गर्भावस्था की तीसरी तिमाही

Third trimester of pregnancy

आप तीसरी तिमाही में अपनी प्रेगनेंसी कि आखरी अवधि में पहुँच गई हैं। आपके पास बस कुछ ही हफ्ते बचे हैं, लेकिन यह अवधि आपके लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

इस आर्टिकल में आपको पता चलेगा कि तीसरी तिमाही में आपको किसके लिए तैयार रहना चाहिए। आपको पता चलेगा कि कौन से लक्षण नॉर्मल हैं, और कौनसे आपको दिक्कत दे सकते हैं।

आपके शरीर में बदलाव

पीठ में दर्द: ज़्यादा वज़न कि वजह से आपकी पीठ पर ज़्यादा दबाव बनता है और इससे आपको दर्द होता है। इससे आपकी श्रोणि में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि आपके ऊतक प्रसव के लिए ढीले हो रहे हैं। पीठ के दर्द को कम करने के लिए आपको अच्छी मुद्रा ट्राय करनी चाहिए। सीधे बैठें और उस कुर्सी पर बैठें जो आपकी पीठ को अच्छे से सहारा दे। रात में एक तरफ होकर सोएँ और अपने पेट और पाँव के बीच में तकिया भी रखें। इस समय आरामदायक जूते पहनें।

खून निकलना: खून निकलना कई बार बड़ी दिक्कत कि वजह हो सकती है, इसमें आपकी गर्भनाल अनियमित रूप से नीचे जा सकती है, और समय से पूर्व प्रसव भी इससे हो सकता है। अगर आपको ऐसी कोई दिक्कत हो तो अपने डॉक्टर को फोन करें।

ब्रेकस्टन हिक्स मरोड़े: आपको थोड़े मरोड़े हो सकते हैं, ऐसा शरीर गर्भाशय को प्रसव के अभ्यास कि तैयारी में करवाता है। ये मरोड़े प्रसव के मरोड़े जैसे गंभीर नहीं होते, लेकिन इनसे प्रसव कि अनुभूति होती है, और ये प्रसव में बदल भी सकते हैं। अगर आपको ज़्यादा ही गहन मरोड़े हों तो आपको अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

स्तन का बढ़ना: आपकी प्रेगनेंसी के अंत तक आपके स्तन 2 पाउंड तक भारी जो जाएंगे। इस बात का खयाल रखें कि आप अपने स्तन को सहारा देने वाली ब्रा पहनें, इससे आपकी पीठ में दर्द नहीं होगा। प्रसव के पास आने पर आपके स्तन से पीला सा दूध निकलेगा। इस पदार्थ को कोलोस्ट्रम कहते हैं, और ये आपके बच्चे को जन्म के कुछ दिन बाद तक पोषण देगा।

योनी से द्रव निकलना: आपको इस समय योनी से ज़्यादा ही द्रव निकलता हुआ दिखाई दे सकता है। अगर ये कुछ ज़्यादा ही ही निकल रहा है तो अपने डॉक्टर को फोन कीजिए। डिलिवरी डेट पास आने के साथ ही आप थोड़ा मोटा और खून जैसा द्रव निकलता हुआ देख सकते हैं। इससे पता चलता है की आपकी गर्भाशय ग्रीवा अब फैलनी शुरू हो गई है, और अब आप प्रसव के लिए तैयार हो रही हैं। अगर आपको लगता है की एक दम से काफी द्रव निकल रहा है तो हो सकता है की आपकी पानी की थैली टूट गई हो, हालांकि केवल 8 प्रतिशत महिलाओं की पानी की थैली मरोड़ों से पहले टूटती है। ऐसा होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।

थकान: दूसरी तिमाही में आप काफी ऊर्जा फील कर सकती हैं, लेकिन इस समय आपको काफी थका-थका लगेगा। पेट में ज़्यादा वज़न होने, रात में टॉइलेट जाने के लिए कई बार उठने की वजह, और बच्चे के आने की चिंता की वजह से आपकी ऊर्जा का स्तर काफी कम हो सकता है। इस समय अच्छा खाना लें, और एक्सर्साइज़ करके खुदके अंदर ऊर्जा बनाएँ रखें। जब भी थकान लगे तब थोड़ी सी नींद ले लें, या कम से कम नीचे बैठके थोड़ा आराम कर लें। आपको बच्चे के लिए साफ़ी ऊर्जा बचाके रखनी है, क्योंकि बच्चा आपकी काफी ऊर्जा सोख लेगा।

बार-बार पेशाब जाना: बच्चे के बड़े होने की वजह से उसका सर आपकी पेशाब की थैली पर दबाव बनाता है। इस दबाव की वजह से आपको बार-बार पेशाब जाना पड़ सकता है, इसमें रात भी नहीं बचती। आप ये देखेंगी की खाँसते, हँसते और छीक लेते हुए आप पेशाब लीक कर सकती हैं, अगर आपको इस स्थिति से बचना है तो जब भी आपको पेशाब जाने का मन हो आप चले जाएँ, इसे रोकने की कोशिश ना करें। सोने से पहले कम से कम द्रव लें, इससे आपको रात में बार-बार पेशाब जाने का मन नहीं करेगा। अगर आपको पेशाब करते हुए कोई दिक्कत जैसे जलन हो रही है तो अपने डॉक्टर को इस बात की जानकारी ज़रूर दें।

