बिना दिमाग के पैदा हुआ बच्चा अब बोल, गिन और स्कूल जा सकता है। अनेनसेफली के बारे में जानें

anencephaly

 

केवल 2% दिमाग के साथ कंब्रिया, इंग्लैंड में पैदा हुए नोहा वॉल के बचने के चान्स काफी कम थे। डॉक्टर ने उसके जन्म लेने पर कहा की अगर वो बच भी जाता है तो उसको काफी शारीरिक विकार होंगे।

गर्भाशय में नोहा को स्पिना बिफिडा यानी मेरुदंड की काफी दुर्लभ कंडिशन हो गई थी, जहां उसकी खोपड़ी में द्रव भर गए थे और इससे उसके मस्तिष्क को लगातार नुकसान हुआ। डॉक्टर ने उसके माँ-बाप शैली और रॉब को पाँच बार उसे गिराने की सलाह दी। लेकिन उन्होने मना कर दिया। नोहा के जन्म के बाद उसकी गर्दन पर खुले हुए घाव को बंद किया गया और उसके दिमाग से द्रव बाहर निकालने की कोशिश की गई।

सबको चौंकाते हुए नोहा के दिमाग ने बढ़ना शुरू कर दिया। जब वो 3 साल का हुआ तो एक स्कैन में पता चला की उसका दिमाग 80% तक बढ़ गया है। नोहा के माता-पिता और फॅमिली उसके दिमाग के विकास के लिए उसे प्रेरित करते रहे। नोहा हमेशा हस्ता रहता है और वो पढ़ना, लिखना सीख रहा है वो गिन सकता है, व वह स्कूल भी जाता है। उसका दिमाग लगातार बढ़ रहा है और उसकी कूल्हों की कुछ सर्जरी के बाद नोहा के परिवार को लगता है की उनका बच्चा एक दिन फिर चलने में सक्षम होगा।

अनेनसेफली- कारण, लक्षण, और ज़िंदगी की उम्मीद

अनेनसेफली जन्मजात विकारता है जिसमें भ्रूण का दिमाग, खोपड़ी और सर, कोख में बढ़ते हुए पूरी तरह विकसित नहीं हो पता।

यह तब होता है जब तंत्रिका ट्यूब(गर्भाशय में एक ऐसी प्रणाली जो सामान्य रूप से रीड़ की हड्डी और दिमाग के गठन को बंद कर देता है) तीसरे और चौथे हफ्ते में ढंग से बंद नहीं होता है। जिन बच्चों में ये विकार होता है उनमें दिमाग का ज़्यादा या कुछ हिस्सा नहीं होता है। ये बच्चे मूर्छित होते हैं और कुछ भी महसूस नहीं कर सकते, इनमें बहरेपन और अंधापन भी होता है।

अनेनसेफली घातक कंडिशन है। 75% केस में बच्चे इसकी वजह से मृत पैदा होते हैं। जो बच्चे पैदा होने के बाद बच जाते हैं तो कुछ समय बाद मर जाते हैं।

इसकी वजह क्या है?

इसके पीछे का असली कारण अभी तक पता नहीं चला है। फिर भी कहा जाता है की फॉलिक एसिड(B9) की प्रेगनेंसी से पहले और दौरान कमी से तंत्रिका ट्यूब विकार होने के चान्स ज़्यादा रहते हैं, जैसे अनेनसेफली या स्पाइन बिफ़िडिया(इसमें रीड़ की हड्डी दिखती है)। अगर महिलाएं कुछ खास दवाई लेती हैं, जैसे डायबटीस की दवाई, तो इससे प्रेगनेंसी में बच्चे को अनेनसेफली होने के ज़्यादा चान्स होते हैं।

90% केस में बच्चे के माता-पिता को पहले कभी भी इसी प्रकार का विकार नहीं हुआ होता है। हालांकि अगर आपका पहला बच्चा इस विकार के साथ पैदा हुआ है तो दूसरे बच्चे के भी इस विकार के साथ पैदा होने के चान्स ज़्यादा हैं। इस विकार की पुनावृत्ति दर 4-5% और 10-13% उन केस में बढ़ जाती है जिन पेरेंट्स के बच्चे पहले इस विकार एक साथ पैदा हुए हैं।

अनेनसेफली कितना आम है?

