कोरिओनिक विलस सैंपलिंग(भ्रूण में जेनेटिक गड़बड़ियों की जांच करना)

Chorionic villus sampling (CVS) during pregnancy

कोरिओनिक विलस सैंपलिंग क्या है?

कोरिओनिक विलस सैंपलिंग या सीवीएस प्रसव पूर्व का एक टेस्ट होता है जिसमें क्रोमोसोम की विषमता जैसे डाउन सिंड्रोम व अन्य जेनेटिक विकारता देखी जाती हैं। डॉक्टर यहाँ गर्भनाल से एक कोशिका लेते हैं और उसे लैब में आनुवांशिक जांच के लिए भेज देते हैं।

सीवीएस और अन्य टेस्ट एम्निओसेंटीसिस से एक केरियोटाइप का उत्पादन होता है-बच्चे के क्रोमोसोम की एक फोटो। इससे आपके डॉक्टर पता लगाते हैं की कोई दिक्कत है या नहीं।

जो महिला सीवीएस या एम्निओसेंटीसिस का चुनाव करती हैं, उन्हें आनुवांशिक क्रोमोसोम दिक्कत होने का खतरा ज़्यादा होता है, वैसे इस टेस्ट में थोड़ा गर्भपात होने का खतरा भी होता है।

सीवीएस को एम्निओसेंटीसिस से इसलिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसे आप समय से पूर्व भी कर सकते हैं, आमतौर पर 10-13 हफ्ते के बीच। एमनियो के लिए आपको 16 हफ्तों का इंतज़ार करना पड़ता है।

सीवीएस में किस प्रकार की परेशानी का पता चलता है?

एम्निओसेंटीसिस की तरह सीवीएस में निम्न समस्या का पता चलता है:

इसमें क्रोमोसोम से जुड़ी सभी विकारता का पता चलता है, इसमें डाउन सिंड्रोम, ट्रिसोमी 13, ट्रिसोमी 18 व लिंग क्रोमोसोम विषमता पता चलती है। इस टेस्ट से इन कंडिशन का पता चलता है, लेकिन ये कितनी गंभीर है इसका पता इस टेस्ट से नहीं चलता है।

एम्निओसेंटीसिस की तरह सीवीएस से दिमाग से जुड़ी विकारता का पता नहीं चलता, जैसे स्पिना बिफ़िडिया। अगर आप सीवीएस के लिए जा रही हैं तो आपकी दूसरी तिमाही में ब्लड स्क्रीनिंग टेस्ट होगा, इससे पता चलेगा की आपके बच्चे में दिमाग से जुड़े कोई डिफ़ेक्ट हैं या नहीं। ज़्यादातर न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट्स दूसरी तिमाही के अल्ट्रासाउंड में दिख सकते हैं।

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अगर आप सीवीएस लेने जा रही हैं तो थोड़ा सचेत हो जाएँ, इसमें थोड़े चान्स होते हैं की आपको कोई रिज़ल्ट ना मिले। अगर आपके सीवीएस में मोसाइसिस्म का पता चलता है तो आपका एम्निओसेंटीसिस टेस्ट होगा, और उसके बाद ही पता चलेगा की बच्चे को कोई विकारता है या नहीं।

किस वजह से मेरे बच्चे को आनुवांशिक विकार या विषमता हो सकती है?

नीचे कुछ कारक दिए हैं:

डाउन सिंड्रोम स्क्रीनिंग रिज़ल्ट: आपका पहली तिमाही में एक स्क्रीनिंग टेस्ट या न्यूकल टेस्ट हुआ होगा जिसमें पता चला होगा की बच्चे को डाउन सिंड्रोम या क्रोमोसोम से जुड़ी दिक्कत हो सकती है।

अल्ट्रासाउंड रिज़ल्ट

शुरुआत में होने वाले अल्ट्रासाउंड से पता चल सकता है की आपके बच्चे को ढांचे से जुड़े कोई विकार हैं, जिनका संबंध क्रोमोसोम से होता है।

केरियर स्क्रीनिंग रिज़ल्ट: आप और आपके पार्टनर आनुवांशिक विकारों को कुचालक होते हैं, जैसे सिस्टिक फिब्रोसिस या कोशिका से जुड़ी बीमारी।

आपका इतिहास

आपका पहले भी कोई बच्चा आनुवांशिक विकार के साथ पैदा हुआ हो और इसी वजह से ऐसा दुबारा होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

आपके परिवार की हिस्ट्री

आपको या आपके पार्टनर को कोई आनुवांशिक बीमारी है या आपके परिवार में किसी को ये समस्या है, इसी वजह से आपके बच्चे को भी ये दिक्कत होने का खतरा बढ़ता है।

आपकी उम्र

किसी को भी क्रोमोसोम विकार वाले बच्चे के होने की संभावना रहती है, लेकिन अधिक उम्र वाली महिलाओं को ये समस्या कुछ ज़्यादा ही रहती है। उदाहरण के लिए अगर आपकी उम्र 25 या उससे कम है तो आपके पेट में डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे के होने की संभावना 1200 में से 1 होती है, वहीं 40 के बाद ये 100 में से एक हो जाती है।

सीवीएस के रिस्क क्या हैं?

