Urinary tract infection यानी पेशाब के रास्ते इन्फ़ैकशन होने से आपके बच्चे का वज़न कम हो सकता है। प्रेगनेंसी में इस इन्फ़ैकशन के बारे में और जानें

urinary tract infection

आप जब पेशाब में इन्फ़ैकशन के बारे में पहली बार सुनते हैं तो आपके दिमाग में थैली का इन्फ़ैकशन आता है और इसके लक्षण हैं जैसे लगातार पेशाब जाना और पेशाब में जलन जैसे खयाल आते हैं, लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है।

यह इन्फ़ैकशन आपकी पेशाब की थैली में कहीं भी शुरू हो सकता है। यह यूरिन जहां बनता है मतलब किडनी में भी शुरू हो सकता है; फिर यह ट्यूब से होकर आपकी थैली तक आता है, जहां पेशाब इकट्ठा होकर मूत्र-पथ पर खत्म होता है।

UTI यानी पेशाब की जगह इन्फ़ैकशन एक बैक्टीरिया से होता है, ये आपकी त्वचा, योनी, और आंत से होता है जो मूत्रमार्ग से होकर ऊपर जाता है। यह इन्फ़ैकशन कई प्रकार के होते हैं:

किडनी इन्फ़ैकशन

बैक्टीरिया आपके मूत्रमार्ग से होते हुए थैली में ऊपर की ओर जाकर आपकी एक या दोनों किडनी में इन्फ़ैकशन कर सकता है। इस किडनी इन्फ़ैकशन को पायलोनेफ्राइटस भी कहते हैं, और यह प्रेगनेंसी में काफी आम है, लेकिन यह काफी सिरियस भी होता है। यह इन्फ़ैकशन आपके खून में फैल सकता है और आपके बच्चे और आपके लिए जानलेवा हो सकता है। इससे बच्चे के पहले या कम वज़न के होने का भी रिस्क रहता है, यहाँ तक की इसमें बच्चे या भ्रूण के मरने का खतरा भी रहता है।

सिसटाइटस या थैली का इन्फ़ैकशन

इसमें बैक्टीरिया थैली में ही रुक जाता है और वहीं अपनी संख्या बढ़ाता है, इससे जलन और थैली के इन्फ़ैकशन के संकेत होते हैं। सिसटाइटस सैक्स करने वाली 20-50 साल की महिलाओं में काफी कॉमन पाया जाता है।

बिना किसी लक्षण के पेशाब में बैक्टीरिया

ऐसा होना भी संभव है की आपके मूत्रमार्ग में बैक्टीरिया हो और कोई लक्षण दिखाई ही ना दें। इसको ही एसिम्टममैटिक यानी बिना किसी लक्षण के पेशाब में बैक्टीरिया होना कहते हैं। यह प्रेगनेंसी में ज़्यादा दिक्कत नहीं करता और आमतौर पर अपने आप ही चला जाता है।

हालांकि इस बैक्टीरिया का अगर इलाज़ प्रेगनेंसी में नहीं हुआ तो इससे किडनी में इन्फ़ैकशन हो सकता है और उसकी वजह से बच्चा समय से पहले या कम वज़न का हो सकता है। इसी वजह से आपको प्रेगनेंसी में नियमित तौर पर यूरिन टेस्ट करवाना चाहिए।

क्या प्रेगनेंसी में पेशाब की जगह यह इन्फ़ैकशन होने की ज़्यादा संभावना रहती है?

अभी यह साफ नहीं हुआ है की प्रेगनेंसी की वज़ह से इस इन्फ़ैकशन के फैलने का ज़्यादा रिस्क होता है या नहीं, कुछ अध्यन के अनुसार प्रेगनेंसी की वजह से आप बिना लक्षण वाले बैक्टीरिया भी नहीं आता है। हालांकि प्रेगनेंसी में किडनी इन्फ़ैकशन होने का ज़्यादा खतरा होता है।

कारण है, प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन की ज़्यादा मात्रा होने से आपके गर्भाशय का मसल टोन कम होता है(किडनी और थैली के बीच की ट्यूब), इससे आपकी मूत्रवाहिनी फैलती है, और पेशाब का बहाव कम होता है। साथ में जब गर्भाशय बढ़ता है तो इस मूत्रवाहिनी को दबा सकती है, इससे पेशाब का बहाव उतना आसानी से नहीं हो पाता जितना अच्छा वो पहले था।

