प्रीक्लेम्सिया- लक्षण, खतरे और बचाव

Pre-eclampsia during pregnancy

प्रीक्लेम्सिया एक ऐसी कंडिशन है जो कई प्रेगनेंट महिलाओं को होती है। ये हाई ब्लड प्रैशर से जुड़ी समस्या है, इससे आपके लीवर को नुकसान हो सकता है, इससे आपकी किडनी को भी नुकसान हो सकता है और अन्य समस्या हो सकती है। ये वैसे 20 हफ्ते की प्रेगनेंसी के बाद ही होता है, लेकिन कभी कभी पहले भी हो सकता है। यहाँ तक आपके ब्लड प्रैशर में थोड़ा भी बढ़ाव आने से आपको प्रीक्लेम्सिया से हो सकता है, हालांकि कभी कभी ये बिना लक्षण के हो सकता है।

इसके निम्न लक्षण:

1.आपकी पेशाब में काफी प्रोटीन आना, या किडनी से जुड़ी दिक्कत

2.बार-बार या भंयकर सर में दर्द

3.आपको दिखने में दिक्कत, या कभी-कभी ना दिखना, या धुंधला दिखना

4.जी मिचलना, उल्टी आना या थकान लगना

5.सांस लेने में दिक्कत होना या पेट में दर्द होना

6.आपके खून में प्लेटलेट की कमी होना

7.एक दम से वज़न बढ़ना या सूजन, वो भी चेहरे, पाँव, और हाथ के पास

इस अवस्था से आपको और आपके बच्चे दोनों को असर पड़ सकता है। यदि इसका इलाज़ समय पर नहीं हुआ तो इससे ये इक्लेम्सिया या एचईएलएलपी सिंड्रोम में बदल सकता है। इससे गर्भनाल को खून मिलने पर भी असर पड़ता है, और इससे बच्चे को खाना और ऑक्सिजन मिलने पर असर पड़ता है। इससे बच्चे का विकास धीमा हो सकता है, फिर बच्चे का वज़न जन्म के समय कम हो सकता है और बच्चा समय से पूर्व पैदा हो सकता है। इससे आपकी गर्भनाल आपके गर्भाशय से अलग हो जाती है जिससे बच्चे का जन्म मृत हो सकता है।

इन तरीकों से आप प्रीक्लेम्सिया से बच सकते हैं या उसे कंट्रोल कर सकते हैं:

1.दिन में कम से कम 6-8 गिलास पानी लें

2.बाहर का खाना या तेलिए खाना ना लें

3.दिन में अच्छे से आराम करें और रात में अच्छा सोएँ

4.इस समय शराब ना लें और कैफीन वाले पेय पदार्थ भी ना लें

5.नियमित रूप से एक्सर्साइज़ करें

प्रीक्लेम्सिया कितना खतरनाक है इस बात पर इसका इलाज़ और बचाव निर्भर करता है। सबसे अच्छा इलाज़ है बच्चे का जन्म लेना। डॉक्टर बच्चे का विकास देखने के लिए आपका अल्ट्रासाउंड करवा सकते हैं। अगर आपका बच्चा सही से बढ़ गया हो, तो डॉक्टर आपका प्रसव प्रेरित कर सकते हैं, या सिजेरियन भी कर सकते हैं। प्रेगनेंसी में आपको अपना बार-बार खयाल रखना पड़ता है, और इस समय आपको अपना ब्लड प्रैशर भी चेक करना है। डॉक्टर आपको खून और पेशाब का टेस्ट लेने के लिए कहेंगे और आपको ये टेस्ट कभी इग्नोर नहीं करना है।