एम्निओसेंटीसिस(गर्भवती महिला के गर्भाशय की जांच करना)

amniocentesis

एम्निओसेंटीसिस(गर्भवती महिला के गर्भाशय की जांच करना)

एम्निओसेंटीसिस का मतलब है डॉक्टर से प्रसव से पहले मिलना, जहां वो आपके एम्निओटिक द्रव के सैंपल को लेकर देखते हैं की आपका बच्चा स्वस्थ है या नहीं। वो द्रव जो आपके बच्चे को गर्भाशय में घेरे रहता है।

एमनिओ लेने का सबसे मुख्य कारण है ये देखना की बच्चे को कोई आनुवांशिक विकारता तो नहीं है, या उसे क्रोमोसोम से जुड़ी कोई दिक्कत तो नहीं है, जैसे डाउन सिंड्रोम।

कोरिओनिक विलस सैंपलिंग की तरह ही ये प्रक्रिया भी पहली तिमाही में की जाती है, एम्निओकेंटेसिस एक केरियोटाइप का उत्पादन करता है-बच्चे के क्रोमोसोम की एक पिक्चर-इससे डॉक्टर देखते हैं की बच्चे में कोई दिक्कत तो नहीं हैं। केवल 1 परसेंट केस में ही ये दिक्कत पाई जाती है।

एम्निओसेंटीसिस वैसे तब किया जाता है जब महिला अपनी प्रेगनेंसी के 16वें से 20वें हफ्ते में होती है। वैसे ये टेस्ट किसी का भी हो सकता है, लेकिन जिन महिलाओं को ये टेस्ट लेने के लिए कहा जाता है उन्हें आनुवांशिक या क्रोमोसोम से जुड़ी दिक्कत होती है। यदि आपको अभी तक इस टेस्ट के बारे में नहीं बताया गया है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में तुरंत बात करें। वैसे सभी महिलाओं को ये टेस्ट नहीं लेना पड़ता है, लेकिन कुछ खास केस में आपके डॉक्टर आपको ये टेस्ट दे सकते हैं। इस विषय में आपको अपने डॉक्टर से जानकारी लेनी चाहिए, और आपको अपने परिवार का रिकॉर्ड भी उनसे शेयर करना चाहिए, इससे वो अंदाज़ा लगा पाएंगे की आपको क्या करना है।

इन निम्न कारणों की वजह से भी एम्निओसेंटीसिस किया जा सकता है:

अंदर के इन्फ़ैकशन का पता लगाने या उसे खत्म करने के लिए

आपके बच्चे की सेहत पर नज़र रखने के लिए, देखने के लिए की आपको खून में संवेनदनशीलता है, जैसे Rh संवेदनशीलता। ये एक जटिल समस्या है और ये तब होती है जब आपका ब्लड टाइप आपके बच्चे के ब्लड टाइप से अलग होता है।

यदि आपको बच्चे को मेडिकल कारणों से जल्दी जन्म देना हो, तब उसके फेफड़ों के विकास को देखने के लिए।

इस टेस्ट से कौन सी विकारता का पता चलता है?

इससे लगभग सभी क्रोमोसोम से जुड़े विकारों का पता चलता है, जैसे डाउन सिंड्रोम, ट्रिसोमी 13, ट्रिसोमी 18, और सेक्स क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता। टेस्ट से इन सब विकारों का पता चलता है, लेकिन ये पता नहीं लगता की ये कितने गंभीर हैं।

इसमें कुछ आनुवांशिक विकारों का भी पता चलता है, जैसे सिस्टिक फिब्रोसिस, कोशिका की बीमारी। इससे सभी आनुवांशिक बीमारी का तो पता नहीं चलता, पर अगर आपके बच्चे को इन विकारता से ज़्यादा विकार होने का खतरा होता है तो इस टेस्ट से मदद मिल सकती है।

जन्म से जुड़ी विकारता जैसे स्पाइना बिफ़िडिया और अनेनसिफली का इससे पता चलता है।

एम्निओसेंटीसिस हालांकि अन्य जन्म से जुड़े विकार नहीं बता सकता है जैसे दिल से जुड़े विकार। वैसे कई अन्य विकार आपको दूसरी तिमाही के अल्ट्रासाउंड में पता लग सकते हैं, ये हर उस महिला का होता है जो एम्निओसेंटीसिस टेस्ट करवाती हैं।

किन रिस्क की वजह से बच्चे में जन्म के समय आनुवांशिक विकारता या अन्य विकारता हो सकती हैं?

