प्रेगनेंसी में प्रसव से पूर्व के टेस्ट

Antenatal tests during pregnancy

जब आप प्रेगनेंट होती हैं तो प्रसव पूर्व टेस्ट से आपको पता चलता है की आपका और बच्चे का स्वास्थ कैसा है। इससे पता चलता है की बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं जो उसपर असर डाल सकती है, जैसे जन्म से जुड़ी दिक्कत। इन टेस्ट से पता चलता है की बच्चे के लिए क्या करना सबसे उचित है।

ये टेस्ट काफी मददगार होते हैं, लेकिन ये जानना भी ज़रूरी है की इन टेस्ट के रिज़ल्ट का मतलब क्या है। यदि किसी टेस्ट का रिज़ल्ट पॉज़िटिव आया तो इसका हमेशा ये मतलब नहीं है की बच्चा जन्म के समय किसी विकारता के साथ पैदा होगा। आप किसी भी टेस्ट को लेकर अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं, वो आपको बता पाएंगे की किसी भी टेस्ट का क्या मतलब है।

डॉक्टर सभी प्रेगनेंट महिलाओं को ये प्रसव पूर्व के टेस्ट लेने के लिए कहते हैं। बस कुछ ही महिलाओं को अन्य टेस्ट लेने के लिए कहा जाता है।

नियमित प्रसव टेस्ट

आपकी पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुसार आपके कई टेस्ट हो सकते हैं। कुछ से आपकी सेहत पता चलता है तो किसी से पता चलता है की आपका बच्चा कैसा है।

आपकी पूरी प्रेगनेंसी में ये टेस्ट होंगे, और इससे सुनिश्चित किया जाएगा की आपका बच्चा स्वस्थ है या नहीं। किसी खास बीमारी की जांच के लिए आपके डॉक्टर आपके पेशाब और खून की जांच कर सकते हैं, जैसे:

एचआईवी या अन्य सेक्स से जुड़ी समस्या

एनीमिया

डायब्टीस

हेपेटाइटस बी

प्रीक्लेमसिया, या ब्लड प्रैशर से जुड़ी समस्या

आपके डॉक्टर आपके खून के प्रकार की जांच भी करेंगे, इससे वो देखेंगे की आपकी खून की कोशिका में Rh फ़ैक्टर नाम का प्रोटीन है की नहीं। आपको निम्न टेस्ट से गुजरना पड़ सकता है:

पैप स्मीयर(धब्बा)

ग्रुप बी टेस्ट। आपके डॉक्टर आपकी योनी की त्वचा पर पट्टी लपेटकर किसी बैक्टीरिया की जांच करेंगे। ऐसा प्रेगनेंसी की आखरी स्टेज में होता है।

अल्ट्रासाउंड से आपके बच्चे की तस्वीर और आपके अंगों की तस्वीर ली जाती है। अगर आपकी प्रेगनेंसी ठीक है तो आपको ये टेस्ट दुबारा लेना पड़ता है, पहला शुरुआत में और दूसरा 18-20वें हफ्ते के बीच, ये देखने के लिए की बच्चे का विकास कैसे हो रहा है।

प्रसव पूर्व का आनुवांशिक टेस्ट

डॉक्टर प्रसव पूर्व के टेस्ट से डॉक्टर पता लगाते हैं की बच्चे में कोई आनुवांशिक विकार तो नहीं हैं, या उसमें जन्म से जुड़े कोई विकार तो नहीं है। ज़रूरी नहीं है की आप ये टेस्ट लें पर आपके डॉक्टर आपको इन टेस्ट को लेने की सलाह दे सकते हैं, ताकि बच्चे के अच्छे स्वास्थ की पुष्टि हो सके।

इन टेस्ट का उन महिलाओं के लिए और भी अहम हो जाते हैं जिनके जन्म में कोई विकार होने की संभावना रहती है। आपका ये टेस्ट होगा अगर:

आप 35 साल से ऊपर हैं

अगर आपका पहला बच्चा समय से पूर्व पैदा हुआ हो या उसमे कोई जन्म से जुड़ी विकारता रही हो

