प्रेगनेंसी के समय आपके अंगो पर ये प्रभाव पड़ते हैं

 

प्रेगनेंसी आपकी ज़िंदगी बदल देती है, आपको शायद हर जगह से सबसे ज़्यादा यही सुनने को मिले। इस बात से सबका मतलब होता है कि कैसे आपके शरीर में बदलाव आ सकते हैं। इस समय आपकी ज़िंदगी बदल जाती है, और बच्चे को पैदा करने का सुख भी आप जानती हैं, इसी समय आप एक अच्छी नींद को काफी मिस करेंगी। हालांकि हम यहाँ इन आम बदलाव कि बात नहीं कर रहे हैं। जीवन का जादू आपके शरीर में होता है और यह बच्चे के रूप में बाहर आता है। आइए देखते हैं कि इस सफर में आपका शरीर कैसा रहता है। 

  1. प्रेगनेंसी से पहले आपका शरीर

प्रेगनेंसी से पहले आपके पेट में आतें थोड़ी जगह लेती हैं। पेट और श्रोणि के बीच में कोई चीज़ इन्हें अलग नहीं करती। जैसा कि आप चित्र में देख सकते हैं, योनि मूत्र थैली और मूत्रमार्ग के बीच में होती है। नॉर्मल अवस्था में गर्भाशय थैली के पीछे और ऊपर होता है और गर्भाशय ग्रीवा योनि पर फैलती है। इस समय पेट, मलाशय और गुदा नलिका योनि के पीछे रहती है।

  1. 12 हफ्ते बाद आपका शरीर

इस समय गर्भनाल काफी बड़ी होती है, और गर्भ को स्थिर बनाने के लिए यह आवश्यक हार्मोन बनाती है। इस समय गर्भाशय अंगूर जितनी बड़ी होती है; और पूरी श्रोणि में समाहित हो जाती है। यह धीरे-धीरे पेट में ऊपर कि तरफ जाती है। गर्भाशय का टॉप श्रोणि कि हड्डी के बराबर आ जाता है। गर्भाशय में ऊपर कि तरफ हो रही गतिविधि के कारण मूत्र थैली पर दबाव कम बनता है और इस वजह से कम पेशाब कि ज़रूरत पड़ती है। इस समय भ्रूण मात्र 3 इंच लंबा होता है और इसका वज़न 30 ग्राम होता है। अगर आप कोख में देखेंगे तो आपको छोटा सा पाँव और नाखून दिखाई देंगे।

  1. 28 हफ्ते बाद आपका शरीर

आपका गर्भाशय इस समय आपकी नाभि के काफी ऊपर होता है और इस समय यह स्तन कि हड्डी तक लगता है। इस समय मरोड़े हो सकते हैं क्योंकि आपके पेट पर दबाव पड़ता है, और हार्मोन कि वजह से पाचन क्रिया भी धीमी पड़ती है। आपके पेट के सिकुड़ने के कारण आपको सीने में जलन हो सकती है। आपके स्तन इस समय दूध देने के लिए तैयार भी होते हैं। बच्चा स्तन पर बने 15-20 निपल से अपनी भूख मिटाता है। इस समय बच्चा सही तरीके से काम करता है, और अगर समय से पहले बच्चा पैदा भी हुआ तो उसके बचने के आसार रहते हैं।

  1. 40 हफ्ते बाद आपका शरीर

40 हफ्ते के सम्पूर्ण समय के बाद बच्चा श्रोणि में सर के बल नीचे जाता है, इस घटना को लाइटनिंग कहते हैं। अगर यह आपका पहला बच्चा है तो ये घटना प्रसव के कुछ हफ्तों पहले हो सकती है। दूसरी प्रेगनेंसी में यह घटना प्रसव के समय ही होती है। गर्भाशय ग्रीवा कि नली का रास्ता इस समय चिपचिपे डाट द्वारा रुका रहता है। इस समय सभी अंदरूनी अंग दबाव में रहते हैं और आपको मरोड़ों और दर्द कि समस्या ज़्यादा हो सकती है। पर चिंता न करें, ये सभी लक्षण बच्चा पैदा होने के बाद अपने आप सही हो जाते हैं, क्योंकि सभी अंग नॉर्मल साइज़ के हो जाते हैं।

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