जन्मजात हृदय विकार: अपने बच्चे के दिल को समझें

congenital heart defects

भारत में 20 हफ्ते या उससे छोटे भ्रूण का ही गर्भपात किया जा सकता है, यही भारत का कानून कहता है। लेकिन भारत की सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला को 26वें हफ्ते में गर्भपात करने का अधिकार दिया, इस महिला के बच्चे को दिल से जुड़ी काफी समस्या थी।

जस्टिस दीपक मिश्रा और एम खनविलकर ने कोलकाता की 33 साल की इस महिला की गर्भपात याचिका को स्वीकार किया। कई डॉक्टर रिपोर्ट के अनुसार यदि बच्चा पैदा भी हो जाता तो वो उसके जीवित रहने के चान्स कम ही थे, और बच्चे को कई प्रकार की सर्जरी भी लेनी पड़ सकती थी।

हृदय विकार क्या हैं?

बच्चे के पैदा होने से पहले कोख में उसके दिल में जो विकार होते हैं उन्हें हृदय विकार कहते हैं। इन विकार में निम्न चीज़ें शामिल हैं:

दिल में वाल्व

हृदय के अंदर की दीवार

धमनियों या नसों में दिक्कत, जो पूरी शरीर में खून ले जाती हैं

इन विकारों से खून के संचार पर असर पड़ता है। इन विकारों के भी कई प्रकार हैं। इनमें कुछ बिना की लक्षण के विकार होते हैं तो कुछ में काफी गंभीर संकेत दिखते हैं।

जन्म विकारों में दिल से जुड़े विकार काफी आम होते हैं। हर एक हज़ार में से 8 बच्चों पर इसका असर पड़ता है। इनमें से कई विकारों का सही प्रकार से उपचार संभव है। वहीं गंभीर विकारों का उपचार जन्म के बाद तुरंत होना पड़ता है।

जिन लोगों को जन्म के समय से ही ये दिक्कत होती है उन्हें पूरे जीवन में इसका विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

हृदय विकार होता क्यों है?

ऐसा ज़रूरी नहीं है की माँ की लापरवाही की वजह से ही हमेशा दिल से जुड़े विकार होते हैं। कई बार तो डॉक्टर को पता ही नहीं लग पाता की इसका कारण क्या रहा। जिन बच्चों को आनुवांशिक विकार जैसे डाउन सिंड्रोम होता है उन्हें ये समस्या ज़्यादा होती है। हालांकि जिन बच्चों को डाउन सिंड्रोम होता है उनमें से आधे बच्चों को दिल से जुड़ी समस्या होती है।

कई केस में प्रेगनेंसी में यदि माँ ने धूम्रपान किया हो तो बच्चे को दिल से जुड़ी समस्या होती हुई देखी गई है। वैज्ञानिक इस विकार के पीछे के कारणों का पता अब भी लगा रहे है।

हृदय विकारों का पता कैसे चलता है?

टेस्ट

1.एकोकार्डियोग्राफी

प्रेगनेंसी में अगर डॉक्टर को बच्चे को ये विकार होने का शक होता है तो भ्रूण एको टेस्ट हो सकता है। इस टेस्ट में साउंड वेव से बच्चे के हृदय की तस्वीर बनाई जाती है।

2.छाती का एक्स-रे

ये बिना दर्द वाला टेस्ट है इसमें छाती के ढांचे की तस्वीर बनती है, जैसे दिल और फेफड़े। इसमें बच्चे के दिल के आकार का पता चलता है और ये भी की इसमें कोई ज़्यादा द्रव तो नहीं है, या फेफड़ों सही हैं या नहीं।

3.ईकेजी

एलेक्टरोकार्डियोग्राम भी एक दर्दरहित टेस्ट है, इसमें दिल की एलेक्ट्रिकल एक्टिविटी देखी जाती है। इसमें भी हृदय के आकार को देखा जाता है।

4.कार्डिएक केथेटेराइज़ेशन

इसमें हाथ की नस में एक केथेटर डाली जाती है, या गर्दन में ये डाली जाती है।

एक स्पेशल डाय को इस केथेटर से डाला जाता है। इसमें डॉक्टर को दिखता है की दिल में खून का संचार कैसा है।

5.पल्स ऑक्सीमेट्री

इसमें पता चलता है की खून में कितनी ऑक्सिजन है।

अभी भी कई शोध चल रहे हैं जिनसे पता चलेगा की इस विकार का असली कारण क्या है। डॉक्टर के अनुसार इस शोध को सही तरह से पूरा होने में अभी कई साल लग सकते हैं।