यदि आपमें कोई आनुवांशिक विकार रहे हों, या आपके परिवार में कोई विकार रहे हों

यदि आपको मेडिकल कंडिशन जैसे डायब्टीस, उच्च रक्त चाप, विकार रहे हों।

यदि पहले आपका कोई गर्भपात हुआ हो या आपका बच्चा मृत पैदा हुआ हो

यदि आपको गर्भावस्था की डायब्टीस रही हो या प्रीक्लेम्सिया रहा हो

कुछ प्रसव पूर्व के आनुवांशिक टेस्ट स्क्रीनिंग टेस्ट होते हैं। आपको इस टेस्ट के बाद बताया जाएगा की आपको बच्चे को कोई विकार हो सकता है, लेकिन आपको ये कोई पक्का नहीं बता पाएगा की आपके बच्चे को विकार कौन सा होगा। कुछ और टेस्ट आपके सामने तस्वीर को ज़्यादा साफ कर सकते हैं। अगर आपकी स्क्रीनिंग में रिज़ल्ट पॉज़िटिव आता है तो आपके और भी टेस्ट हो सकते हैं।

आपके डॉक्टर आपकी और आपके बच्चे के जींस की टेस्ट कर सकते हैं देखने के लिए की आपके बच्चे को कौनसा विकार हो सकता है, जैसे सिस्टिक फिब्रोसिस आदि। अगर आप दोनों में ये जीन आपके डीएनए में है तो ये आपके बच्चे को हो सकता है। इसलिए आपके लिए ये टेस्ट काफी अहम है।

आपके डॉक्टर आपके एक या दो से ज़्यादा टेस्ट करवा सकते हैं, देखने के लिए की उसे कोई आनुवांशिक विकार ना हो, जैसे:

अल्ट्रासाउंड: आपका ये टेस्ट प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही हो जाएगा, देखने के लिए की सब कुछ ठीक है या नहीं। लेकिन अगर आपकी प्रेगनेंसी में कोई रिस्क है तो आपका ये टेस्ट एक से ज़्यादा बार होगा। 11-14 हफ्ते के बीच डॉक्टर इस टेस्ट को करवा सकते हैं देखने के लिए बच्चे के गर्दन के पीछे का हिस्सा सही है या नहीं। अगर ज़्यादा मुड़ी हुई या मोटी त्वचा है तो आपके बच्चे के डाउन सिंड्रोम के साथ पैदा होने के चान्स कुछ ज़्यादा ही होंगे। आपके डॉक्टर इस समय आपके खून के सैंपल को ले सकते हैं।

संघटित टेस्ट: इस टेस्ट में दो चरण होते हैं। पहले भाग में डॉक्टर आपके बच्चे के गर्दन के पीछे का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, वहीं दूसरी ओर आपका 11-14 हफ्ते के बीच ब्लड टेस्ट भी होता है। उसके बाद वो आपके खून का सैंपल 16-18 हफ्ते के बीच लेंगे। इस रिज़ल्ट से पता चलता है की आपके बच्चे को डाउन सिंड्रोम और स्पाइना बिफ़िडिया या दिमाग से जुड़े विकार होने के कितने चान्स हैं।

सीक्वेंशन स्क्रीन: ये भी संघटित टेस्ट की तरह है, लेकिन इसमें आपके डॉक्टर आपके 11-14 हफ्ते के बाद रिज़ल्ट को देखते हैं, और इसकी जांच करते हैं। ये बड़े टेस्ट जितना सटीक नहीं है, लेकिन इससे आपके बच्चे में शुरुआती जो रिस्क होते हैं उसका पता चलता है। अगर टेस्ट में पता चलता है की कोई दिक्कत हो सकती है तो आपके डॉक्टर समस्या की सटीकता का पता लगाने के लिए आपके और टेस्ट भी लिख सकते हैं। अगर किसी रिस्क के बारे में पता नहीं चलता है तो आपका दूसरा ब्लड टेस्ट 16-18वें हफ्ते के बीच होगा।

तिहरा या चौगुना स्क्रीनिंग टेस्ट: डॉक्टर आपके खून को हार्मोन्स और प्रोटीन के लिए चैक करेंगे, जो आपके बच्चे या आपकी गर्भनाल से आता है। इस टेस्ट में तीन या चार पदार्थ की जांच हो सकती है। अगर ये टेस्ट पॉज़िटिव आया तो आपके बच्चे को जन्म से जुड़े विकार होने की संभावना काफी ज़्यादा हो सकती है। ये टेस्ट आमतौर पर दूसरी तिमाही के 15-20वें हफ्ते के बीच होता है।

