तीसरे ट्राइमेस्टर में प्रसव पूर्व डॉक्टर से मिलना  

Prenatal visit

आपको तीसरे ट्राइमेस्टर में 28वें हफ्ते से लेकर 36वें हफ्ते के बीच मे चेक अप के लिए हर दो हफ्ते में विजिट करना शुरू कर देना चाहिए। उसके बाद डिलीवरी तक हफ्ते में एक बार विजिट करना शुरू कर देना चाहिए।

जैसे जैसे आपके और आपके डॉक्टर के बीच जान पहचान बढ़ती जाएगी और डिलीवरी डेट नजदीक आते-आते ज्यादा फिजिकल एग्जाम, लेट प्रेगनेंसी टेस्ट और आने वाले बच्चे की डिलीवरी पर लेकर बात की जाती है। ये रही अपॉइंटमेंट के समय बात करने लायक कुछ चीज़ें।

प्रीनेटल यानी प्रसव पूर्व विसिट के समय क्या उम्मीद रखनी चाहिए?

आपका पहला प्रीनेटल विजिट

दूसरे ट्राइमेस्टर विजिट

बताइये आपको कैसा लग रहा है

आपका डॉक्टर ये पूछकर शुरुआत करेगा की आप कैसा महसूस कर रहे हैं? इसके बाद आपके पिछली विजिट के बाद जुड़ी समस्याओं के नतीजों पर बात करते हैं। इसके बाद आपसे पूछा जाता है कि कोई दर्द है या नहीं।

इससे आपका डॉक्टर आपके व्ययहार और मानसिक तनाव को अच्छे से समझ पाएंगे। इसके बारे में आपके डॉक्टर को सब चीज़ साफ-साफ बताएं।

बच्चे के हलचल से जुड़े सवाल

आपके डॉक्टर आपसे आपके बच्चे द्वारा की जा रही हलचल से जुड़े सवाल करेंगे और अगर ये हरकत न हो तो तुंरन्त डॉक्टर को इसके बारे में बताएं। फिर वो आपको इससे जुड़ी और जानकरी दे देंगे।

 फिजिकल एग्जाम

दूसरे ट्राइमेस्टर में आपका वजन और ब्लड नापा जाएगा। इसके साथ साथ दूसरी बीमारियों के जांच के लिए आप यूरिन टेस्ट भी किया जाएगा। इसके साथ साथ आपके हाथों और घटनों की भी जांच की जाएगी।

आपका डॉक्टर बच्चे के दिल की धड़कन जानने की कोशिश करेंगे और आपके पेट के साइज से बच्चे के साइज़ का अनुमान लगाएंगे। इसके अलावा वो दूसरी जांच भी करेंगे जिससे वो बच्चे के साइज की का अनुमान लगा सकें। इसके बाद आपका अल्ट्रासाउंड भी किया जाएगा।

इसके बाद आपका डॉक्टर ये बता सकता है कि आपका बच्चा सिर के बल है या फिर उल्टा है। 36 हफ्तों के बाद जब उन्हें लगे कि बच्चा उल्टी दिशा में है तो वो जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड भी करवा सकते हैं। अगर ये सच हुआ तो आपके सामने एक्सटर्नल सफलिक करने की पेशकश की जा सकती है।

आपके तीसरे ट्राइमेस्टर के समय प्रीनेटल विजिट में आपका पेल्विक एग्जाम नहीं होगा। अगर इसकी जरूरत न हो तो ज्यादातर डॉक्टर्स इसे नहीं करते। लेकिन अगर समय निकल चुका है तो डॉक्टर आपके सर्विक्स की जांच ज़रूर करेगा। इससे उसे मालूम होगा कहीं वो नरम तो नहीं पड़ा या खुलने के लिए तैयार तो नहीं। इसकी मदद से लेबर से जुड़ी कई चीजें मालूम होंगी।

इससे ये भी पता चलेगा कि क्या आपका बच्चा दुनिया मे आने के लिए तैयार है। अगर उसका सिर काफी नीचे है तो कई समस्याएं हो सकती है। आपके योनि की जांच से ये सब मालूम हो जाएगा। अगर आपका डॉक्टर अक्सर इसकी जांच नहीं करती और अगर समय नज़दीक आ रही है तो आप इस जांच की मांग कर सकते हैं।

अगर आप Rh-नेगेटिव हैं और आपको नहीं पता की बच्चे के पिता कौन है तो आपके खून की जांच से पता लगाया जाएगा की आपके बच्चे में कितना Rh-पॉज़िटिव खून है। Rh प्रतिरोधक का इंजेक्शन 28वें हफ्ते देने से आपका शरीर प्रेगनेंसी के आखरी हिस्से में एंटीबॉडी नहीं बनाता है।

ग्रुप बी के लिए टेस्ट

35-37 हफ्ते के बीच आपके डॉक्टर देखेंगे की आपकी योनी और आंत में कोई इन्फ़ैकशन या नहीं, इसे ही ग्रुप बी स्ट्रेप कहते हैं। अगर आपका टेस्ट पॉज़िटिव आया तो आपको प्रसव के दौरान एंटीबाओटिक्स दी जाएंगी ताकि आप इस इन्फ़ैकशन को अपने बच्चे को ना पहुंचा दें।

अन्य टेस्ट के बारे में चर्चा कर लें

ग्लूकोज़ टेस्ट में यदि आपके खून ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ा हुआ था और आपने अभी तक ग्लूकोज़ टोलरेंस टेस्ट नहीं लिया है तो इस तिमाही में आपका ये टेस्ट होगा।