इस बात पर कोई सहमति नहीं बनी है की सीवीएस से क्या रिस्क हो सकते हैं, वैसे भी ये 200 में से एक ही महिला पर होता है।

लेकिन अभी कुछ अध्यन से पता चला है की सीवीएस से गर्भपात होने का खतरा काफी कम होता है। एक सेंटर जो काफी सीवीएस करता है उसे पता चला की इस प्रक्रिया से गर्भपात होने का खतरा 360 में से 1 है- ये दर एम्निओसेंटीसिस के बराबर ही मानी गई है। ऐसा शायद आजकल तकनीक के अच्छे होने और डॉक्टर के ज़्यादा अनुभवी होने की वजह से होता है।

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी में गर्भपात होता ही है, इसलिए पता लगाना की कोई गर्भपात सीवीएस से हुआ है या किसी और वजह से काफी मुश्किल है। आपका सबसे बड़ा रिस्क है की कौन सा डॉक्टर आपका टेस्ट कर रहा है।

कुछ पुराने अध्यन में कहा गया की बच्चे को इस प्रक्रिया से उंगली या एड़ी में नुकसान होता है, लेकिन ये उन महिलाओं में देखा गया जिन्होने टेस्ट 9 हफ्ते से पहले करवाया। अभी हुए अध्यन में पता चला की जो महिलाएं 11 हफ्ते या बाद में इस टेस्ट को करवाती हैं उन्हें ऐसी कोई भी दिक्कत नहीं होती है।

क्या सीवीएस के रिस्क को कम कर सकते हैं?

अपने डॉक्टर या आनुवांशिक सलाहकार से पूछें की कौन सा डॉक्टर आसपास इस टेस्ट को काफी सालों से कर रहा है, और किसके यहाँ गर्भपात का सबसे कम खतरा है, आपके डॉक्टर आपको सही में अच्छी सलाह दे पाएंगे। आपको ये भी देखना है की एक रजिस्टर्ड आदमी ही आपका टेस्ट ले रहा हो, जो सभी दिशानिर्देश को फॉलो करे। इसका मतलब है की डॉक्टर पहली ही बार में सही मात्रा में ऊतक निकाल ले, और उसे बार-बार सैंपल निकालने की ज़रूरत ना पड़े।

एम्निओसेंटीसिस करवाने से पहले क्या मैं आनुवांशिक जानकार से मिलकर पुष्टि कर सकती हूँ की मुझे इस टेस्ट को करवाना है या नहीं?

हाँ, बल्कि कई सेंटर आपको ऐसे जानकार से मिलने के लिए कहेंगे ताकि आपको पता लग सके की इस टेस्ट में क्या रिस्क होते हैं। ये सलाहकार आपके परिवार के इतिहास को पूछेगा और आपके प्रेगनेंसी के बारे में भी सवाल करेगा।

आपके जवाब सुनकर ही सलाहकार आपको बता पाएगा की बच्चे को क्रोमोसोम से जुड़ी या आनुवांशिक विकारता में क्या होता है। फिर आप डिसाइड कर सकती हैं की आपको सीवीएस करवाना है या एमनिओ, या आपको कोई टेस्ट लेना ही नहीं है।

कैसे पता चले की मेरे लिए क्या सही है?

एसीओजी के अनुसार सभी पहली और दूसरी तिमाही में चल रही महिलाओं का स्क्रीनिंग टेस्ट होना चाहिए। आपके डॉक्टर या आनुवांशिक सलाहकार आपको बताएँगे की क्या फायदे और नुकसान होते हैं। पर अंत में आपको ही निर्णय लेना है की टेस्ट आप लेंगी या नहीं।

कई महिलाएं कोई भी स्क्रीनिंग टेस्ट को उनके कुछ टेस्ट के आधार पर लेने का निर्णय लेती हैं। कुछ महिलाएं बिना कुछ सोचे ही टेस्ट करवाती हैं(उन्हें शायद पता होता है की उन्हें क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता है, और ये विकारता शुरुआती टेस्ट में शायद ना पकड़ी जाए- या शायद उन्हें अपने बच्चे के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना हो। कुछ महिलाओं को बच्चे की दिक्कत को पता करने के लिए गर्भपात का खतरा मोल लेना भी ज़्यादा बड़ा नहीं लगता। कुछ महिलाएं कोई स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं करवाती।