हर साल 5,000 बच्चों में से एक को यह विकार होता है, सेंटर फोर डीज़ीज़ कंट्रोल के रिपोर्ट के अनुसार। अभी तक इसके सटीक आंकड़े नहीं पता हैं, क्योंकि कई केस में जिन बच्चों को यह विकार होता है वो भ्रूण के रूप में ही मर जाते हैं।

इसका कैसे पता चलता है?

इस टेस्ट में निम्न चीज़ें आती हैं:

ब्लड टेस्ट

टेस्ट में आपको एल्फा-फेटोप्रोटीन की अधिक मात्रा दिख सकती है(एक ऐसा प्रोटीन जो अविकसित भ्रूण की लीवर सेल द्वारा बनाया जाता है)।

अल्ट्रासाउंड

इसमें बढ़ते हुए भ्रूण की साउंड वेव से तस्वीर ली जाती है। सोनोग्राम में इससे जुड़ी कोई भी असाधारण बात दिख सकती है।

एमनियोसेंटीसीस

पेट के जरिये एक बड़ी सी सुईं से एम्निओटिक थैली से थोड़ा सा द्रव निकाला जाता है। फिर इस द्रव में एल्फा-फेटोप्रोटीन और एसिटाइलकोलिनेस्टरेज़ का लेवल मांपा जाता है। ज़्यादा लेवल की तुलना नॉर्मल लेवल से की जाती है जो तंत्रिका ट्यूब डिफ़ेक्ट से जुड़ा होता है, जैसे अनेनसेफली।

भ्रूण का MRI

इस टेस्ट में मेगनेट से बढ़ते हुए भ्रूण की तस्वीर ली जाती है। इस तकनीक में भ्रूण के दिमाग और अन्य अंग अल्ट्रासाउंड से अच्छी तरह दिखाई देते हैं।

कोई भी टेस्ट 14 से 18 हफ्ते के बीच किए जा सकते हैं। लेकिन MRI टेस्ट प्रेगनेंसी के किसी भी समय हो सकता है।

इसका कैसे इलाज़ किया जाता है?

अनेनसेफली का कोई इलाज़ नहीं है। जिन बच्चों में यह समस्या होती है उनका खास खयाल रखा जाता है। बच्चे को गर्म रखना ज़रूरी है साथ ही जो दिमाग दिखता है उसकी रक्षा की जानी चाहिए।

अनेनसेफली से कैसे बचें?

इससे बचने के निम्न उपाए हैं:

अच्छा पोषण

अच्छे पोषक फल खाना और प्रेगनेंसी से पहले और इसके दौरान विटामिन लेने से इस विकार से बचाव होता है। इस समय सही मात्रा में फॉलिक एसिड लेना भी ज़रूरी है। क्योंकि कुछ महिलाओं को खाने से ही पूरा फॉलिक एसिड नहीं मिलता है उन्हे 400 माइक्रोग्राम फॉलिक एसिड के साथ मल्टीविटामिन सप्लिमेंट लेने चाहिए। दवाई के रूप में लिए गए विटामिन को शरीर खाने के मुक़ाबले आसानी से ले पता है।

फॉलिक एसिड के अन्य स्त्रोत, हरे पत्तों को सब्जी, सुखी हुई बीन, संतरे, संतरे का जूस हैं। कुछ खानों जैसे आटा, चावल, ब्रेड, सेरियल और पास्ता में फॉलिक एसिड आरक्षित होता है।

फॉलिक एसिड सप्लिमेंट

जिन महिलाओं ने पहले किसी बच्चे को इस विकार के साथ जन्म दिया उनके दूसरे बच्चे को भी इस विकार के होने की ज़्यादा चान्स होते हैं, इसलिए उन्हे फॉलिक एसिड ज़्यादा मात्रा में लेना पड़ता है। महिलाओं को डॉक्टर से इसकी मात्रा के बारे में सलाह लेनी चाहिए। ऐसी सलाह दी जाती है की जिनके साथ पहले ये केस हो चुका है उन्हे गर्भधारण करने से 2-4 महीने पहले से 4mg फॉलिक एसिड लेना चाहिए, और फिर उन्हे पहली तिमाही तक इसे जारी रखना चाहिए, इस सबके बीच आपको डॉक्टर की सलाह भी लेनी चाहिए।