क्या आपको गंभीर कब्ज़ है? आप इन प्रकृतिक उपचार से प्रेगनेंसी में कब्ज़ से आराम पा सकते हैं

प्रेगनेंसी में कब्ज़ होना एक आम बात है। लगभग 10 में से 1 महिला को प्रेगनेंसी में कब्ज़ होती है। प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स आपकी मसल को ढीला करते हैं, जिसकी वजह से आपका पाचन भी सही से खाना पचा नहीं पाता और मल निकलने में दिक्कत होती है।

नीचे दी गई स्थिति में आपको कब्ज़ होने की ज़्यादा संभावना है:

यदि आपको पहले भी कई बार कब्ज़ हुआ हो

यदि आप सही से पेय-पदार्थ नहीं पी रही हों

अगर आपको जी मिचलने की समस्या हो रही हो और आपको खाने में दिक्कत हो रही हो

यदि आपको मल करने में जलन हो रही हो

एमीनिया को ठीक करने के लिए आपको आइरन दी जाती है जिससे भी आपको कब्ज़ हो सकती है। जैसे जैसे आपकी प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है वैसे ही आपका बच्चा बड़ा होता है और उससे आपके श्रोणि के भाग में काफी दबाव पड़ता है और इसकी वजह से आपको कब्ज़ हो सकती है।

अगर आपको आपको काफी दर्द होता है मल के समय तो आपको बवासीर भी हो सकता है। अगर आपने कब्ज़ का सही से इलाज़ नहीं करवाया तो इससे आपकी ये समस्या काफी गंभीर हो सकती है।

प्रेगनेंसी में कब्ज़ से बचें कैसे?

पानी-आपको इस समय काफी पानी पीना है, पानी की कमी से आपको कब्ज़ हो सकता है। आप दिन में कई बार पानी पीती रहें। एक्सपर्ट के अनुसार आपको दिन में कम से कम डेढ़ लीटर पानी पीना चाहिए।

फाइबर-आपको इस समय संतुलित आहार लेना है जिसमें अनाज वाला सरियल, फल-सब्जी और ब्रेड हो। इससे आपको खाना पचाने में दिक्कत नहीं होगी।

एक्सर्साइज़-टहलना, स्विमिंग, और साइकिल चलाना आपके लिए सही हो सकता है, या आप प्रेगनेंसी की एक्सर्साइज़ कर सकती हैं। इस समय आप योगा भी कर सकती हैं। आपको साइकलिंग मशीन पर करनी है बाहर नहीं।

कब्ज़ में राहत के लिए सुझाव

आप नीचे दिए गए तरीके से अपना कब्ज़ सही कर सकती हैं:

सब्जी जैसे पत्ता गोभी और पालक आपके लिए सही है।

आप सभी अनाज वाला सरियल और ब्रेड ले सकती हैं।

आपको इस समय बीन्स, मसूर और दाल लेनी चाहिए।

इस समय ताज़े फल जैसे संतरे, अंगूर आपके लिए सही हैं।

आप इस समय मेवे भी खा सकती हैं।

केले के बीज भी आपको कब्ज़ में राहत दे सकते हैं, अगर आपको जलन हो रही है तो आपको काफी आराम मिलेगा। आप इन्हें कुछ खास दवाई के साथ नहीं ले सकती हैं, इसलिए आपको इन्हें लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

अलसी का बीज भी फाइबर और फ़ैटि एसिड से भरपूर होता है और ये भी केले के बीज की तरह होता है। आप इन्हें अपने नाश्ते के ऊपर छिड़क सकते हैं, या आप इनेहीन दही या सलाद में डाल सकते हैं। एक चम्मच के अलसी के बीज के साथ आपको एक गिलास पानी तो पीना ही चाहिए। ज़्यादा ही इन बीज से आपको दस्त हो सकते हैं, या कभी कभी एलर्जी हो सकती है। इसलिए आपको ये सब सही तरीके से खाना है।

