प्रेगनेंसी में अल्ट्रासाउंड

Trimester by trimester guide

जानिए की आपको अपनी पहली और दूसरी अल्ट्रासाउंड अपोइंटमेंट में क्या पता चलेगा, और आपको आगे कैसे बढ़ना है, व आपको अल्ट्रासाउंड की ज़रूरत ही क्यों पड़ती है।

आपको ज़्यादा टेंशन नहीं लेनी है, इस टेस्ट में कोई दर्द नहीं होता है। अल्ट्रासाउंड के दौरान डॉक्टर एक बड़ी फ्रिक्वेंसि वाले साउंड का इस्तेमाल करते हैं और इससे बच्चे की बॉडी का चित्र बन जाता है।

अल्ट्रासाउंड से आपके डॉक्टर को कई अहम जानकारी पता लगती हैं। इससे वो पता लगा पाते हैं की बच्चे का विकास कैसा हो रहा है, और कैसा होगा, इससे किसी विकारता का भी पता लग जाता है, इसमें पता चलता है की आपके पेट में एक बच्चा है या एक से ज़्यादा, इससे पता चलता है की आपके गर्भनाल की स्थिति कैसी है, और इससे बच्चे के लिंग का भी पता चलता है।

अल्ट्रासाउंड में बच्चे के ऊपर पूरी नज़र रखी जाती है। यह डोप्लर टेस्ट आखरी तिमाही में ही किया जाता है, वो भी उन्हें जिन्हें गर्भवस्था की डायब्टीस होती है। आम अल्ट्रासाउंड में साउंड की मदद से चित्र बनते हैं, वहीं इसमें अधिक फ्रिक्वेंसि वाली साउंड भेजी जाती हैं, इससे खून के संचार का पता चलता हा। इससे पता चलता है की बच्चा किस प्रकार से खून ले रहा है, और क्या ये मात्रा उसके लिए सही है या नहीं।

अल्ट्रासाउंड आपके और आपके बच्चे दोनों के लिए काफी सूरक्षित माना गया है। एक ऐसा इंसान जो इसे काफी बार इस्तेमाल कर चुका हो या जिसको किसी भी संकेत का मतलब पता हो वही इसका प्रयोग करे तो अच्छा है। कहीं-कहीं डॉक्टर कुछ लोगों को ट्रेनिंग देकर चले जाते हैं, अगर आपको ऐसे किसी भी टेकनिशियन पर भरोसा ना हो तो अपने डॉक्टर से ही अपनी रिपोर्ट लें।