इसके कारक नीचे हैं:

डाउन सिंड्रोम स्क्रीनिंग रिज़ल्ट

आपका एक स्क्रीनिंग टेस्ट हुआ होता जिसमें पता चलता है की बच्चे को डाउन सिंड्रोम या अन्य क्रोमोसोम विकार होने के ज़्यादा रिस्क है।

अल्ट्रासाउंड रिज़ल्ट

अल्ट्रासाउंड में पता चलता है की बच्चे के ढांचे में क्रोमोसोम से जुड़े कोई विकार तो नहीं हैं।

केरियर स्क्रीनिंग रिज़ल्ट

आपके या आपके पार्टनर के अंदर कई आनुवांशिक विकार के कारण हो सकते हैं, जो आपके बच्चे तक जा सकते हैं।

आपकी हिस्ट्री

आपकी पहली प्रेगनेंसी में बच्चे को कोई आनुवांशिक विषमता रही हो और इसी वजह से ऐसा फिर से होने का खतरा रहता है।

आपके परिवार का इतिहास

आपको या आपके पार्टनर को कोई क्रोमोसोम से जुड़ी विषमता या आनुवांशिक विकार हो सकता है, या आपके परिवार में ऐसा कोई केस रहा हो, इन सबसे बच्चे पर इसका रिस्क रहता है।

आपकी उम्र

किसी को क्रोमोसोम से जुड़ी समस्या वाला बच्चा हो सकता है, लेकिन माँ की उम्र बढ़ने के साथ आपका रिस्क बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए आपके बच्चे में डाउन सिंड्रोम होने का खतरा 1200 में से एक बार रहता है अगर 25 साल तक हैं, लेकिन यही खतरा 40 साल की उम्र में 100 में से एक हो जाता है।

एम्निओसेंटीसिस से गर्भपात होने का खतरा क्या है?

इस टेस्ट से गर्भपात होने का खतरा काफी कम है। वैसे पहले ही कई महिलाओं को दूसरी तिमाही में गर्भपात अपने आप होता है, इसलिए कहा नहीं जा सकता की गर्भपात का असली कारण एम्निओसेंटीसिस टेस्ट था या कोई और चीज़।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्सटेट्रिशियन एंड गायनोकोलोजी(एसीओजी) के अनुसार इस टेस्ट से गर्भपात होने का खतरा 300-500 में से एक है। वहीं अच्छे अनुभव में अगर ये टेस्ट हो रहा है तो इसका खतरा और भी कम होता है।

क्या रिस्क कम करने का कोई और तरीका है?

आप किस जानकार या अपने पुराने डॉक्टर से पूछ सकती हैं की कौन से डॉक्टर के पास इस टेस्ट को करने का अनुभव है, या कौन सा सेंटर इस टेस्ट को काफी समय से सुरक्षित तरीके से करता है। आप जिस भी सेंटर या डॉक्टर को चुनने जा रही हों वहाँ पता करें की गर्भपात की दर क्या है।

इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड भी करवाया जाता है, इसलिए देख लें की कितने अनुभवी लोग इस काम को करते हैं। अनुभव का पता इससे चलता है की डॉक्टर एक बार में ही सही प्रकार से एमनिओ लेने में सफल होगा, ताकि बार-बार ये प्रक्रिया ना हो। इससे आपके बच्चे को नुकसान होने का खतरा कम रहता है।

एम्निओसेंटीसिस करवाने से पहले क्या मैं आनुवांशिक जानकार से मिलकर पुष्टि कर सकती हूँ की मुझे इस टेस्ट को करवाना है या नहीं?

हाँ, बल्कि कई सेंटर आपको ऐसे जानकार से मिलने के लिए कहेंगे ताकि आपको पता लग सके की इस टेस्ट में क्या रिस्क होते हैं। ये सलाहकार आपके परिवार के इतिहास को पूछेगा और आपके प्रेगनेंसी के बारे में भी सवाल करेगा।

आपके जवाब सुनकर ही सलाहकार आपको बता पाएगा की बच्चे को क्रोमोसोम से जुड़ी या आनुवांशिक विकारता में क्या होता है। फिर आप डिसाइड कर सकती हैं की आपको सीवीएस करवाना है या एमनिओ, या आपको कोई टेस्ट लेना ही नहीं है।

कैसे पता चले की मेरे लिए क्या सही है?

