प्रेगनेंसी में चक्कर आने

Dizziness during pregnancy

प्रेगनेंसी और चक्कर आना: कारण और बचाव

प्रेगनेंसी में चक्कर आना एक आम लक्षण है। यह पहली तिमाही में काफी बार आते हैं, लेकिन आपको चक्कर पूरी प्रेगनेंसी में आ सकते हैं।

प्रेगनेंसी में चक्कर क्यों आते हैं?

बढ़ते हुए हार्मोन्स कि वजह से आपकी खून कि कोशिका रिलेक्स और चौड़ी होती है, और इसी वजह से चक्कर आते हैं। इसकी वजह से आपके शरीर में खून का संचार काफी तेज़ी से होता है, लेकिन यह आपकी नसों में खून के आने कि रफ्तार को कम करता है। इससे आपका खून का संचार धीमा होता है, इससे आपके दिमाग में खून कि सही मात्रा नहीं पहुँचती, और फिर आते हैं चक्कर।

चक्कर शुगर के कम होने से भी आते हैं, जो हो सकता है क्योंकि आपका शरीर आपके चयपचय में होने वाले बदलाव के अनुसार ढलता है। जिन महिलाओं को रक्तहीनता या सूजी हुई नस वाली दिक्कत होती है, उन्हें ज़्यादा चक्कर आ सकते हैं। दूसरी तिमाही में चक्कर गर्भाशय बढ्ने से रक्त कोशिका पर दबाव पड़ने कि वजह से आ सकते हैं।

प्रेगनेंसी कि अंतिम अवधि में भी आपको पीठ के बल लेटने से चक्कर आ सकते हैं, क्योंकि इससे दिल कि तरफ खून ले जाने वाली नस दब जाती है।

प्रेगनेंसी में चक्कर आने से कैसे बचें?

निम्न तरीकों से आप प्रेगनेंसी में चक्कर से बच सकते हैं:

ज़्यादा देर तक खड़ी ना हों। अगर आपको खड़ा रहना ही है तो आप बार-बार चलते भी रहिए, जिससे खून का संचार हो सके।

अगर बैठे या लेटे हों तो आराम से उठें, नहाने के बाद यह और भी अहम हो जाता है।

लगातार खाते रहें, बीच में ज़्यादा गैप ना दें। दिन भर में कुछ ना कुछ हल्का फुल्का खाते रहें।

ज़्यादा गर्म पानी से ना नहाएँ

दूसरी तिमाही के बीच में पीठ के बल ना लेटें।

आरामदायक कपड़ें पहनें

अगर आपको मूर्छित जैसा लगे तो क्या किया जाए?

अगर आप लग रहा है कि आप मूर्छित होने वाली हैं तो कुछ तरीकों से आपकी मदद हो सकती है। प्रेगनेंसी के समय मूर्छित होना काफी आम है, लेकिन आपको इस समय अपना ज़्यादा खयाल रखना पड़ेगा।

ये सुझाव आपके काम आ सकते हैं:

अगर आप लेटी या बैठी हुई हैं तो एक दम से उठने का प्रयास ना करें। इसकी वजह से चक्कर आते हैं, और इससे ही लोग मूर्छित होते हैं।

अगर आपको चक्कर जैसा आए, तो नीचे दी गई चीज़ें करें:

नीचे लेट जाएँ और अपना सर नीचे करलें

लंबी सांसें लें

अगर आपने टाइट कपड़े पहनें हैं तो उसे ढीला कर दें

अपनी खिड़की खोल दें

लौह पदार्थ यानी आइरन वाला खाना लें

अपने डॉक्टर से कब बात करनी है?