अगर आप स्क्रीनिंग टेस्ट करवाती हैं तो आप अपने डॉक्टर से बात करके डिसाइड कर सकती हैं की आपकी प्रेगनेंसी में ज़्यादा बड़ा रिस्क दिखता है, और आपको सीवीएस कारवाना है या एमनिओ, पता करने के लिए दिक्कत है भी या नहीं।

कुछ महिलाएं पहले ही टेस्ट करवाती हैं, और अगर कुछ भी होने पर वो अपनी प्रेगनेंसी को कभी खत्म नहीं करती। उनके अनुसार अगर उनके बच्चे को कोई विकारता हुई तो इससे उनके जीवन में संघर्ष काफी बढ़ेंगे और वो काफी कुछ सीख पाएंगे।

कुछ ऐसी कंडिशन हैं जिन्हें बच्चे के पेट में रहते ही सही किया जा सकता है। इसलिए अगर आपको थोड़ा भी शक हो रहा हो की आपके बच्चे को कोई दुर्लभ समस्या है तो आप एमनिओ से इसका पता कर सकती हैं।

दूसरी तरफ कुछ महिलाएं वो कोई भी प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहती जिससे उनके गर्भपात का रिस्क बढ़ सकता हो, खासकर तब जब उनको परिणाम से कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो। इसलिए वो ऐसे कोई भी टेस्ट नहीं करवाते हैं।

एक पर्फेक्ट निर्णय कुछ नहीं है। अलग-अलग लोग अपने हिसाब से निर्णय लेते हैं, कुछ के अनुसार रिस्क लिया जा सकता है, तो कुछ के अनुसार परिणाम कुछ भी हो, पर उन्हें टेस्ट से बचना ही है।

मैं सीवीएस और एमनिओ में कौन सा टेस्ट चुनूँ?

दोनों ही टेस्ट से पता चलता है की आपके बच्चे को कोई निश्चित क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता या आनुवांशिक विकारता है या नहीं।

सीवीएस को प्रेगनेंसी की शुरुआत में किया जाता है, आमतौर पर 10-13 हफ्ते के बीच में, आप अपने बच्चे की कंडिशन के बारे में जल्द जान सकती हैं। अगर सब ठीक है तो आपको काफी पहले ही आराम मिल जाएगा। और वहीं अगर कोई बड़ी दिक्कत है और आप प्रेगनेंसी को खत्म करने का निर्णय लेती हैं तो आप ये सब कर सकती हैं, क्योंकि आप अपनी पहली तिमाही में हैं।

दूसरी तरफ अगर आप बाद में कोई टेस्ट करवाना चाहती हैं तो आपको एम्निओसेंटीसिस के लिए ही जाना पड़ेगा। और भी चीजों से आपके निर्णय पर असर पड़ सकता है। अगर आपके बच्चे को जन्म से जुड़े विकार होने का खतरा कुछ ज़्यादा ही है तो आपको एमनिओ ही करवाना पड़ेगा क्योंकि सीवीएस से आपको इन विकारों का पता नहीं चलेगा।

सीवीएस से माना जाता है की गर्भपात का खतरा ज़्यादा रहता है, लेकिन कुछ स्टडी में पता चला की ऐसा कुछ नहीं है। ये सब इस पर निर्भर करता है की आपका टेस्ट कौन सा डॉक्टर कितने साल के अनुभव के साथ कर रहा है।

कोई भी निर्णय लेने से पहले आपको ये बातें अपने पार्टनर के साथ चर्चा में लानी होंगी, साथ ही आपको डॉक्टर या आनुवांशिक सलाहकार से भी बात करनी होगी।

सीवीएस में होता क्या है?

सीवीएस लेने से पहले आपको अल्ट्रासाउंड लेना होगा इस बात की पुष्टि करने के लिए की आपका गर्भ कितने हफ्तों का है व देखने के लिए इस समय सही सैंपल निकाला जा सकता है या नहीं। कुछ सेंटर ये सब करते हैं जब आप सीवीएस के लिए आती हैं बल्कि कुछ पहले ही कर लेते हैं। आपकी थैली इस समय भरी होनी चाहिए देखने के लिए अल्ट्रासाउंड में सब दिखे।

सीवीएस का उद्देश्य है आपकी गर्भनाल से एक छोटा से ऊतक निकालना, इस ऊतक को लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। डॉक्टर आपकी गर्भाशय ग्रीवा या पेट से सैंपल लेते हैं, ये इस बात पर निर्भर करता है की कहाँ से वो जल्दी गर्भनाल तक पहुँच सकते हैं। एक सहायक उन्हें इस काम में अल्ट्रासाउंड से मदद करता है।

