पहली तिमाही में रूटीन ब्लड टेस्ट

पहली तिमाही में कौन से ब्लड टेस्ट किए जाते हैं?

आपकी प्रेगनेंसी की देखभाल में रूटीन ब्लड टेस्ट काफी अहम भूमिका निभाते हैं। ब्लड टेस्ट का पहला सेट तब किया जाता है जब आपकी प्रेगनेंसी की पुष्टि होती है। डॉक्टर आपको नीचे बताए गए कुछ या सब टेस्ट करने के सलाह दे सकते हैं साथ ही कुछ अन्य टेस्ट लिख सकते हैं। टेस्ट से आपके ब्लड ग्रुप का पता चलता है, और ये भी जानकारी होती है की आपको कोई इन्फ़ैकशन या बीमारी तो नहीं है, या भ्रूण में कोई विकार तो नहीं है।

सभी ब्लड टेस्ट आपको ऑप्शन के रूप में लिखे जाते हैं। आपके डॉक्टर बताएँगे की किस वजह से कोई खास टेस्ट किया जाता है, और फिर आप डिसाइड कर सकते हैं की आपको कोई टेस्ट करवाना है या नहीं। ऐसा कहा जाता है की डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी टेस्ट आपको करवाने चाहिए।

ब्लड टेस्ट के बारे में चिंतित होना काफी नॉर्मल है, हालांकि आपको पता होना चाहिए की ये टेस्ट डॉक्टर को कुछ खास जानकारी देते हैं, इससे डॉक्टर अंदाज़ा लगाते हैं की आपकी प्रेगनेंसी में क्या दिक्कत हो सकती है। पहली बार डॉक्टर से मिलने पर ये टेस्ट लिखे जाते हैं।

ब्लड ग्रुप

डॉक्टर को आपके ब्लड ग्रुप की जानकारी होनी चाहिए, हो सकता है की आपको प्रेगनेंसी या जन्म देते समय खून की ज़रूरत पड़ जाए। O ब्लड ग्रुप को यूनिवर्सल डोनर माना जाता है, मतलब ये किसी को भी मिल सकता है, लेकिन AB ब्लड ग्रुप कोई भी खून ले सकता है।

रेसूस फ़ैक्टर

ये काफी अहम टेस्ट है, क्योंकि डॉक्टर को जानना होता है की आपका रेसूस पॉज़िटिव है या नेगेटिवे। अगर आपका रेसूस पॉज़िटिव है तो आपके खून की कोशिका के आधार में निश्चित प्रोटीन है।

अगर आपका रेसूस नेगेटिवे और आपके पति का पॉज़िटिव है तो आपके बच्चे के रेसूस पॉज़िटिव होने के ज़्यादा आसार हैं। अगर आपका प्रतिरक्षा तंत्र आपके बच्चे की लाल खून की कोशिका पर अटैक कर रही हैं तो 28वें हफ्ते इससे बचने के लिए इम्युनोग्लोबुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं।

हीमोग्लोबिन(Hb) लेवल

एक साधारण ब्लड टेस्ट से पता लगाया जाता है की आपका Hb 12.0-15.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर है या नहीं। हीमोग्लोबिन का लेवल की कमी का मतलब है की आपमें आइरन की कमी है। लाल खून कोशिका में ऑक्सिजन पहुंचाने और हीमोग्लोबिन बनाने के लिए हमें आइरन की ज़रूरत पड़ती है।

अगर आपमें आइरन की कमी है तो आपके डॉक्टर आपको आइरन वाला खाना या सप्लिमेंट लेने की सलाह देंगे। हीमोग्लोबिन लेवल को देखने के लिए प्रेगनेंसी में रूटीन चैकअप किए जाते हैं।

हेपेटाइटिस बी

ब्लड टेस्ट से ही पता चलता है की आपमें हेपेटाइटिस बी का वाइरस है या नहीं। अगर आप प्रेगनेंसी में ये वाइरस अपने बच्चे को देती हैं, या जन्म के बाद देती हैं तो आपकी रक्षा टीकाकरण और एंटीबोडीज़ से की जाती है। एक साल की उम्र में ये देखने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है की बच्चे में हेपटाइटिस बी है या नहीं।

सिफलिसिस

सिफ़लिसिस एक दुर्लभ सैक्स द्वारा होने वाली बीमारी है। हालांकि अगर ये आपको है और इसका इलाज़ नहीं हुआ तो इससे बच्चे में विकार आ सकते हैं। इससे बच्चा मृत भी पैदा हो सकता है।

इस बीमारी के लिए VDRL टेस्ट किया जाता है और इससे बीमारी का काफी स्टीक तरीके से पता चलता है।

HIV/AIDS

इस दौरान HIV और AIDS का पता करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। अगर रिज़ल्ट पॉज़िटिव रहता है तो बच्चे तक ये इन्फ़ैकशन ना पहुंचे इसके लिए कदम उठाए जाते हैं।

पहली तिमाही में अन्य ब्लड टेस्ट भी किए जाते हैं?

हाँ कुछ और बीमारी के लिए नीचे दिए गए टेस्ट किए जा सकते हैं

  • थाइरोइड स्क्रीनिंग
  • खसरा
  • कम्बाइन्ड स्क्रीनिंग टेस्ट
  • CMV
  • हेपटाइटिस सी
  • हर्पीज़ सिप्लेक्स वाइरस
  • थैलेसीमिया और सिकल सैल रोग
  • टोक्सोप्लाज़मोसिज़
  • विटामिन डी की जांच