बहरे बच्चे को पहली बार अपनी माँ को सुनते हुए देखने से अच्छा दृश्य कोई नहीं है

क्या आपको अपने बच्चे की सुनने की क्षमता को लेकर चिंता करनी चाहिए?

चिंता नहीं, बस थोड़ा ध्यान रखने की ज़रूरत है। ज़्यादातर बच्चों के सुनने की क्षमता बिलकुल सही होती है। हज़ार में से बस 5-6 केस में ही ऐसा होता है। क्योंकि बच्चे सब चीज़ अपनी सुनने की क्षमता से सीखते हैं इसलिए जल्द ही इस समस्या का पता लगाके इसका इलाज़ करना ज़रूरी है। सुनने की समस्या से बच्चों की सीखने की क्षमता कम हो सकती है।

सुनने की समस्या का सामना करने वाले जिन बच्चों को शुरुआत में मदद नहीं मिलती उन्हे भाषा सीखने, पढ़ने, और सामाजिक समझ विकसित करने में दिक्कत होती है। यहाँ तक की जिन बच्चों को सुनने की समस्या होती है उनके बाकी बच्चों से पीछे रहने की संभावना काफी ज़्यादा होती है।

ऐसे बच्चों की मदद आमतौर पर छह महीने से पहले ही कर देनी चाहिए, वरना समस्या और गंभीर हो सकती है।

बच्चों में इस समस्या का कैसे पता लगाएँ?

आजकल ज़्यादातर हॉस्पिटल बच्चे को घर भेजने से पहले उसके सुनने का टेस्ट करते हैं। इस स्क्रीनिंग में नवजात के सुनने की समस्या से जुड़े दो टेस्ट होते हैं, जिसमें 5 से 10 मिनट लगते हैं। अगर बच्चे का हॉस्पिटल में टेस्ट नहीं हुआ है तो आप बच्चे का पहले महीने के अंदर ही डॉक्टर से टेस्ट करवाएँ।

जब बच्चा सही से नहीं सुनता है तो आमतौर पर माता-पिता या घरवाले ही उस समस्या को पकड़ पाते हैं। इसलिए ध्यान रखें की आपका बच्चा साउंड पर रिएक्ट कर रहा हो, और अगर ऐसा नहीं हो रहा तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएँ।

बच्चा कब नॉर्मल है, नीचे दिए गए दिशानिर्देश से इसका पता चलेगा:

  • बच्चा तेज़ आवाज़ सुनकर घबराने लगता है
  • दो महीने की उम्र में आपकी आवाज़ सुनकर आपका बच्चा शांत हो जाता है
  • 4 से 5 महीने की उम्र में बच्चा तेज़ आवाज़ की तरफ देखता है
  • 6 महीने की उम्र में बच्चा आवाज़ें निकालता है और बड़बड़ाता है
  • 9 महीने के आस-पास बच्चा आराम से आ रही आवाज़ की तरफ मुड़ता है
  • एक साल तक बच्चा म्यूज़िक पर प्रतिक्रिया देता है, और माँ, पापा कहना शुरू करता है

सुनने की क्षमता पर किस चीज़ असर पड़ता है?

दो प्रकार की सुनने की समस्या होती है-जन्मजात और जन्म के बाद

कुछ केस में सुनने की समस्या विरासत में मिलती है, हो सकता है की माँ-बाप बिलकुल सही हों, पर बच्चा बहरा हो सकता है। अन्य केस में बच्चे के सुनने की क्षमता पर बाहरी कारण जैसे माँ के इन्फ़ैकशन, जैसे टोक्सोप्लैसमोसिस, खसरा, और दाद से फर्क पड़ता है।

कुछ बच्चों को यह समस्या कान के सही तरीके से विकसित नहीं होने की वजह से यह समस्या होती है, समय से पहले जन्म लेना और कम वज़न भी इसकी वजह हो सकता है। किसी केस में कारण का पता नहीं चलता।

जन्म के बाद बच्चे के सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, ऐसा तब होता है जब अंदरूनी कान ट्यूमर, चोट इन्फ़ैकशन जैसे चेचक, बुखार, फ्लू और मोनोन्यूक्लिओसिस से प्रभावित होते हैं। कीमोथेरेपी लूप डाइरेटिक्स, सेलीसाईलेट्स और कुछ केस में एंटीबायोटिक जैसी दवाओं से सुनने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

अगर आपके बच्चे के कान में इन्फ़ैकशन है और मवाद बह रहा है तो आपके डॉक्टर आपको सुनने के टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर कान को साफ करने के लिए उस मवाद को हटाने की सलाह भी दे सकते हैं जो कान के पर्दे के पीछे जमा हुआ हो। सुनिश्चित करें की आपके बच्चे को सुनने की कोई समस्या ना हो।

डिस्क्लेमर: इस वीडियो के सभी राइट्स ओरिजिनल पब्लिशर के पास हैं।