एनीमिया की वजह से आपके खून की फिर से जांच हो सकती है।

अगर आपको सेक्स से फैलने वाली बीमारी होने का खतरा है तो आपकी जांच एचआईवी सिपहिल्स के लिए हो सकती है।

अगर आपकी पता चला है की आपकी गर्भनाल नीचे की ओर थी, तो इस तिमाही की शुरुआत में आपका एक और अल्ट्रासाउंड होगा, जिससे पता चलेगा की अब आपकी गर्भनाल कहाँ है।

अगर आपकी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत है तो आपको बायोफिसिकल प्रोफ़ाइल या नॉनस्ट्रैस टेस्ट लिखे जा सकते हैं, इससे इस बात की पुष्टि होती है की आपका बच्चा सही तरीके से फल-फूल रहा है या नहीं। अगर आपके डॉक्टर आपके बच्चे के विकास के लिए चिंतित हैं तो वो आपको बीच-बीच में अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देंगे।

अगर आपकी प्रेगनेंसी नॉर्मल है पर आपकी डेट निकल गई है तो आपको कुछ टेस्ट की ज़रूरत पड़ेगी, ये देखने के लिए की आपका बच्चा अब भी पेट में सही है। 40 से 41 हफ्ते में आपका टेस्ट होगा ये देखने के लिए आपके बच्चे की धड़कन की दर सही है या नहीं। ये टेस्ट हफ्ते में दो बार हो सकते हैं और इसी आधार पर आपके डॉक्टर इस बात का फैसला करते हैं की इंतज़ार करना ही सही है या अब बच्चे के पैदा होने का समय आ गया है।

41-42 हफ्ते के बाद अगर सब कुछ नॉर्मल भी दिख रहा है तो आपके डॉक्टर आपके प्रसव को प्रेरित करने के लिए आपको बाहरी मदद दे सकते हैं। इस समय के बाद बच्चे और आपके दोनों के लिए ही रिस्क रहते हैं। अगर आपकी गर्भाशय ग्रीवा परिपक्व हो चुकी है, तो आपको कृत्रिम प्रसव दिया जा सकता ह।

काली खांसी से बचने के लिए आपक्कों Tdap का इंजेक्शन लेना चाहिए। चाहे आपको ये इंजेक्शन पहले लगा हो लेकिन प्रेगनेंसी में ये इंजेक्शन लेना चाहिए।

अगर बुखार का सीजन चल रहा है तो आपके डॉक्टर आपको फ्लू शॉट देने की सलाह दे सकते हैं।

प्रेगनेंसी से जुड़ी जानकारी

अगर आपके डॉक्टर ने अभी तक आपको इस समय तक कुछ जानकारी नहीं दी है तो वो आपको जल्द इस बारे में जानकारी देंगी। वो आपको शुरुआती प्रसव, प्रीक्लेमसिया और खतरे के संकेतों के बारे में बताएँगी। यदि आपकी योनी से खून निकल रहा बच्चा कम हिल रहा है तो आपकी डॉक्टर आपको सावधान रहने की सलाह देती है। आपकी डेट पास आने साथ आपकी डॉक्टर आपके साथ प्रसव के संकेतों को डिस्कस करेगी, और वो आपको बताएँगी की कब आपको उनसे बात करनी चाहिए।

प्रसव और डिलिवरी से जुड़े जवाब

समय आ गया है की आप अपने प्रसव और डिलिवरी से जुड़े सभी जवाब पाएँ।

नीचे दिए गए सवाल आपके दिमाग में आ सकते हैं, और आप अपने डॉक्टर से ये सवाल पूछ सकती हैं:

क्या आप प्रसव के समय मेरे साथ होंगी?

क्या एक नर्स एक समय पर एक केस में होती हैं, या वो बार-बार अलग-अलग जगह जाती हैं?

आधी रात को अगर मेरी पानी की थैली टूटी या मुझे प्रसव हुआ तो क्या होगा?

इन सब सवालों के जवाब आपको जन्म पूर्व वाली क्लास में मिल सकते हैं, लेकिन अगर फिर भी आपको कोई भी शक या सवाल है तो अपने डॉक्टर से इन सबको बिना शंका किए पूछ लें।

प्रसव के बाद कैसे ध्यान रखें इस पर चर्चा करें

बच्चे को जन्म देने के बाद आप शायद कोई निर्णय सही से ना ले पाएँ, तो आपको इसी समय पूछ लेना चाहिए आप अपने बच्चे को कैसे दूध पिलाएंगी, ये भी पूछ लें की इसके बाद गर्भधारण करने से कैसा बचा जा सकता है।

अगर आपने बच्चे के जन्म के बाद उसके लिए कोई डॉक्टर नहीं ढूंढा है तो आपको इस समय ऐसा करना शुरू कर देना चाहिए।

इस समय आपके डॉक्टर देखेंगे की आपमें प्रेगनेंसी वाला अवसाद यानी डिप्रेशन है या नहीं। आप किसी के पूछने का इंतज़ार ना करें, अगर आपको अवसाद या बेचैनी लग रही है तो वो आपको ऐसे शक्स के पास भेजेंगी जो आपकी मदद कर सकता है।

डॉक्टर ये भी पूछ सकती हैं की बच्चे के जन्म के बाद घर पर उसका कौन खयाल रख सकता है, और कौन आपमें अवसाद के संकेत देख सकता है। अगर आपको लग रहा है की आपको अवसाद यानी डिप्रेशन या बेचैनी की समस्या है तो आपको तुरंत मदद लेनी चाहिए।