सप्लिमेंट

अगर आपको अभी चल रहे आइरन की टैब्लेट से कब्ज़ या दिक्कत हो रही है तो आपको अपने डॉक्टर से अन्य ब्रैंड के लिए पूछना चाहिए। अगर आपको एनीमिया है तो आपको अपने आहार में दाल, लाल मीट, और हरे पत्तों वाली सब्जी खानी चाहिए, इसके साथ आपको डॉक्टर द्वारा दिए गए सप्लिमेंट भी लेने हैं। किसी केस में प्रोबायोटिक्स से आपको कब्ज़ में आराम मिल सकता है। लेकिन आपको कुछ भी लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। अगर कब्ज़ की समस्या कुछ ज़्यादा ही बड़ी हो गई तो आपको लेक्सेटिव लेने एक लिए कह सकते हैं, ये प्रेगनेंसी में सेफ हैं।

श्रोणि को रिलेक्स करना

अगर आपको टॉइलेट जाना हो तो इसमें थोड़ा समय लें। आप पहले टॉइलेट पर बैठें, सांस लें फिर छोड़ दें इससे आपकी श्रोणि की मसल रिलेक्स होगी। आप स्टूल लगाकर अपने पाँव को ऊपर कर सकती हैं, ये आपके लिए सबसे अच्छी मुद्रा है।

आप इन थेरेपी को आजमा सकती हैं:

आप इन थेरेपी को आजमा सकती हैं, हालांकि अभी तक कोई भी ऐसा अध्यन या स्टडी नहीं हुई है जिनमें इनकी प्रमाणिकता हुई हो। अगर आपको फिर भी ये थेरेपी करनी हैं तो आपको किसी एक्सपर्ट से इस बारे में सलाह लेनी चाहिए।

अरोमाथेरेपी-आप अपने नहाने के पानी में संतरे, नींबू की कुछ बूंद मिल सकती हैं। आपको गरम पानी में रिलेक्स करना है। अगर हो सके तो आपको अपने पेट को मसलना है। अपने पेट को कुछ ज़्यादा तेज़ी से न मालिश करें।

एक्यूपंचर-शरीर पर मौजूद कुछ बिंदु कई रोगों का उपचार करने की क्षमता रखते हैं। यदि इन बिंदुओं पर विशेष प्रकार से दबाव डाला जाए, तो यह बहुत ही प्रभावी होते हैं। एक्‍यूपंचर इलाज की ऐसी ही एक पद्धति है, जो शरीर के इन खास बिंदुओं पर सुई के प्रयोग से रोग को दूर करने में मदद मिलती है। यह इलाज की पुरातन जापानी पद्धति है। यदि इसे किसी विशेषज्ञ की देखरेख में किया जाए, तो आमतौर पर इसके दुष्‍प्रभाव कम होते हैं। बिना दवा के दर्द से राहत दिलाने वाले इस उपचार से कई गंभीर और दीर्घकालिक बीमारियों का उपचार किया जा सकता है। इसमें माइग्रेन से लेकर पीठ या कमर दर्द, जोड़ों के दर्द आदि शामिल हैं।

हर्बल दवाई-आप मेलो की चाय पी सकती हैं, जो एक प्रकार का जंगली पौधा होता है, ये पौधों की पत्ती से बनता है। आपको उबलते पानी में इसकी पत्ती डालनी है और इससे आपके कब्ज़ की समस्या कम हो जाएगी।

होम्योपेथी-अभी तक इस बारे में भी स्टडी नहीं आई है की प्रेगनेंसी में होम्योथेरेपी से कितनी मदद मिलती है। हालांकि अगर आपको फिर भी इसको आजमाना है तो आप ऐसा कर सकती हैं, हाँ बस आपको किसी अनुभवी होम्योपेथ के पास जाना होगा।

हम आपको इस बात की भी सलाह देंगे की कोई भी घरेलू उपचार करने से पहले आपको एक बार अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

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