ज़ीका क्या है? क्या यौन संबंध से ज़ीका फैलता है?

ज़ीका क्या है?

इस वाइरस का फैलाव एईडीस एजिप्टी प्रजाति के मच्छर से होता है। इसी मच्छर से डेंगू, पीला भुखार, और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारी होती है, इन बीमारियों से हर साल 100 से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है, और 1000 से ज़्यादा लोग प्रभावित होते हैं। इस वाइरस को अपना नाम यूगांडा की ज़ीका नाम की पहाड़ी से मिलता है, जहां पहली बार 1947 में इस वाइरस की खोज हुई थी। एईडीस आमतौर पर दिन में काटता है, यह या तो सुबह-सुबह या फिर शाम के समय काटता है।

गर्भवती महिलाओं पर ज़ीका का काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जैसे माइक्रोकेफली(लघुशीर्षता)-बच्चे का छोटा सर- और गर्भ में बच्चे के दिमाग पर और भी काफी प्रकार के असर पड़ सकते हैं। इन्फ़ैकशन से जूलियन-बेर की कमी भी हो सकती है, यह एक ऐसा विकार है जिसमें बच्चे की तंत्रिका पर प्रभाव पड़ता है, और उसे लकवा पड़ सकता है।

अभी तक ज़ीका वाइरस के लिए कोई भी इलाज़ या टीका नहीं बना है।

लक्षण

ज़ीका के लक्षण भी डेंगू की तरह हैं, 102 डिग्री से ज़्यादा भुखार होता है, शरीर पर लाल निशान हो जाते हैं, मासपेशियों में भयंकर दर्द होता है, और पूरे शरीर में दर्द होता है। ज़ीका के लक्षण 2-7 दिनों तक रहते हैं। जिन भी लोगों में ज़ीका के लक्षण पाए जाते हैं उनमें से केवल 20% के अंदर ये लक्षण एक हफ्ते तक रहते हैं।

क्या यौन संबंध से ज़ीका फैलता है?

हाँ, हालांकि यह वाइरस केवल मच्छरों द्वारा फैलता है, लेकिन यह यौन संबंध से भी फैल सकता है। यह वाइरस योनि और गूदे और संभावित रूप से मौखिक यौन संबंध से भी फैल सकता है।

संक्रमित प्रेगनेंसी से बचने के लिए WHO ने महिलाओं को उन पुरुषों से संबंध बनाने से बचने की सलाह दी है जो पुरुष ज़ीका प्रभावित क्षेत्र से होकर आए हैं। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित यौन संबंध बनाने चाहिए(जिसमें अच्छे कोंडोम का इस्तेमाल होना चाहिए) और हो सके तो वो गर्भावस्था के दौरान सेक्स से पूरी तरह बचें।

वाइरस से कैसे बचें?

  • एईडीस एजीप्टी साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए गमलों, बोतलों और बेकार समान में पानी जमा ना होने दें।
  • अपने घर में सुनिश्चित करें की कहीं मच्छर पनपने की जगह नहीं हो।
  • दिन के समय एतिहात बरतने की ज़रूरत है, क्योंकि एईडीस एजीप्टी दिन में काटने वाला मच्छर है।
  • अपने शरीर को हो सके तो ढककर रखें
  • मच्छर से बचने वाली चीजों जैसे क्रीम, जेल्स, मच्छर को मारने वाली कोइल्स, मच्छरदानी, और अगरबत्ती का प्रयोग करें।
  • गंजनी, तुलसी, लेमन ग्रास, लवेंडर, पुदीना, आदि मच्छरों से बचने वाले पौधे घर में लगाएँ

भारत में ज़ीका वाइरस का क्या इतिहास है?

इन तीन केस से पहले भारत में 1952-53 में केस पाया गया था। ‘न्यूट्रीलाइज़िंग एंटीबोडीज़ अगेन्स्ट सरटेन वाइरसेस इन द सेरा ऑफ द रेसिडेंस ऑफ इंडिया’ नामक एक स्टडी एक अखबार ‘द जर्नल ऑफ इम्यूनोलोजी’ में छपी थी, जहां और वाइरस के साथ ज़ीका वाइरस से मिलते जुलते वाइरस का उल्लेख किया गया था।

इस बात का डॉक्टर को भरोसा है की ज़ीका वाइरस से जन्म के समय नुकसान भी हो सकता है और इससे बच्चे के दिमाग पर भी असर पड़ता है, भारत में हर दिन कई बच्चे पैदा होते हैं इसलिए इसका विशेष खयाल रखे जाने की ज़रूरत है। क्योंकि हमारे देश में इस मच्छर के पनपने के लिए बिल्कुल आदर्श जगह है, इसलिए हम कह सकते हैं की देश में ज़ीका केस की संख्या बढ़ सकती है।

कृपया सभी प्रकार के सावधानी बरतें, और शंका होने पर अपने डॉक्टर से मिलें।