एलर्जी से बचाव

Allergies during and post pregnancy

क्या प्रेगनेंसी में आपका आहार या दूध पिलाने से आपके बच्चे का खाने से होने वाली एलर्जी से बचाव होता है?

आप प्रेगनेंसी में अपने बच्चे को खाने की एलर्जी से दूर रखने के लिए शायद कुछ भी करेंगी। अंडे से दूर रहना? या कुछ भी छोड़ना? जी हाँ, आप कुछ भी करेंगी। आपको इस बारे में हर जगह से अलग-अलग सलाह मिलती रहती होगी। तो आपको इस समय क्या करना चाहिए?

ये एक अहम सवाल है। 6 प्रतिशत बच्चों को खाने की एलर्जी से उनके प्रतिरोधक तंत्र पर भी असर पड़ता है, जिससे बच्चे को लगातार खुजली हो सकती है, बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और अन्य दिक्कत हो सकती है।

ये समस्या बढ़ रही है-1997 से 2007 तक खाने में एलर्जी की समस्या में 18 प्रतिशत का चढ़ाव आया है। वैज्ञानिक को नहीं पता की ऐसा क्यों है पर कुछ थियरि के अनुसार जब माँ-बाप और डॉक्टर में इसको लेकर काफी सजगता होती है तब इस एलर्जी होने का खतरा कम होता है। हालांकि आपको याद रखना चाहिए की असली एलर्जी अन्य खाने वाली एलर्जी से काफी अलग है। दूसरी वाली ज़्यादा गंभीर समस्या नहीं है।

पहले बड़े-बूढ़े सलाह देते थे की कुछ खास खाना न खाया जाए, और उससे सही में बच्चे को कम एलर्जी होती थी। इन खानों में गेहूं, सोया, गाय का दूध, मछली, शेलफिश, मूँगफली, और अंडे शामिल थे। लेकिन आजकल के अध्यन ने इन सलाह के अस्तित्व पर ही सवाल उठा दिए हैं। पता चलता है की अब अंडे, गेहूं, और मछली खानी चाहिए, इसे ना लेने पर आपके बच्चे में खाने की एलर्जी बढ़ते की उम्मीद ज़्यादा रहती है।

क्या आपको कुछ समझ नहीं आ रहा? खैर इस विषय पर अभी शोधकर्ता भी काफी असमंजस में हैं। अभी हर अध्यन पर काम चल रहा है। आपको कुछ भी लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए, वो आपको सही सलाह दे पाएंगे।

प्रेगनेंसी के समय: इस समय आप वो सब खा सकती हैं जिससे आपको एलर्जी नहीं होती है। ऐसा कहीं से पता नहीं चलता है की इस प्रकार के खानों से दूर रहने से बच्चे में एलर्जी के चान्स कम होते हैं। वैसे ऐसे किसी भी खाने को अपने आहार से बाहर करने पर आपको फायदे से ज़्यादा नुकसान हो सकता है। क्योंकि काफी एलर्जेनिक खानों में अहम पोषण होते हैं, जो आपके बच्चे और आपके लिए ज़रूरी है। उदाहरण के लिए मछली में मौजूद ओमेगा-3 और फेटी एसिड से आपके बच्चे का दिमाग का अच्छे से विकास होता है, और मूँगफली में मौजूद फोलेट से न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट होने का खतरा कम होता है, जैसे स्पिना बिफ़िडिया।

दूध पिलाते हुए: दूध पिलाते हुए एलर्जेनिक खाने को त्यागने से आपके शरीर को कोई फायदा होगा ये कहीं नहीं कहा गया है। हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार दूध पिलाने से बच्चे में वैसे भी एलर्जी की संभावना कम रहती है। बच्चा अगर माँ का दूध चार महीने या ज़्यादा समय के लिए पी रहा है तो ये उसके लिए काफी अच्छी बात है। अगर आपका दूध पीने वाला बच्चा आपके खाने पर कुछ प्रतिक्रिया देता है तो आपको वो खाना नहीं खाना चाहिए। आपको वैसे इस समय कुछ भी अलग खाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, वो आपको बता पाएंगे की इस समय आपके लिए क्या सबसे अच्छा है। कुछ चीज़ें आपको लग सकती हैं की आपके लिए नुकसानदायक होंगी, लेकिन डॉक्टर के अनुसार वो आपके लिए काफी अच्छी साबित हो सकती हैं।

कठोर पदार्थ लेते हुए: एक बड़ी संस्था के अनुसार चार से छह महीने बाद अपने बच्चे को एलरजेनिक खाना देना सही है, बस आपको देखना है की कोई एलर्जिक रिएक्शन ना हो, इसमें खुजली, उल्टी, पीली त्वचा, चक्कर, और सांस लेने में समस्या शामिल है।

परिवार: अगर माता-पिता में किसी को एलर्जी है तो बच्चे को भी एलर्जी भी हो सकती है। इन एलर्जी में खाने की एलर्जी, बुखार, अस्थमा, और एंजमा होता है। एक बड़ी डॉक्टर का कहना है की माँ-बाप से ही काफी एलर्जी बच्चे को आती है।

बच्चे को शुरुआती कुछ महीने में या कह सकते हैं की शुरुआती छह महीने तक अपना दूध पिलाना और फिर उसके बाद दूध के साथ बाकी खाना खिलाने से बच्चे को एलर्जी के खतरे कम होते हैं। यदि आपको लगे की बच्चे को कोई एलर्जी हो रही है तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए।

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