आपको अपने डॉक्टर से तब बात करनी चाहिए जब आपको चक्कर के साथ योनी से खून भी निकले और पेट एन दर्द भी हो। हो सकता है की आपको एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो, इसमें गर्भनाल काफी नीचे होती है।

अगर आपको लगातार चक्कर आ रहे हैं, या चक्कर के बाद धुंधला दिख रहा हो तो आपको अपने डॉक्टर से बात करना चाहिए। यदि आपको चक्कर के साथ सर में दर्द हो तब भी आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। आपको एनीमिया या कोई और बीमारी हो सकती है जिससे आपकी प्रेगनेंसी पर असर पड़ सकता है।

15 http://angohealth.com/pregnancy/pregnancy-guide/labour-and-birth/alternative-relaxation-techniques/

रिलेक्स करने कि वैकल्पिक तकनीक

प्रसव का दर्द कम करने के लिए वैकल्पिक रिलेक्स करने वाली तकनीक

जैसे ही प्रेगनेंसी के आगे बढ़ने पर आपका प्रसव पास आता है, वैसे ही आमतौर पर डर और चिंता कि भावना होना काफी आम है। प्रसव को इंग्लिश में लेबर इसलिए कहते हैं क्योंकि बच्चा पैदा करना मुश्किल, दर्दपूर्ण और तनाव वाला काम है।

हर किसी का दर्द अलग होता है, इसलिए आप बस माँ बन चुकी महिलाओं से बात कर सकती हैं, आपको कैसा दर्द होगा इसके लिए आपको कोई भी तैयार नहीं कर सकता। जन्म को लेकर ली गई जानकारी, और रिलेक्स करने करना ही आपको बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार कर सकता है। निम्न तकनीकें आपकी और आपके पार्टनर कि मुश्किल समय में मदद कर सकती हैं।

दृष्टि

जो हम देखते हैं वो हम पर भावनात्मक रूप से असर डालता है और इससे आपके बिहेवियर पर भी असर पड़ता है। अगर प्रसव के समय कमरे का माहौल एक दम शांत, कम लाइट जैसे लैम्प या मोमबत्ती वाला है तो आपको प्रसव काफी सुरक्षित लगेगा। आप इस बारे में अपने डॉक्टर से बात कर सकती हैं।

सही माहौल से आपका ध्यान भी कम से कम भटकेगा। आप अपनी छुट्टियों कि कुछ तस्वीरें ला सकती हैं, जिससे आपके शरीर को आराम मिलेगा।

साउंड

म्यूज़िक आपको डांस करवा सकता है और सुला भी सकता है। म्यूज़िक थेरेपी से आपके मरोड़े का समय रिलेक्स हो सकता है। आप अपने आस-पास समुद्र लहरों कि आवाज़ और चिड़िया कि चहकने कि आवाज़ चला सकती हैं।

कई दुकानों में इस समय के लिए कई साउंड वाली सीडी होती है, आप अपना मनपसंद म्यूज़िक यहाँ चुन सकती हैं। जो म्यूज़िक आपको अच्छा लगे वो आप पूरी प्रेगनेंसी के दौरान अपने लिए चला सकती हैं।

ऐसा करने से आप अपने आपको जन्म देने के लिए तैयार करती हैं, और रिलेक्स करती हैं। ऐसा म्यूज़िक आप प्रसव कक्ष में बजा सकती हैं इसके बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें, और फिर अपना मनपसंद म्यूज़िक चलाएँ।  

सूंघना

कुछ सुगंध से आपको आराम और आनंद मिल सकता है। अगर आप बच्चे को हॉस्पिटल या बर्थ सेंटर में जन्म देने के बारे में सोच रही हैं तो आप घर से कुछ ऐसी चीज़ ला सकती हैं जिनसे आपको अपने घर वाली खुशबू आए और आप अपना घर भी मिस नहीं करेंगी।

आप तेल जैसे लवेंडर, गुलाब और जेस्मिन ले सकते हैं। आप हवा को अच्छा रखने के लिए एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे आपके आस-पास आपके घर जैसी सुगंध रहेगी। जेस्मिन को पारंपरिक रूप से प्रसव में इस्तेमाल किया जाता है, ऐसा माना जाता है की इससे दर्द झेलने में मदद मिलती है। लवेंडर में एंटीसेप्टिक भी होता है, जो आपके लिए अच्छा है। और ये आपको शांत भी रखता है।