एसीओजी के अनुसार सभी पहली और दूसरी तिमाही में चल रही महिलाओं का स्क्रीनिंग टेस्ट होना चाहिए। आपके डॉक्टर या आनुवांशिक सलाहकार आपको बताएँगे की क्या फायदे और नुकसान होते हैं। पर अंत में आपको ही निर्णय लेना है की टेस्ट आप लेंगी या नहीं।

कई महिलाएं कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट को उनके कुछ टेस्ट के आधार पर लेने का निर्णय लेती हैं। कुछ महिलाएं बिना कुछ सोचे ही टेस्ट करवाती हैं(उन्हें शायद पता होता है की उन्हें क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता है, और ये विकारता शुरुआती टेस्ट में शायद ना पकड़ी जाए- या शायद उन्हें अपने बच्चे के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना हो। कुछ महिलाओं को बच्चे की दिक्कत को पता करने के लिए गर्भपात का खतरा मोल लेना भी ज़्यादा बड़ा नहीं लगता। कुछ महिलाएं कोई स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं करवाती।

अगर आप स्क्रीनिंग टेस्ट करवाती हैं तो आप अपने डॉक्टर से बात करके डिसाइड कर सकती हैं की आपकी प्रेगनेंसी में ज़्यादा बड़ा रिस्क दिखता है, और आपको सीवीएस कारवाना है या एमनिओ, पता करने के लिए दिक्कत है भी या नहीं।

कुछ महिलाएं पहले ही टेस्ट करवाती हैं, और अगर कुछ भी होने पर वो अपनी प्रेगनेंसी को कभी खत्म नहीं करती। उनके अनुसार अगर उनके बच्चे को कोई विकारता हुई तो इससे उनके जीवन में संघर्ष काफी बढ़ेंगे और वो काफी कुछ सीख पाएंगे।

कुछ ऐसी कंडिशन हैं जिन्हें बच्चे के पेट में रहते ही सही किया जा सकता है। इसलिए अगर आपको थोड़ा भी शक हो रहा हो की आपके बच्चे को कोई दुर्लभ समस्या है तो आप एमनिओ से इसका पता कर सकती हैं।

दूसरी तरफ कुछ महिलाएं वो कोई भी प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहती जिससे उनके गर्भपात का रिस्क बढ़ सकता हो, खासकर तब जब उनको परिणाम से कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो। इसलिए वो ऐसे कोई भी टेस्ट नहीं करवाते हैं।

एक पर्फेक्ट निर्णय कुछ नहीं है। अलग-अलग लोग अपने हिसाब से निर्णय लेते हैं, कुछ के अनुसार रिस्क लिया जा सकता है, तो कुछ के अनुसार परिणाम कुछ भी हो, पर उन्हें टेस्ट से बचना ही है।

मैं सीवीएस और एमनिओ में कौन सा टेस्ट चुनूँ?

दोनों ही टेस्ट से पता चलता है की आपके बच्चे को कोई निश्चित क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता या आनुवांशिक विकारता है या नहीं।

सीवीएस को प्रेगनेंसी की शुरुआत में किया जाता है, आमतौर पर 10-13 हफ्ते के बीच में, आप अपने बच्चे की कंडिशन के बारे में जल्द जान सकती हैं। अगर सब ठीक है तो आपको काफी पहले ही आराम मिल जाएगा। और वहीं अगर कोई बड़ी दिक्कत है और आप प्रेगनेंसी को खत्म करने का निर्णय लेती हैं तो आप ये सब कर सकती हैं, क्योंकि आप अपनी पहली तिमाही में हैं।

दूसरी तरफ अगर आप बाद में कोई टेस्ट करवाना चाहती हैं तो आपको एम्निओसेंटीसिस के लिए ही जाना पड़ेगा। और भी चीजों से आपके निर्णय पर असर पड़ सकता है। अगर आपके बच्चे को जन्म से जुड़े विकार होने का खतरा कुछ ज़्यादा ही है तो आपको एमनिओ ही करवाना पड़ेगा क्योंकि सीवीएस से आपको इन विकारों का पता नहीं चलेगा।

सीवीएस से माना जाता है की गर्भपात का खतरा ज़्यादा रहता है, लेकिन कुछ स्टडी में पता चला की ऐसा कुछ नहीं है। ये सब इस पर निर्भर करता है की आपका टेस्ट कौन सा डॉक्टर कितने साल के अनुभव के साथ कर रहा है।

कोई भी निर्णय लेने से पहले आपको ये बातें अपने पार्टनर के साथ चर्चा में लानी होंगी, साथ ही आपको डॉक्टर या आनुवांशिक सलाहकार से भी बात करनी होगी।

एम्निओसेंटीसिस है क्या?

