प्रेगनेंसी में कब्ज़ का कैसे सामना करे, और इसके अलावा बहुत कुछ बातें जो आपको जाननी चाहिए

अगर आप अचानक हुई कब्ज़ की समस्या से परेशान हैं तो चिंता मत कीजिए, इस बारे में ज़्यादा चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है। गर्भावस्था में कम से कम आधी महिलाओं को कब्ज़ की समस्या होती है।

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव इसकी एक वजह है। हार्मोनल प्रोजेस्ट्रोन में बढ़ाव से कोमल मांसपेशियाँ पूरे शरीर में रिलेक्स होती हैं, पाचन तंत्र भी इस क्रिया का एक हिस्सा है। इस वजह से खाना आंत से काफी धीमी गति से निकलता है। बढ़ते हुए गर्भाशय की भी इसमें एक अहम भूमिका होती है। लौह पदार्थ यानी आयरन को ज़्यादा लेने से यह समस्या और बुरी हो सकती है।

आप अपने कब्ज़ को कंट्रोल करने के लिए इन उपायों का पालन कर सकते हैं।

अच्छे खाने से अपना खयाल रखें

वो खाना खाएं जो आपके शरीर के लिए अच्छा हो, जैसे अनाज और रोटी। ताज़े फल और सब्जियों का सेवन करें।

पानी आपका सबसे अच्छा दोस्त है

अन्य पेय पदार्थ जैसे जूस के अलावा आप कम से कम 1 लीटर पानी रोज़ पीयें(यूरीन के साफ या हल्का पीला हो जाने तक कुछ न कुछ थोड़े समय के लिए पीते रहिए। इससे पता चलता है की आप हाइड्रेड़ हैं, मतलब आपके शरीर में पानी की कमी नहीं है।) ताज़ा फल का जूस शरीर के लिए अच्छा है। कुछ महिलाओं को सुबह पानी के साथ नींबू पीना भी अच्छा लगता है। आपको शरीर में पानी की कमी करने वाले पेय पदार्थ जैसे चाय और कॉफी से बचना चाहिए।

एक्सर्साइज़ का कोई विकल्प नहीं है

नियमित रूप से टहलने और एक्सर्साइज़ करने से कब्ज़ की समस्या नियंत्रण में रहती है और इससे आप ज़्यादा फिट और स्वस्थ भी रहते हैं। योगा करने से आपके पेट की मासपेशियाँ सही आकार में रह सकती हैं।

कई महिलाएँ सवाल करती हैं की अगर कब्ज़ की समस्या गंभीर हुई तो क्या? अगर आपको दस्त और पेट के दर्द के साथ गंभीर कब्ज़ है तो ये किसी और समस्या की वजह से हो सकता है। इस स्थिति में

अपने डॉक्टर से मिलें, कई केस में ये समस्या बच्चे के पैदा होने के बाद अपने आप चली जाती है। हालांकि अगर दर्द जारी रहे तो अपने डॉक्टर की सलाह लें, और ज़रूरी हो तो दवाई भी लें।

इस दौरान ज़्यादा चिंता ना करें, क्योंकि ये कोई बड़ी समस्या नहीं है और आप हर चीज़ के लिए तैयार हैं।