आपकी थैली प्रेगनेंसी में टोन भी खोती है। इसकी वजह से पूरी थैली को खाली करना मुश्किल हो जाता है, और थैली में रीफ्लक्स यानी उतार की संभावना बढ़ जाती है(एक ऐसी स्थिति जहां कुछ यूरिन वापिस किडनी तक चला जाता है)।

फिर जितना ज़्यादा समय यूरीन यानी पेशाब को इस जगह से निकलने में समय लगता है उतना ही समय इस बैक्टीरिया को बढ़ने में लगता है। साथ ही प्रेगनेंसी में पेशाब कम एसिड वाला बन जाता है, और इसमें ग्लूकोज इकट्ठा हो सकता है और इन दोनों स्थिति में बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना ज़्यादा रहती है।

अगर एक प्रेगनेंट औरत को यह इन्फ़ैकशन हो लेकिन इसके लक्षण ना दिखें तो तब क्या होता है?

बिना लक्षण वाले इस इन्फ़ैकशन से भी पहले जन्म या बच्चे का वज़न कम होता है। और अगर इसका इलाज़ नहीं किया गया तो किडनी में इन्फ़ैकशन होने का खतरा 40 परसेंट तक होता है। हालांकि अच्छे इलाज़ से इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है, वो भी 1-4 परसेंट तक।

आपके मूत्रमार्ग में बैक्टीरिया है या नहीं इस बात का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके यूरिन का सैंपल पहली विजिट में लेंगे और लक्षण का पता लगाने के लिए वो इसे लैब में भेज देंगे। अगर यह नेगेटिव है तो आपके इस इन्फ़ैकशन से संक्रमित होने की संभावना कम है।

अगर कुछ पॉज़िटिव आता है तो आपको मुंह से खाई जाने जाने वाली सेफ एंटीबायोटिक दी जाती हैं, जो प्रेगनेंसी में सेफ है। इसका एक हफ्ते का कोर्स इस समस्या का इलाज़ कर देता है।

ट्रीटमेंट के बाद आपका फिर से टेस्ट होगा, पता लगाने के लिए की इन्फ़ैकशन पूरी तरह चला गया है या नहीं। आपको अपने यूरिन की जांच प्रेगनेंसी में बीच-बीच में करवानी चाहिए, जिससे पुष्टि होती रहे की इन्फ़ैकशन फिर से नहीं आ गया है।

इस इन्फ़ैकशन से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

काफी पानी पिएँ। दिन में 8 आउंस के 10 कप लें। आप दिनभर कुछ ना कुछ द्रव ले सकती हैं जिससे आपका पेशाब साफ रहेगा, जिससे पता चलता है की आपमें पानी की कमी नहीं है।

आंत की गतिविधि के बाद, अपने आप को आगे से पीछे साफ करें, और सुनिश्चित करें की बैक्टीरिया पेशाब की जगह के पास बैक्टीरिया ना फैले।

जब पेशाब करने का मन करे तो उसे अनसुना ना करें। कोशिश करें की आप पेशाब करते हुए अपनी थैली पूरी तरह साफ कर लें।

हल्के साबुन से अपने गुप्तांग साफ रखें।

सैक्स करने से पहले और बाद में अपने गुप्तांगों को साफ रखें।

क्रैनबेरी जूस लें। कुछ स्टडी से पता चलता है की क्रैनबेरी जूस और लिंगोनबेरी जूस से बैक्टीरिया कम होते हैं और और नया बैक्टीरिया भी नहीं पनपते हैं। क्रैनबेरी जूस लेने भर से ही आपका इन्फ़ैकशन खत्म नहीं हो जाएगा, आपको सलाह दी जाती है की आपको इस स्थिति में डॉक्टर से बात करनी चाहिए और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना चाहिए।

अपने गुप्तांगों की सफाई के लिए पाउडर या स्प्रे का इस्तेमाल ना करें। ऐसे साबुन का भी इस्तेमाल ना करें जिनसे इन अंगों में चिड़चिड़ाहट हो, और इसी वजह से वहाँ इन्फ़ैकशन भी हो सकता है।