इस प्रक्रिया में 20-30 मिनट लगते हैं। एमनिओ से पहले आपको अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है, जिससे पता चलता है की आपका बच्चा कितना बड़ा है। कुछ सेंटर इन्हें पहले ही कर लेते हैं, तो कुछ तब करते हैं जब आप एमनिओ के लिए आते हैं।

एमनिओ के लिए आपको लेटना पड़ता है, और आपके पेट को एल्कोहल या आयोडिन के सोल्यूशंस से धोया जाता है, ताकि आपको कोई इन्फ़ैकशन ना लगे। अल्ट्रासाउंड से एम्निओटिक का पता लगाया जाता है, ऐसा एक सुरक्षित दूरी से होता है ताकि बच्चे और गर्भनाल को कोई नुकसान ना हो। इसमें 20 मिनट का समय लग सकता है

फिर अल्ट्रासाउंड की गाइडलाइंस में डॉक्टर एक पतली, लंबी और खाली सुईं को आपके पेट से आपके बच्चे के चारों तरफ वाले एम्निओटिक द्रव में घुसाता है। डॉक्टर फिर यहाँ थोड़ा सा द्रव निकाल लेता है-एक आउंस एक आस-पास, या दो चम्मच के बराबर।

द्रव में लेने में थोड़े मिनट लग सकते हैं, लेकिन आमतौर पर 30 मिनट से कम लगते हैं। आपके बच्चे को उतना द्रव जो निकाला गया है बनाने में थोड़ा और समय लगेगा।

आपको थोड़े मरोड़े, चुभन, और दबाव लग सकता है-या आपको कोई दिक्कत ही नहीं होगी। दर्द और दिक्कत भी अलग-अलग प्रेगनेंसी में अलग-अलग होती है। आप अपने पेट को एनेस्थेसिया के साथ सुन्न कर सकती हैं, लेकिन इससे जो दर्द होगा वो शायद टेस्ट वाले दर्द से भी बुरा हो, और इसलिए ज़्यादातर महिलाएं कोई सुन्न करने की दवाई नहीं लेती हैं।

इसके बाद डॉक्टर एक बाहरी मॉनिटर से बच्चे की दिल की धड़कन और अन्य क्रियाओं को आपको दिखा सकता है।

नोट: अगर आपका खून Rh-नेगेटिव है तो आपको एम्निओसेंटीसिस के बाद Rh प्रतिरोधी ग्लोबुलिन दिया जाएगा, हाँ अगर पिता भी Rh-नेगेटिव हुआ तो ऐसा नहीं होगा।

इस प्रक्रिया के बाद होता क्या है?

आपको इसके बाद पूरे दिन आराम लेना होगा, इसलिए आपको घर जाने के लिए किसी की मदद भी लेनी होगी। आप इस समय ज़्यादा हिलने-ढुलने वाली गतिविधि या सेक्स करने से कम से कम एक हफ्ते तक बचें। इस समय आप जहाज़ में उड़ सकती हैं, लेकिन अच्छा होगा की आप घर के पास ही रहें क्योंकि किसी दिक्कत में आप डॉक्टर से मिल सकती हैं।

आपको दिन में थोड़े से मरोड़े भी लग सकते हैं। अगर आपको कुछ ज़्यादा ही मरोड़े या योनि से खून निकल रहा हो, या आपसे एम्निओटिक द्रव निकल रहा हो तो अपने डॉक्टर को तुरंत फोन करें। हो सकता है की समस्या कुछ बड़ी हो, और आपका गर्भपात होने वाला हो, या हो चुका हो। अगर आपको बुखार या इन्फ़ैकशन हो तो अपने डॉक्टर को फोन करें।

मुझे परिणाम कब मिलेंगे?

आपको पूरे परिणाम एक या दो हफ्तों में मिलते हैं। इस दौरान प्रयोगशाला सैंपल की जांच करती है। और यहाँ पता लगता है की बच्चे में कोई विकार हैं या नहीं। अगर आप चाहें तो आपको बच्चे के लिंग का पता भी इस समय चल जाता है।

क्या होता है अगर पता चले की बच्चे में कोई दिक्कत है?

आपको आनुवांशिकता से जुड़ी जानकारी और सलाह दी जाएगी, और इससे आपको अपने विकल्पों पर भी काम करने का मौका मिलेगा। कुछ महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी को खत्म करने का निर्णय लेती हैं तो कुछ अपने बच्चे को पैदा करने का निर्णय लेती हैं।

आप चाहे कोई भी रास्ता चुनें, पर आपको आगे भी सलाह की ज़रूरत पड़ती रहेगी। कुछ महिलाओं को सपोर्ट ग्रुप काफी अच्छा लगता है, कुछ अकेले ही सलाह लेना पसंद करती हैं, वहीं कुछ महिलाएं दोनों ही चीज़ें लेना पसंद करती हैं। अपने डॉक्टर या सलाहकार को ये बताना ना भूलें की आपको कब तक मदद चाहिए।