अगर डॉक्टर आपकी गर्भाशय ग्रीवा से जाने का निर्णय लेते हैं, तो आपकी योनि और आपकी गर्भाशय ग्रीवा को पहले एंटीसेप्टिक से साफ किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कोई भी बैक्टीरिया आपके गर्भाशय में न घुस पाए, ये बैक्टीरिया आपको इन्फ़ैकशन दे सकते हैं। डॉक्टर गर्भाशय ग्रीवा से एक केथेटर घुसाता है, और इसी से चूसकर सैंपल निकाल लेता है।

अगर सीवीएस पेट हो रहा होता है तो आपको वहाँ सुन्न करने की दवाई दी जाती है। फिर वहाँ डॉक्टर एक सुईं घुसाता है, और सैंपल लेता है। चाहे ऊतक पेट से होते हुए लिए जाएँ या गर्भाशय ग्रीवा से होते हुए, पर इससे एम्निओटिक थैली पर असर नहीं पड़ना चाहिए। टेस्ट होने के बाद डॉक्टर आपके बच्चे की धड़कन चैक करता है ऐसा वो बाहर मॉनिटर में देखकर पुष्टि करता है।

ये प्रक्रिया आपको थोड़ा कष्ट दे सकती है पर ये जल्दी से खत्म हो जाती है। इसमें 30-45 में शुरुआत से अंत हो जाता है। जिन महिलाओं ने सीवीएस लिया है वो कहती हैं इसमें थोड़ा मरोड़े जैसा अहसास ही होता है। पेट से की गई प्रक्रिया में दर्द होता है ये सभी महिलाओं ने बताया है।

नोट: अगर आपका खून Rh-नेगेटिव है तो आपको सीवीएस के बाद Rh प्रतिरोधी ग्लोबुलिन दिया जाएगा, हाँ अगर पिता भी Rh-नेगेटिव हुआ तो ऐसा नहीं होगा।

इस प्रक्रिया के बाद होता क्या है?

आपको इसके बाद पूरे दिन आराम लेना होगा, इसलिए आपको घर जाने के लिए किसी की मदद भी लेनी होगी। आप इस समय ज़्यादा हिलने-ढुलने वाली गतिविधि या सेक्स करने से कम से कम एक हफ्ते तक बचें। इस समय आप जहाज़ में उड़ सकती हैं, लेकिन अच्छा होगा की आप घर के पास ही रहें क्योंकि किसी दिक्कत में आप डॉक्टर से मिल सकती हैं।

आपको दिन में थोड़े से मरोड़े भी लग सकते हैं। अगर आपको कुछ ज़्यादा ही मरोड़े या योनि से खून निकल रहा हो, या आपसे एम्निओटिक द्रव निकल रहा हो तो अपने डॉक्टर को तुरंत फोन करें। हो सकता है की समस्या कुछ बड़ी हो, और आपका गर्भपात होने वाला हो, या हो चुका हो। अगर आपको बुखार या इन्फ़ैकशन हो तो अपने डॉक्टर को फोन करें।

मुझे परिणाम कब मिलेंगे?

क्रोमोसोम विश्लेषण की रिज़ल्ट आपको सात दिनों में मिलने चाहिए। इस दौरान विशेषज्ञ ऊतक से कोशिका निकालते हैं, और इसे एक या दो हफ्ते के पुनः उत्पन्न करते हैं। फिर वो कोशिका की जनच क्रोमोसोम से जुड़ी विकारता के लिए करते हैं। आप इस समय बच्चे का लिंग भी पता लगा साक्ते हैं। आनुवांशिक विकार के का पता लगाने में दो या चार हफ्ते लगते हैं। कुछ प्रयोगशाला थोड़ी सी जानकारी दो ही दिन में दे देती हैं। लेकिन इसके लिए वो आपसे थोड़े ज़्यादा पैसे ले साक्ते हैं।

क्या होता है अगर पता चले की बच्चे में कोई दिक्कत है?

आपको आनुवांशिकता से जुड़ी जानकारी और सलाह दी जाएगी, और इससे आपको अपने विकल्पों पर भी काम करने का मौका मिलेगा। कुछ महिलाएं अपनी प्रेगनेंसी को खत्म करने का निर्णय लेती हैं तो कुछ अपने बच्चे को पैदा करने का निर्णय लेती हैं।

आप चाहे कोई भी रास्ता चुनें, पर आपको आगे भी सलाह की ज़रूरत पड़ती रहेगी। कुछ महिलाओं को सपोर्ट ग्रुप काफी अच्छा लगता है, कुछ अकेले ही सलाह लेना पसंद करती हैं, वहीं कुछ महिलाएं दोनों ही चीज़ें लेना पसंद करती हैं। अपने डॉक्टर या सलाहकार को ये बताना ना भूलें की आपको कब तक मदद चाहिए।