सीने में जलन और कब्ज़: प्रोजेस्ट्रोन नाम के हॉरमोन के अधिक मात्रा में बनने की वजह से आपको ये दिक्कत होती है, इससे मसल रिलेक्स होती है। सीने में जलन से आराम के लिए आप दिन में थोड़ा-थोड़ा खाएं पर कम खाएं, और मसाले वाला, तला हुआ ज़्यादा चिप-चिपा खाने से बचें। कब्ज़ से बचने के लिए आपको फाइबर वाला खाना ज़्यादा खाना चाहिए, इस समय ज़्यादा से ज़्यादा द्रव लें, जिससे अंदर सब सुचारु रूप से चले। अगर आपको कब्ज़ से सही में दिक्कत हो रही है तो अपने डॉक्टर से बात करें और बताएं की आपको क्या हो रहा है, वो आपको आपके अनुसार दवाई लिखेंगे।

बवासीर: इसमें वो नसें सूज जाती हैं जो गूदे के बाहर बनती हैं। ये नसें प्रेगनेंसी में और बड़ी हो जाती हैं क्योंकि खून इनसे होकर गुज़रता है और प्रेगनेंसी में बढ्ने वाले वज़न की वजह से आपके इस एरिया पर असर पड़ता है। खुजली और परेशानी से बचने के लिए आपको गरम पानी के टब में बैठना चाहिए, आप इस बारे में अपने डॉक्टर से बात कर सकते हैं। हम जानते हैं की इस बारे में किसी से भी बात करना अजीब लगता है, लेकिन हम आपको बताना चाहेंगे की प्रेगनेंसी में ये दिक्कत होना काफी आम माना जाता है।

सांस लेने में कमी: गर्भाशय के बढ्ने के साथ ही आपके फेफड़ों के लिए कम जगह बचती है, और इसी वजह से फेफड़े सही से काम नहीं कर पाते हैं, और इसी वजह से दबाव के कारण आपको सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। एक्सर्साइज़ करने से आपको सांस लेने में दिक्कत कम हो सकती है। आप सोने से पहले अपने सर और कंधों के नीचे तकिया लगा सकती हैं

स्पाइडर और वेरिकोज नसें: आपका संचार इस समय काफी बढ़ गया है, ताकी आपके बच्चे को भी प्रचुर मात्रा में खून मिल सके। अधिक मात्रा में खून का संचार होने से आपकी नसें लाल हो सकती हैं। ये नसें ही स्पाइडर नसें या मकड़ी नस कहलाती हैं। ये नसें तीसरी तिमाही में और भी बेकार हो सकती हैं, लेकिन बच्चे के आने के बाद ये अपने आप गायब हो जाती हैं। बच्चे द्वारा आपके पाँव पर भी दबाव पड़ता है जिसकी वजह से आपकी नसें सूज जाती हैं। हालांकि सूजी हुई नसों से बचने का कोई रास्ता नहीं है, लेकिन इसके और बुरे होने से बचने के कुछ उपाय हैं:

उठाकर पूरे दिन शारीरिक क्रिया करते रहना

सपोर्ट बेल्ट पहनना

जब भी आपको काफी देर के लिए बैठना बड़े तब-तब अपने पाँव को हिलाते रहिए। बच्चे के जन्म के बाद ये नसें अपने आप बैठ जाती हैं।

सूजन: आप देख रही होंगी की आपका चेहरा और पाँव इन दिनों काफी फुले हुए दिखाई दे रहे होंगे। ये थोड़ी सी सूजन द्रव के अधिक मात्रा में बनने की वजह से होती है। इस सूजन को कम करने के लिए आप जब भी बैठें तब अपने पाँव को टेबल के ऊपर रख लें, या सोते हुए अपने पाँव को हमेशा हिलाएँ। अगर आपको एकदम से सूजने की समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर को फोन करें, ये प्रीक्लेम्सिया हो सकता है।

वज़न बढना: तीसरी तिमाही में आपका वज़न आधा पाउंड से 1 पाउंड प्रति हफ्ता बढ़ना चाहिए। अपनी प्रेगनेंसी के अंत में आपका वज़न 25-35 पाउंड बढ़ना चाहिए। प्रेगनेंसी से पहले आपका वज़न जैसा था, उसके अनुसार ही आपके डॉक्टर ने आपको वज़न बढ़ाने की सलाह दी होगी। अभी बढ़ा हुआ वज़न बच्चे, गर्भनाल, एम्निओटिक द्रव, और स्तन के बढ़े हुए ऊतक की वजह से है। अगर आपका बच्चा ज़्यादा बड़ा या छोटा है तो आपके डॉक्टर बच्चे के विकास को देखने के लिए आपका अल्ट्रासाउंड लिख सकते हैं।

खतरे के संकेत

इनमें से कोई भी दिक्कत यदि आपको है तो हो सकता है की आपकी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत है। इसके बारे में बात करने के लिए ज़्यादा इंतज़ार मत कीजिए और अपने डॉक्टर को तुरंत कॉल करें:

पेट में भयंकर दर्द

काफी ज़्यादा ही उल्टी होना

खून निकलना

चक्कर आना

पेशाब करने के दौरान दर्द होना या जलन होना

एकदम से वज़न का बढ़ना, एक महीने में 6.5 पाउंड, या कुछ कम ही वज़न बढ़ना