स्वाद

कई एक्सपर्ट मानते हैं की प्रसव की पहली स्टेज में कार्बोहाइड्रेट और विटामिन बी लेने से मदद होती है, और ये सेहत के लिए भी अच्छा है। हालांकि चल रहे प्रसव में ये लिया जाए इसके बारे में लोगों की अलग-अलग राय है। कई महिलाएं इस समय कुछ भी खाने की इकच्छुक नहीं होती हैं, वो चाहती हैं की प्रसव कैसे भी करके निपट जाए। हालांकि आपको इस समय कुछ ऐसे पोषक स्नैक्स लेने चाहिए जो आपको ऊर्जा दें, इससे आप बेचैनी और थकान से लड़ सकेंगी।

स्पर्श

कुछ महिलाओं को प्रसव के समय किसी का स्पर्श करना अच्छा लगता है और किसी को ये बिलकुल अच्छा नहीं लगता। कुछ महिलाओं को थोड़ा दबाव भी बेकार लगता है पर कुछ महिलाओं को ये अच्छा लगता है। आपको कई प्रकार की प्रक्रिया से गुजरना होगा, ये देखने के लिए आपके लिए क्या अच्छा है, और आपको किससे गुस्सा नहीं आता है। नीचे दी गई मालिश कई लोगों के लिए अच्छी रही हैं:

आराम से दबाव लगाना: जैसे ही आपके पेट पर दबाव तेज़ी से बढ़ता है वैसे ही आप देख सकती हैं की आपकी आँख, भौ और जबड़ा टाइट होता है। आराम से दबाव लगाने से कई माँ का तनाव दूर होता है। अपनी पत्नी की पूरी टेंशन खत्म करने के लिए आप उसे ढंग से गले लगाएँ, और उनका तनाव थोड़ा खुदमें ले लें।

गूंथना: सही तरीके से कंधे दबाने से कंधों के ज़रिए तनाव निकलता है। जैसे आप आता गूँथते हैं वैसे ही आप पीठ पर इससे गूँथें, इससे मसल से तनाव कम होगा। आपको ये करते हुए ध्यान रखना है की आप ज़्यादा ही ताकत ना लगा दें।

सहलाना/थपथपाना: अपने हाथ और हथेली से थोड़े अच्छे दबाव के साथ कंधे से लेकर गूदे तक अच्छे से सहलाएँ। जैसे ही एक हाथ ऊपर जाए वैसे ही दूसरा हाथ शरीर को सहलाए। ऐसा करने से माँ को काफी आराम मिलेगा। इस समय आप प्रसव में चल रही माँ से पूछ सकते हैं की उन्हें कैसा लग रहा है। और उसी अनुसार आप इसका दबाव बढ़ा सकते हैं।

दबाव लगाना: दर्द होने वाले क्षेत्र में पीठ की नीचे की ओर दबाव लगाने से काफी मदद होती है। अपनी उंगली की मुट्ठी बना लें। आप मुक्के जैसे हाथ से अपनी पत्नी के शरीर को दबाएँ। अपने आपको इस अवस्था में लाएँ की आपका बच्चा भी इस दबाव को महसूस कर सके। इससे कई महिलाओं ने बताया है की उन्हें मदद हुई है।

हाइड्रोथेरेपी: प्रसव का दर्द कम करने का ये काफी प्रचलित तरीका बनता जा रहा है। दबाव, धड़कन, और पानी की गर्माहट प्रसव की पहली स्टेज में और टब में अपना वज़न कम महसूस करने से आप तेज़ी से प्रसव की ओर बढ़ते हैं। आपको पानी के टब में ऐसा लगेगा जैसे आपका वज़न है ही नहीं।

रिफ़्लेक्सोलोजी: इसमें पाँव के किसी खास हिस्से में दबाव बनाकर शरीर के किसी खास हिस्से के दर्द को कम किया जाता है। इस थियरि के अनुसार माना जाता है की पाँव से ही सब दर्द होकर निकलता है। किसी भी नस को नीचे की ओर दबाकर ऊपर की ओर संकेत भेजा जाता है, और फिर एंडोर्फिंस का उत्सर्जन होता है, जिससे दर्द नियंत्रित होता है।

