टि होती है की आपके बच्चे को सभी पोषण तत्व और सही प्रकार से ऑक्सिजन मिल रही है।

डॉप्लर स्कैन से न सिर्फ ये पता चलता है की बच्चे की सेहत कैसी बल्कि डॉक्टर को इससे बच्चे के पैदा होने की तारीख का निर्णय करने में भी मदद मिलती है। अगर आपके ये कई बार स्कैन हो रहे हैं तो इससे आपके बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता है।

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