aromatherapy during pregnancy

अरोमाथेरेपी में फूलों के रस, पत्तों, जड़ों और पौधों से शरीर का विशेष खयाल रखा जाता है। प्रेगनेंसी के लक्षणों से लड़ना भी किसी भी महिला के लिए सबसे मुश्किल काम हो सकता है। अगर आप प्रकृतिक उपचार चाहिए तो ये आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। कई महिलाएं इस तरीके से प्रेगनेंसी के लक्षणों का सामना करती हैं। अरोमाथेरेपी का इस्तेमाल सालों से भारतियों, अरबों, रोमन और चाइनिज लोगों द्वारा उनकी सेहत अच्छी करने के लिए किया जा रहा है।

क्या अरोमाथेरेपी सुरक्षित है?

आपको पता होना चाहिए की डॉक्टर को अब भी नहीं पता की इसमें इस्तेमाल होने वाले तेलों से आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता है। एक बड़ी संशा एनएएचए के अनुसार ऐसा कोई भी रिकॉर्ड नहीं है जिसमें इस थेरेपी की वजह से बच्चे में कोई विकार आया हो या कोई गर्भपात हुआ हो। हालांकि आपको सावधान रहने की सलाह दी जाती है, और कई महिलाओं को दूसरी और तीसरी तिमाही में ही इसके इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है। इसमें इस्तेमाल तेल और अन्य द्रव आपके बॉडी से होकर आपके बच्चे तक जा सकते हैं। इसलिए कई एक्सपर्ट आपको पहली तिमाही में अरोमाथेरेपी नहीं लेने की सलाह देते हैं।

अरोमाथेरेपी और सावधानी

इससे आपकी त्वचा को पोषण मिलता है और आपका मूड भी अच्छा होता है। एक नियम के अनुसार आपको ये थेरेपी लेने से पहले डॉक्टर से ज़रूर पूछना चाहिए। अरोमाथेरेपी लेते हुए आपको ये बातें दिमाग में रखनी चाहिए।

कोई भी इतर वाला तेल अपने शरीर पर सीधे ना लगाएँ। आपको इस समय कम असर वाला तेल लगाना चाहिए।

काफी लंबे समय के लिए एक ही तेल ना लगाएँ

जैसे बताया गया हो आपको उसी प्रकार से अपना तेल रखना चाहिए, बच्चों और पालतू जानवरों से दूर।

कोई भी तेल चुनने से पहले काफी सावधान रहें, और उस तेल का इस्तेमाल ना करें जिसके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना हो।

किस तेल का इस्तेमाल हो सकता है?

निम्न तेल को प्रेगनेंसी में सेफ माना जाता है, हालांकि आपको इन्हें भी लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

चकोतरा

जर्मन और रोमन केमोमाइल

लवेंडर

इलाईची, इससे आप सहज होती हैं

गेरेनियम, इससे सूजन कम होती है

अदरक, इससे जी मिचलने की समस्या कम होती है।

आपको निम्न तेल के इस्तेमाल से बचना चाहिए:

रोज़मेरी

तुलसी

चमेली

जूनिपर

ओरिगेनो

पुदीना

कपूर