नीचे दी गई तकनीक आप और आपके पार्टनर ट्राय कर सकते हैं:

धीरे से आगे बढ़ रहे प्रसव के लिए

कुर्सी पर अपने पाँव ऊपर करके अपने पार्टनर को अपने पाँव पकड़ने को बोलें। उनको फिर इस धीरे से दबाना है और फिर छोड़ देना है, ऐसा उन्हें कई बार करना है। कुछ देर के बाद आपको अपने पाँव और श्रोणि एरिया में गर्माहट सी लगेगी। जब आपको ये महसूस हो तो अपने पार्टनर को फिर से ये करने के लिए बोलें, जब तक आपका प्रसव फिर से चालू नहीं हो जाता।

चालू प्रसव के दौरान

इसी पोसिशन में अपने पार्टनर को उनके अंगूठे से अपने वृत-खंड को तेज़ी से दबाने दें। ऊपर-नीचे और दाएँ बाएँ, ऐसा उन्हें दोनों पैर के साथ करने को बोलें।

दबाना और पकड़ना दोनों एक साथ करें, इसमें एक छोटा से गोले के आकार में दबाव बनाना है। ऐसा करने से आपको सांस लेने में मदद होगी। सही तरह से सांस चलने में आप सही तरीके से रिलेक्स कर सकेंगी, और ये प्रसव के लिए काफी अहम है।

विचार

आपने सुना ही होगा की आप जैसा सोचेंगे आपके साथ वैसा ही होगा। जन्म देने में भी लगभग यही होता है, आप कुछ भी ट्राय कर सकते हैं, लेकिन अंत में आपका दिमाग कैसी लड़ाई लड़ रहा है यही सबसे अहम है। जितना आप दर्द पर ध्यान देंगी उतना ही दर्द आपको महसूस होगा। सम्मोहन, किसी और चीज़ के बारे में सोचना कुछ ऐसी तरीके हैं जो प्रेगनेंट महिलाएं आजमा चुकी हैं, और इनसे दर्द में कमी भी दिखती है।

आप निम्न तरीकों से अपने बच्चे को जल्द से जल्द इस दुनिया में ला सकती हैं:

शरीर का स्कैन: अपने पूरे शरीर को पाँव से सर तक देखें, और देखने के बाद एक्सर्साइज़ से तनाव को कम करें। इसमें आप हाथ को हिला सकते हैं, पाँव हिला सकते हैं, और शरीर को हिला सकते हैं।

रिलेक्स करना: इसमें पहले आप अपने चेहरे और सर की मसल को रिलेक्स करें। इसमें आप अपने सर से लेकर पाँव को आराम दें। फिर आराम से सांस लें, हर बार आप जितनी सांस लें उतनी ही टेंशन बाहर निकालें।

जब भी आप मासपेशी को आराम देते हो वैसे ही सोचें की आपका वो हिस्सा आराम कर रहा है। फिर आप अपने शरीर के हिस्से को आराम से टच कर सकते हैं।

दृश्यतमक छायांकन: इसमें आप आराम करने/रिलेक्स करने की एक जगह के बारे में सोचो, जैसे समंदर का किनारा, पहाड़, नदी, या झरना। और फिर उन यादों के बारे में सोचें जो आपने किसी छुट्टी के समय बिताई थी।

सम्मोहन: प्रेगनेंसी में थोड़ी प्रैक्टिस के साथ, महिलाएं काफी अंदर तक रिलेक्स होने के बारे में सीखती हैं और वो सीखती हैं हैं की डर कुछ नहीं होता, इससे नीचे की ओर कम से कम दर्द होता है। क्लास में ऐसी वीडियो दिखाकर महिलाओं को तैयार किया जाता है जहां महिलाएं सम्मोहन में बच्चों को जन्म देती हैं, सबसे बड़ी बात की इसमें सब कुछ महिलाएं अपने आप ही करती हैं।