डॉक्टर डेस्क: ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस- इसके बारे में क्या जानना चाहिए?

 

कोलेस्टेसिस ग्रीक शब्द है। कोल का मतलब बाइल यानी पित्त होता है एक ऐसा पदार्थ है जो वसा यानी फैट को पचाने में मदद करता है और स्टेसिस का मतलब है एक जगह खड़ा होना। ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस एक ऐसी कंडिशन है जहां लंबे से पित्त का लीवर से मलत्याग नहीं होता है क्योंकि पित्त नमक रक्त कोशिकाओं में लीक होते हैं। इसे प्रेगनेंसी का इंट्रहपेटिक कोलेस्टेसिस भी कहते हैं।

यह आमतौर पर तीसरी तिमाही के दौरान ही आता है और डिलिवरी के बाद अपने आप चला जाता है।

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस से 0.7% प्रेगनेंसी पर असर पड़ता है और साउथ एशिया की 1.2-1.5% महिलाओं पर इसका असर पड़ता है। इस कंडिशन का प्रसार आनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कारकों से होता है और सब पर इसका अलग लोगों में ये अलग होता है।

इसके कारण का पता नहीं चला है, प्रेगनेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलाव और आनुवांशिक कारकों की वजह से ये हो सकती है ऐसा माना जाता है।

पित्त की प्रणाली में पित्त के ठहराव के साथ संयुग्मित बिलीरुबिन बढ़े हुए एस्ट्रोजन की वजह से होते हैं। यह प्रेगनेंसी में पीलिया का दूसरा सबसे आम कारण है, पहला हेपेटाइटस है।

इसकी शुरुआत घातक हो सकती है और आने वाली प्रेगनेंसी में ये फिर हो सकती है(45-70% चान्स)।

लक्षण

खुजली काफी बड़ा लक्षण है, धड़ और अंगों में बिना किसी निशान और रात में काफी बुरे हो जाते हैं। खुजली कभी इतनी बुरी होती है की माँ अपनी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती है, और दाग-धब्बे पड़ जाते हैं। कुछ अन्य लक्षण:

  • कमजोरी
  • जी मिचलना या उल्टी आना
  • अरुचि और बेचैनी
  • पेशाब का गाढ़ा आना
  • मल का पीला या कम रंग का आना

डॉक्टर को कब बताना है?

जब भी आपको शरीर में खुजली हो तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। इससे बीमारी का पता लगाने और उपचार करने में मदद मिलती है, जो बच्चे और माँ दोनों के लिए अच्छा फायदेमंद है।

क्या माँ और बच्चे को कोई खतरा हो सकता है?

हाँ, थोड़ा रिस्क तो है। कभी-कभी खुजली इतनी ज़्यादा होती है की त्वचा पर घाव पड़ जाते हैं।

माँ को खतरा: इससे माँ में विटामिन K की कमी हो सकती है जिससे आपको प्रसव के बाद नकसीर हो सकता है।

बच्चे को खतरा: इससे बच्चा पहले या मृत पैदा हो सकता है(ऐसा 100 में से 1 बार होता है)

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का पता कैसे चलता है

जब आपको खुजली होती है तो डॉक्टर आपकी पुरी मेडिकल हिस्ट्री, आनुवांशिक हिस्ट्री लेने के साथ आपका पूरा शारीरिक चैकअप करते हैं। लीवर फंक्शन टेस्ट के साथ ब्लड टेस्ट भी करवाना चाहिए, इसमें कई प्रकार के हेपेटाइटस की जांच और थक्के की जांच भी होती है। डॉक्टर पित्त पथरी या पेट में कोई और समस्या को पकड़ने के लिए अल्ट्रासाउंड भी करवा सकते हैं।

लीवर फंक्शन टेस्ट के साथ अगर खुजली बार-बार हो रही है तो 1-2 हफ्ते के बाद फिर से सब जाँचने के लिए लीवर टेस्ट फंक्शन की सलाह दी जाती है।

ऑब्स्टेट्रिक कोलेस्टेसिस का इलाज़

इसका इलाज़ लीवर फंक्शन टेस्ट और गर्भावधि पर निर्भर करता है। खुजली के लिए दवाई जैसे कैलेमाइन लोशन या नारियल का तेल भी आराम दे सकता है। इससे त्वचा को भी आराम मिलता है। अर्जोंडीऑक्सीहोलिक एसिड या कोलेसटीरीमन सपलीमेंट इसकी दवाई है। अगर आपको वायरल सेरोलॉजी है तो इलाज़ इसके अनुसार ही बदलता है।

मुख्य देख-रेख

अच्छे खाने के साथ अपना खयाल रखना ज़रूरी है। आपको अपने डॉक्टर से हमेशा मिलते रहना चाहिए। दर्द-निवारक टेस्ट/नॉन-स्ट्रैस टेस्ट हर 1 या दो हफ्तों में दवाई लेने के साथ करवाना चाहिए, इससे बच्चे की सेहत का पता चलता है।

अगर आपको खुजली के साथ गाढ़े रंग की पेशाब और आँखों का रंग कुछ अलग लगे साथ ही एक दम से कमजोरी और थकान लगे, या बच्चे का हिलना कम हो, पेट में ज़्यादा दर्द हो, उल्टी और बुखार आए तो अपने डॉक्टर को तुरंत कॉल करें।