कोशिका मुक्त भ्रूण डीएनए टेस्ट: डॉक्टर इस टेस्ट से बच्चे के डीएनए को आपके खून में ढूंढते हैं और इससे डाउन सिंड्रोम और दो अन्य आनुवांशिक विकारों का पता चलता है एक ट्रिसोमी 18 और दूसरा ट्रिसोमी 13 है। आप इस टेस्ट को अपनी प्रेगनेंसी के 10वें हफ्ते बाद करवा सकते हैं। डॉक्टर सभी महिलाओं को ये टेस्ट नहीं करने को कहते हैं, बस उन्हीं महिलाओं को ये टेस्ट लेने को कहा जाता है जिनकी प्रेगनेंसी में रिस्क थोड़ा ज़्यादा होता है। वैसे ये टेस्ट हर जगह उपलब्ध भी नहीं होता, और कई स्वास्थ इन्सोरेंस में ये आता भी नहीं। आप डॉक्टर से पूछ सकती हैं की आपको इस टेस्ट को ज़रूरत है या नहीं।

अन्य टेस्ट

अगर आपके टेस्ट में पॉज़िटिव रिज़ल्ट आता है, तो आपके डॉक्टर अन्य टेस्ट करके आपकी सही समस्या का पता लगा सकते हैं।

एम्निओसेंटीसिस: डॉक्टर इसमें एक छोटी सी सुईं आपके पेट में डालते हैं और बच्चे के चारों और ढके हुए द्रव को लेते हैं, इससे आनुवांशिक विकार और अन्य जन्म से जुड़े विकारों का पता चलता है। इस प्रक्रिया में थोड़ा रिस्क होता है। इस टेस्ट को लेने वाली 300-500 महिलाओं में से एक को गर्भपात होता हुआ देखा गया है। आपके डॉक्टर आपको बता पाएंगे की आपको इस टेस्ट की ज़रूरत है या नहीं।

कोरिओनिक विलस सैंपलिंग(सीवीएस): डॉक्टर इसमें आपके पेट या आपकी योनि से आपकी गर्भनाल का एक छोटा सा हिस्सा लेते हैं। इस टेस्ट में भी डाउन सिंड्रोम और अन्य आनुवांशिक विकार का पता चलता है। जिन महिलाओं को ज़्यादा रिस्क वाली प्रेगनेंसी होती है केवल उन्हें इस टेस्ट को लेने को कहा जाता है, वो भी तक जब पहले के किसी टेस्ट में जन्म से जुड़े विकार का पता चलता है। इस टेस्ट से पता चलता है की आपको सही में कोई दिक्कत है या नहीं, लेकिन इसमें गर्भपात का खतरा भी होता है, जैसे एम्निओसेंटीसिस में होता है। अपने डॉक्टर से बात करें की क्या आपको इस टेस्ट की ज़रूरत है भी या नहीं।

परिणाम पाने के बाद मैं क्या करूँ?

आप प्रसव पूर्व हुए इन टेस्ट की मदद से अपने स्वास्थ से जुड़े कोई भी बड़े निर्णय ले सकती हैं। लेकिन आपको ये भी जानना ज़रूरी है की ये सभी टेस्ट आपको किसी भी दिक्कत के होने की संभावना को बताते हैं, कोई भी आपको पक्के तौर पर कुछ नहीं पता सकता। कोई भी टेस्ट 100% सटीक नहीं होता।

अपने डॉक्टर से सभी टेस्ट के रिज़ल्ट के बारे में बात करें, और पूछें की सब टेस्ट के परिणाम के क्या अलग मतलब हैं। आनुवांशिक मामले के सलाहकार आपको पता सकते हैं की आपको किसी भी रिज़ल्ट के पॉज़िटिव आने पर क्या करना है। वो आपको ये भी बताएँगे की बच्चे को क्या विकार हो सकते हैं।

डॉक्टर से ये सवाल पूछें

अगर आपके डॉक्टर आपको प्रसव पूर्व के टेस्ट लेने को कहें तो उनसें पूछें:

मुझे इस टेस्ट की ज़रूरत क्यों है?

परिणाम से मुझे क्या पता चलेगा, और क्या नहीं?

टेस्ट ना लूँ तो क्या हो सकता है?

परिणाम के साथ मैं क्या कर सकती हूँ?

टेस्ट कितने सटीक होते हैं?

इसमें क्या रिस्क होते हैं?

रिज़ल्ट पाने में कितना समय लगता है?

इस समय कैसा महसूस होता है?

इनका खर्चा कितना होता है?

क्या मेरे इन्सोरेंस में इसका खर्चा मिल जाएगा?

क्या किसी और खासकर मेरी इन्सोरेंस कंपनी को भी परिणाम का पता चलेगा?

रिज़ल्ट से मेरे परिवार के बारे में क्या पता चलेगा?

मैं टेस्ट करवाऊँ कहाँ से?

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