नसों का सूजना: कारण और बचाव

Varicose Veins during pregnancy

वैरिकोज़ नस या सूजी हुई नस तब होती है जब आपकी नस बड़ी, फैली हुई और ज़्यादा ही खून से भरी हुई होती है। इसे वेरिकोसेस या वेरिकोसिटीस भी कहते हैं, ये नस सूजी हुई उभरी हुई और लाल-बैंगनी सी होती है। प्रेगनेंट महिलाओं को ये दिक्कत होना काफी आम है, और आमतौर पर इसमें काफी दर्द होता है।

कारण

इन नसों में केवल एक तरफ के लिए रास्ता होता है, इसलिए वापस खून आने में दिक्कत होती है। जैसे ही नस में खून इकट्ठा होना शुरू होता है, फिर नस और बड़ी होती है। क्योंकि आपकी पाँव की नस आपके दिल से काफी दूर होती है और गुरुत्वाकर्षण की वजह से खून ऊपर जाने में भी दिक्कत होती है, इसलिए ये स्थिति आमतौर पर आपके पाँव के नीचे वाले हिस्से में होती है, हालांकि प्रेगनेंसी में ये आपको आपके गूदे पर भी हो सकती हैं, या योनी वाले एरिया में भी। बवासीर भी वेरिकोज नस ही होती हैं, जो पीछे और आंत में होती है, ये आमतौर पर कब्ज़ की वजह से होती है।

इसके कुछ कारण निम्न हैं:

1.प्रेगनेंसी

2.मासिक धर्म का बंद होना

3.50 साल से ज़्यादा की उम्र

4.ज़्यादातर खड़े ही रहना

5.मोटापा

6.परिवार में किसी को ये दिक्कत हुई हो

प्रेगनेंसी में वेरिकोज नस होना

जैसे ही आपका गर्भाशय बढ़ता है वैसे ही आपके पाँव पर दबाव कुछ ज़्यादा ही पड़ता है। जब आप प्रेगनेंट होती हैं तब आपके शरीर में खून का संचार बढ़ता है, लेकिन आपके पाँव से श्रोणि तक खून का संचार धीमा होता है, इससे आपकी नसों पर और बोझ बढ़ता है। अधिक वज़न होने, पेट में दो या ज़्यादा बच्चे होने या लंबे समय तक खड़े रहने से आपको इस समस्या के होने के खतरे ज़्यादा रहते हैं।

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी में ये दिक्कत होती है वो देखती हैं की समय के बढ्ने के साथ उनकी ये समस्या और बेकार होती है और उम्र बढ्ने से भी इसकी स्थिति बिगड़ती है। आपके पाँव भारी या खुजली वाले हो सकते हैं। आपके नस के चारों ओर आपको खुजली और जलन हो सकती है। आपकी नस सख्त हो सकती है और ये एरिया लाल हो जाता है और दर्द होता है।

प्रेगनेंसी में इससे कैसे बचें?

वैसे ये दिक्कत किसी को भी हो सकती है, लेकिन आप इनसे अपना बचाव तो कर सकते हैं या इसके रिस्क को कम कर सकती हैं:

1.आपको हर दिन एक्सर्साइज़ करनी है और साथ में 30 मिनट के लिए टहलना भी

2.आपको डॉक्टर ने जितना कहा हो उतना ही वज़न बढ़ाएँ

3.अपने पाँव ऊपर करके ही सोएँ, इस समय आपके पाँव किसी स्टूल पर होने चाहिए, और उसके नीचे तकिया होनी चाहिए।

4.पाँव और एड़ी टेढ़ी करके ना बैठें

5.काफी देर तक न बैठे और न खड़े हों। बीच में ब्रेक भी लें

6.अपनी बाईं ओर सोएँ

7.इस समय काफी पानी लें और काफी स्वस्थ खाना लें, जिसमें फाइबर भरपूर हो

अच्छी खबर ये है की ये नस बच्चे को जन्म देने के बाद अपने आप नॉर्मल हो जाती हैं, इसलिए ज़्यादा टेंशन ना लें। आपकी प्रेगनेंसी मंगलमय हो!