प्रीक्लेम्सिया: लक्षण, रिस्क, उपचार और बचाव

Preeclampsia signs symptoms

प्रीक्लेम्सिया एक ऐसी अवस्था है जो प्रेगनेंसी में ही आती है। इसके कुछ लक्षण में उच्च रक्त चाप और यूरीन में प्रोटीन शामिल है, ऐसा प्रेगनेंसी के 20वें हफ्ते बाद होता है। यह आमतौर पर गर्भावस्था की टेंशन की वजह से होता है। वैसे आमतौर पर प्रेगनेंसी में उच्च रक्तचाप का ये मतलब नहीं की आपको प्रीक्लेम्सिया हो गया है, यह दिक्कत केवल 5-8% महिलाओं में आती है।

किसे प्रीक्लेम्सिया हो सकता है?

निम्न महिलाओं को प्रीक्लेम्सिया हो सकता है:

पहली बार माँ बनने वाली महिलाएं

पहले भी गर्भवस्था के समय तनाव या प्रीक्लेम्सिया रहा हो

वो महिलाएं जिनकी माँ और बहनों को ये रहा है

जिनके पेट में कई बच्चे हैं

वो महिलाएं जो 20 साल से छोटी और 40 साल से बड़ी हैं

वो महिलाएं जिन्हे उच्च रक्तचाप या किडनी में बीमारी रही हो

वो महिलाएं जिन्हे मोटापे की बीमारी हो, और जिनका बॉडी मास इंडेक्स 30 या उससे ज़्यादा हो

प्रीक्लेम्सिया के लक्षण क्या हैं?

छोटा प्रीक्लेम्सिया: उच्च रक्तचाप, द्रव का निकलना, और पेशाब में प्रोटीन

गंभीर प्रीक्लेम्सिया: सर में दर्द, धुंधला दिखना, प्रकाश को नहीं झेल पाना, थकान, जी मिचलना, कम मात्रा में पेशाब करना, पेट में ऊपर की ओर दर्द होना, सांस में दिक्कत। ऐसा कुछ भी होने पर आप अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें, अगर आपको धुंधला दिखाई दे तो डॉक्टर से बात करने में थोड़ी भी देरी ना करें।

मुझे प्रीक्लेम्सिया है ये कैसे पता चले?

प्रसव पूर्व चैकअप आपके डॉक्टर आपके ब्लड प्रैशर, यूरिन लेवल, और अन्य ब्लड टेस्ट करवा सकते हैं, जिससे पता चलता है की आपको प्रीक्लेम्सिया है या नहीं। आपके डॉक्टर आपके अन्य टेस्ट भी कर सकते हैं, जिनमें किडनी और खून के थक्के के चलने का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड हो सकता है जिसमें आपके बच्चे के विकास का पता चलता है और एक स्कैन हो सकता है जिसमें पता चलता है की आपकी गर्भनाल में खून का संचार कैसे हो रहा है।

प्रीक्लेम्सिया का उपचार?

आपकी प्रसव की तिथि कितनी पास है इस बात पर ही आपका उपचार निर्भर करता है। अगर आप अपनी डेट के पास हैं और बच्चा सही विकसित हो गया है तो आपके डॉक्टर आपके बच्चे को जल्द से जल्द पैदा करवाने की कोशिश करेंगे।

अगर आपको थोड़ा सा प्रीक्लेम्सिया है और आपका बच्चा पूरा बड़ा नहीं हुआ है तो आपके डॉक्टर आपको नीचे दी गई चीज़ करने को कहेंगे:

आराम करने को कहा जाएगा, आपको अपनी बाईं तरफ लेटने को कहा जाएगा जिससे आपकी खून की कोशिका पर दबाव ना पड़े

आपको ज़्यादा चैकअप लेने को कहा जाएगा

कम नमक लेने को कहा जाएगा

आपको दिन में कम से कम 8 गिलास पानी लेने को कहा जाएगा

आपको ज़्यादा प्रोटीन लेने की सलाह दी जाएगी

अगर आपको ज़्यादा गंभीर प्रीक्लेम्सिया है तो आपके डॉक्टर आपके डिलिवरी के लिए तैयार नहीं होने तक ब्लड प्रैशर की दवाई देंगे। इसमें आपको आराम करने, सही आहार लेने और सप्लिमेंट खाने को कहा जाएगा।

इससे माँ पर क्या असर पड़ता है?

अगर प्रीक्लेम्सिया का जल्द इलाज़ नहीं हुआ तो इससे आपकी दिक्कत बढ़ सकती हैं, इसकी वजह से माँ का लीवर खराब हो सकता है।

इससे नीचे दी गई जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती हैं:

ईक्लेमसिया: ये प्रीक्लेम्सिया का एक और गंभीर रूप है।

HELLP सिंड्रोम: ये प्रेगनेंसी के अंतिम अवस्था में आने वाली कंडिशन है, इसमें लाल रक्त कणिका पर असर पड़ता है, और फिर आपके लीवर पर असर पड़ता है।

प्रीक्लेम्सिया से बच्चे क्या असर पड़ता है?

इससे गर्भनाल में खून का संचार बाधित हो सकता है। अगर आपकी गर्भनाल को सही मात्रा में खून नहीं मिलेगा तो आपके बच्चे को कम ऑक्सिजन और खाना मिलेगा। जिससे बच्चे का वज़न जन्म के समय कम हो सकता है। अगर प्रीक्लेम्सिया का जल्द पता चल गया तो कई महिलाएं स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं।

मैं प्रीक्लेम्सिया से बचूँ कैसे?

अभी इससे बचने का कोई पक्का तरीका नहीं है। अधिक ब्लड प्रैशर किन वजहों से होता है ये पता चल गया तो इस बीमारी से बचना थोड़ा आसान हो जाता है। डॉक्टर जो भी खाने या एक्सर्साइज़ करने को कहे आपको वो करनी चाहिए।

अपने खाने में कम या बिलकुल भी नमक ना लें

6-8 गिलास पानी दिन में लें

ज़्यादा तला हुआ या जंक फूड ना लें

सही प्रकार से आराम करें

नियमित रूप से एक्सर्साइज़ करें

दिन में कई बार पाँव हिलाएँ

शराब ना लें

कैफीन वाले पेय-पदार्थ से बचें

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